Skip to main content
🇬🇧Read in English

दैनिक होरा

आज · सोमवार, 13 जुलाई 2026

सूर्योदय से सूर्योदय तक को बाँटने वाले बारह दिन व बारह रात के ग्रह घंटे — कोई भी महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ करने से पहले अपने शहर के हर होरा का स्वामी ग्रह देखें।

एक नज़र में होरा

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

अभी

अगला

कृष्ण चतुर्दशी · सोम

00061218चंद्र · 05:32 – 06:41शनि · 06:41 – 07:50गुरु · 07:50 – 08:59मंगल · 08:59 – 10:08सूर्य · 10:08 – 11:17शुक्र · 11:17 – 12:26बुध · 12:26 – 13:35चंद्र · 13:35 – 14:45शनि · 14:45 – 15:54गुरु · 15:54 – 17:03मंगल · 17:03 – 18:12सूर्य · 18:12 – 19:21शुक्र · 19:21 – 20:12बुध · 20:12 – 21:03चंद्र · 21:03 – 21:54शनि · 21:54 – 22:45गुरु · 22:45 – 23:36मंगल · 23:36 – 00:27सूर्य · 00:27 – 01:18शुक्र · 01:18 – 02:08बुध · 02:08 – 02:59चंद्र · 02:59 – 03:50शनि · 03:50 – 04:41गुरु · 04:41 – 05:32

16:35:13

दिन के घंटे

12·1 घं 9 मि
05:32
06:41
07:50
08:59
10:08
11:17
12:26
13:35
14:45
15:54
17:03
18:12

रात के घंटे

12·51 मि
19:21
20:12
21:03
21:54
22:45
23:36
00:27
01:18
02:08
02:59
03:50
04:41

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अगले 7 दिनों का होरा

आने वाले सप्ताह के हर दिन व रात के ग्रह घंटे उसके स्वामी ग्रह व आरंभ समय के साथ — हरे स्वामी शुभ हैं, लाल टालना श्रेष्ठ है। समय आपके चुने हुए शहर के अनुसार हैं।

शुभमिश्रितकठिन

दिन का होरा

तिथि123456789101112
सोम, 13 जुल॰चंद्र05:32शनि06:41गुरु07:50मंगल08:59सूर्य10:08शुक्र11:17बुध12:26चंद्र13:35शनि14:45गुरु15:54मंगल17:03सूर्य18:12
मंगल, 14 जुल॰मंगल05:32सूर्य06:41शुक्र07:50बुध08:59चंद्र10:08शनि11:17गुरु12:26मंगल13:35सूर्य14:45शुक्र15:54बुध17:03चंद्र18:12
बुध, 15 जुल॰बुध05:33चंद्र06:42शनि07:51गुरु09:00मंगल10:09सूर्य11:18शुक्र12:27बुध13:36चंद्र14:44शनि15:53गुरु17:02मंगल18:11
गुरु, 16 जुल॰गुरु05:33मंगल06:42सूर्य07:51शुक्र09:00बुध10:09चंद्र11:18शनि12:27गुरु13:36मंगल14:44सूर्य15:53शुक्र17:02बुध18:11
शुक्र, 17 जुल॰शुक्र05:34बुध06:43चंद्र07:51शनि09:00गुरु10:09मंगल11:18सूर्य12:27शुक्र13:36बुध14:44चंद्र15:53शनि17:02गुरु18:11
शनि, 18 जुल॰शनि05:34गुरु06:43मंगल07:52सूर्य09:01शुक्र10:09बुध11:18चंद्र12:27शनि13:36गुरु14:44मंगल15:53सूर्य17:02शुक्र18:11
रवि, 19 जुल॰सूर्य05:35शुक्र06:43बुध07:52चंद्र09:01शनि10:10गुरु11:18मंगल12:27सूर्य13:36शुक्र14:44बुध15:53चंद्र17:02शनि18:10

रात का होरा

तिथि123456789101112
सोम, 13 जुल॰शुक्र19:21बुध20:12चंद्र21:03शनि21:54गुरु22:45मंगल23:36सूर्य00:27शुक्र01:18बुध02:08चंद्र02:59शनि03:50गुरु04:41
मंगल, 14 जुल॰शनि19:21गुरु20:12मंगल21:03सूर्य21:54शुक्र22:45बुध23:36चंद्र00:27शनि01:18गुरु02:09मंगल03:00सूर्य03:51शुक्र04:42
बुध, 15 जुल॰सूर्य19:20शुक्र20:11बुध21:03चंद्र21:54शनि22:45गुरु23:36मंगल00:27सूर्य01:18शुक्र02:09बुध03:00चंद्र03:51शनि04:42
गुरु, 16 जुल॰चंद्र19:20शनि20:11गुरु21:02मंगल21:53सूर्य22:45शुक्र23:36बुध00:27चंद्र01:18शनि02:09गुरु03:00मंगल03:51सूर्य04:43
शुक्र, 17 जुल॰मंगल19:20सूर्य20:11शुक्र21:02बुध21:53चंद्र22:45शनि23:36गुरु00:27मंगल01:18सूर्य02:09शुक्र03:01बुध03:52चंद्र04:43
शनि, 18 जुल॰बुध19:19चंद्र20:11शनि21:02गुरु21:53मंगल22:44सूर्य23:36शुक्र00:27बुध01:18चंद्र02:10शनि03:01गुरु03:52मंगल04:44
रवि, 19 जुल॰गुरु19:19मंगल20:10सूर्य21:02शुक्र21:53बुध22:44चंद्र23:36शनि00:27गुरु01:19मंगल02:10सूर्य03:01शुक्र03:53बुध04:44

होरा क्या है?

होरा वैदिक काल-गणना की ग्रह-घंटा पद्धति है — “घंटा” (hour) शब्द भी इसी मूल से निकला है। यह सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को बारह बराबर भागों में और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को बारह और भागों में बाँटती है — कुल चौबीस होरा। प्रत्येक होरा सात शास्त्रीय ग्रहों — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — में से किसी एक द्वारा शासित होता है और लगभग एक घंटे की अपनी अवधि में उसी ग्रह का स्वभाव धारण करता है। चूँकि स्वामित्व एक निश्चित ग्रह-क्रम में दोहराता है और हर दिन का पहला होरा उसी ग्रह का होता है जिससे वार का नाम बनता है, एक नज़र में पता चल जाता है कि आने वाले समय का स्वामी कौन-सा ग्रह है और वह आपके कार्य के अनुकूल है या नहीं।

वैदिक ज्योतिष में होरा का महत्त्व

जहाँ पूरा मुहूर्त तिथि, नक्षत्र और सम्पूर्ण कुंडली तौलता है, वहीं होरा वह त्वरित परत है जिसे जानकार सबसे पहले देखते हैं — बिना कुंडली बनाए किसी भी घंटे को किसी ग्रह के स्वभाव से रंगने का तरीका। इसे इसीलिए सराहा जाता है क्योंकि इसमें सूर्योदय, सूर्यास्त और वार के अतिरिक्त कुछ नहीं चाहिए, सो कोई भी इसे किसी भी स्थान व दिन के लिए पढ़ सकता है।

व्यवहार में होरा का प्रयोग व्यापक दिन चुन लेने के बाद समय को सूक्ष्म करने में होता है: धन-संबंधी बातचीत गुरु या बुध के होरा में, यात्रा चंद्र या शुक्र के होरा में, कठिन शारीरिक श्रम मंगल या शनि के होरा में रखें। शुभ होरा — गुरु, शुक्र, बुध और चंद्र — नए आरंभ के लिए चुने जाते हैं, जबकि कठोर होरा सामान्य या श्रम-साध्य कार्यों के लिए रहते हैं। बहुत-से लोग कोई महत्त्वपूर्ण घंटा तय करने से पहले इसे चौघड़िया और राहु काल की जाँच के साथ देखते हैं।

होरा की गणना कैसे होती है

होरा पूरी तरह सूर्योदय, सूर्यास्त और वार से बनता है — इसमें कुंडली की ज़रूरत नहीं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को बारह बराबर भागों में बाँटकर दिन के होरा और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक को बारह भागों में बाँटकर रात के होरा बनते हैं। चूँकि साल भर दिन-रात की लंबाई बदलती है, कोई होरा ठीक साठ मिनट का कम ही होता है; ग्रीष्म संक्रांति के पास दिन का होरा रात के होरा से लंबा और शीत संक्रांति के पास छोटा होता है।

पहले दिन-होरा का स्वामी वार का ग्रह ही होता है: रविवार सूर्य से, सोमवार चंद्र से, मंगलवार मंगल से, और इसी तरह आरंभ होता है। वहाँ से प्रत्येक अगला होरा निश्चित कैल्डियन क्रम — सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल — में चलता है और चौबीसों ख़ानों को भरने तक दोहराता है। इसी एक नियम के कारण किसी होरा का स्वामी ग्रह वार और क्रम से निश्चित रहता है, पर वह घड़ी में कब आता है यह आपके शहर के सूर्योदय और ऋतु के साथ बदलता है।

वार के अनुसार होरा — पहला घंटा

हर वार के लिए पहले दिन व पहले रात के होरा का स्वामी। आगे का हर होरा वहीं से निश्चित कैल्डियन क्रम में चलता है।

वारपहला दिन-होरापहला रात-होरा
रविसूर्यगुरु
सोमचंद्रशुक्र
मंगलमंगलशनि
बुधबुधसूर्य
गुरुगुरुचंद्र
शुक्रशुक्रमंगल
शनिशनिबुध

ग्रह घंटे और उनके अर्थ

वही सात ग्रह बारी-बारी से होरा का स्वामित्व करते हैं, हर एक अपने घंटे को अपना स्वभाव देता है। चार को व्यापक रूप से शुभ और तीन को अधिक कठिन माना जाता है, यद्यपि हर ग्रह के अपने अनुकूल कार्य होते हैं।

प्रत्येक होरा का महत्त्व

हर ग्रह-होरा शास्त्रीय रूप से किसका कारक है और किस कार्य में सर्वोत्तम है।

सूर्य

मिश्रित

सूर्य का होरा अधिकार, ओज और आत्मविश्वास लाता है। यह शासन व वरिष्ठों से व्यवहार, पद व प्रतिष्ठा के कार्य, औषधि और नेतृत्व-प्रधान कार्यों के लिए अनुकूल है — पर इसकी तीव्रता कोमल या साझेदारी के कार्यों के लिए कम उपयुक्त है।

चंद्र

शुभ

चंद्र का होरा कोमल, तरल और पोषक है। यह यात्रा, जनसंपर्क, जल व तरल पदार्थ, घर-परिवार के कार्य और भावनात्मक या देखभाल वाले कार्यों में सहायक है। अधिकांश कोमल आरंभों के लिए शुभ घंटा।

मंगल

कठिन

मंगल का होरा ऊर्जावान, प्रबल और साहसी है। यह शारीरिक श्रम, खेल व प्रतिस्पर्धा, शल्यक्रिया, भूमि, यंत्र व औज़ार के कार्य और निर्णायक क्रिया के लिए उपयुक्त है — पर इसकी उष्णता कोमल या शांति के कार्यों के लिए ठीक नहीं।

बुध

शुभ

बुध का होरा तीव्र, कुशल और संवाद-प्रिय है। यह अध्ययन, लेखन, लेखा व व्यापार, मोल-भाव, अनुबंध पर हस्ताक्षर और बुद्धि व वाणिज्य के हर कार्य के लिए उत्तम है।

गुरु

शुभ

गुरु का होरा सबसे शुभ है — ज्ञानी, विस्तारशील और हितकारी। यह संस्कार, शिक्षा, वित्त व निवेश, साधना, विवाह-वार्ता और किसी भी महत्त्वपूर्ण नए आरंभ के लिए पारंपरिक पसंद है।

शुक्र

शुभ

शुक्र का होरा उष्ण, सामंजस्यपूर्ण और सुख-प्रिय है। यह प्रेम व विवाह, कला, संगीत, सौंदर्य व विलासिता, वाहन व आभूषण, और सुख, रोमांस या उत्सव से जुड़े कार्यों के लिए अनुकूल है।

शनि

कठिन

शनि का होरा धीमा, अनुशासित और सहनशील है। यह श्रम व दीर्घकालिक प्रयास, भूमि-भवन व निर्माण, लोहा, तेल व वृद्धजनों से व्यवहार के लिए उपयुक्त है — पर नए शुभ कार्य इसमें पारंपरिक रूप से टाले जाते हैं।

विभिन्न होरा के लिए सर्वोत्तम कार्य

कार्य को उस ग्रह से मिलाएँ जो उस घंटे का स्वामी है। शुभ होरा नए व कोमल कार्यों के लिए उपयुक्त हैं; कठोर होरा श्रम, सामान्य कार्य या उन कामों के लिए जो करने ही हैं।

होराकिसके लिए उत्तम
सूर्यअधिकार, शासन कार्य, स्वास्थ्य, नेतृत्व
चंद्रयात्रा, जनसंपर्क, घर-परिवार, देखभाल
मंगलऊर्जा, खेल, शल्यक्रिया, भूमि, यंत्र
बुधअध्ययन, संवाद, व्यापार, लेखा, लेखन
गुरुसंस्कार, शिक्षा, वित्त, शुभ आरंभ
शुक्रप्रेम-विवाह, कला, सौंदर्य, वाहन, विलास
शनिश्रम, भूमि-भवन, दीर्घकालिक व धैर्य के कार्य

दैनिक नियोजन में होरा का उपयोग कैसे करें

दिन का क्रम सुबह एक बार पढ़ें और अपने कार्यों को उनके अनुकूल होरा में रखें। धन-वार्ता, अध्ययन और काग़ज़ी काम बुध या गुरु के होरा के लिए रखें; यात्रा पर निकलें या लोगों से मिलें चंद्र या शुक्र के होरा में; भारी, शारीरिक या दोहराव वाले काम मंगल या शनि के होरा में, जहाँ उनकी प्रेरणा बाधा नहीं बल्कि सहायक है।

जो भी टिकाऊ चाहिए — कोई नया उद्यम, ख़रीद, महत्त्वपूर्ण पहली भेंट — उसके लिए शुभ होरा, आदर्शतः गुरु या शुक्र की प्रतीक्षा करें। अनुभवी लोग एक जाँच और जोड़ते हैं: अच्छा होरा भी छोड़ दिया जाता है यदि वह राहु काल या दिन के किसी अन्य अशुभ खंड से टकराए। सबसे अच्छा क्षण वही शुभ होरा है जिस पर कोई छाया न हो।

होरा और मुहूर्त का संबंध

होरा इलेक्शनल समय की एक एकल, त्वरित परत है, पूरा मुहूर्त नहीं। यह केवल उस घंटे का स्वामी ग्रह बताता है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और वार से निकलता है — आपकी कुंडली से कभी नहीं। मुहूर्त कहीं गहराई में जाता है, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और ग्रह-स्थिति तौलकर किसी बड़े आयोजन के लिए वास्तव में अनुकूल क्षण ढूँढता है।

रोज़मर्रा में दोनों साथ काम करते हैं। होरा और चौघड़िया घंटे को सूक्ष्म करते हैं, राहु काल की जाँच सबसे ख़राब खंड हटाती है, और विवाह, गृहप्रवेश व अन्य बड़े अवसरों के लिए किसी ज्योतिषी का पूरा मुहूर्त व्यापक दिन तय करता है। होरा को पहले से मोटे तौर पर चुने गए समय पर अंतिम स्पर्श समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

होरा क्या है?
होरा वैदिक ज्योतिष की ग्रह-घंटा पद्धति है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात — दोनों को बारह-बारह भागों में बाँटा जाता है, जिससे चौबीस होरा बनते हैं। प्रत्येक सात शास्त्रीय ग्रहों में से किसी एक द्वारा शासित होता है और लगभग एक घंटे तक उसी ग्रह का स्वभाव धारण करता है।
होरा की गणना कैसे होती है?
दिन को बारह बराबर दिन-होरा और रात को बारह बराबर रात-होरा में बाँटा जाता है। पहला दिन-होरा वार के ग्रह का होता है, और हर अगला होरा निश्चित कैल्डियन क्रम — सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल — में चलता है। दिन-रात की लंबाई बदलने के कारण कोई होरा ठीक साठ मिनट का कम ही होता है।
दिन का होरा और रात का होरा क्या है?
दिन का होरा सूर्योदय से सूर्यास्त तक के बारह ग्रह घंटों का क्रम है; रात का होरा सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के बारह। वे भिन्न बिंदु से आरंभ होते हैं और उनकी लंबाई अलग होती है, इसलिए दिन व रात के होरा अलग-अलग पढ़े जाते हैं।
महत्त्वपूर्ण कार्य आरंभ करने के लिए कौन-सा होरा श्रेष्ठ है?
शुभ होरा — गुरु, शुक्र, बुध और चंद्र — नए आरंभ के लिए पसंद किए जाते हैं। गुरु समग्र रूप से सबसे शुभ है, शुक्र प्रेम व सुख के लिए, बुध अध्ययन व व्यापार के लिए, और चंद्र यात्रा व जनसंपर्क के लिए। सूर्य, मंगल व शनि के होरा अधिकार, श्रम और सामान्य कार्यों के लिए रखे जाते हैं।
क्या होरा स्थान के अनुसार बदलता है?
हाँ। प्रत्येक होरा स्थानीय सूर्योदय व सूर्यास्त से मापा जाता है, जो हर स्थान पर भिन्न होते हैं। जब आप दूसरा शहर चुनते हैं तो हर दिन व रात का होरा — और सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय व चंद्रास्त — उस स्थान के लिए पुनः गणना होते हैं।
क्या होरा हर दिन बदलता है?
पहले होरा का स्वामी ग्रह वार से निश्चित होता है, इसलिए पूरा क्रम हर दिन बदल जाता है। ऋतु के साथ दिन-रात की लंबाई बदलने पर घड़ी के समय भी खिसकते हैं, इसलिए किसी क्षण का होरा लगातार दो दिन शायद ही एक जैसा रहता है।
दैनिक जीवन में होरा का उपयोग कैसे करें?
दिन का क्रम सुबह पढ़ें और कार्यों को उपयुक्त होरा में रखें — अध्ययन व धन-कार्य बुध या गुरु के होरा में, यात्रा चंद्र या शुक्र के होरा में, कठिन शारीरिक श्रम मंगल या शनि के होरा में। किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए ऐसा शुभ होरा चुनें जो राहु काल से न टकराए।
होरा और मुहूर्त में क्या अंतर है?
होरा केवल उस घंटे का स्वामी ग्रह बताता है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और वार से निकलता है। मुहूर्त एक पूर्ण चयन है जो तिथि, नक्षत्र, योग और ग्रह-स्थिति भी तौलता है। होरा त्वरित अंतिम परत है; मुहूर्त किसी बड़े आयोजन के लिए गहरा चुनाव है।
मेरे स्थान के लिए आज का होरा क्या है?
यह पृष्ठ आपके चुने हुए शहर के लिए आज का पूरा दिन व रात का होरा क्रम दिखाता है, हर स्वामी ग्रह व उसकी समय-अवधि के साथ, और साइडबार में चल रहा ग्रह घंटा। अपना स्थान बदलें और उस स्थान के लिए हर होरा पुनः गणना होगा।