दैनिक पंचांग
आज · बुधवार, 9 सितंबर 2026
विक्रम संवत् 2083शक संवत् 1948
आज बुधवार है। त्रयोदशी तिथि 12:31 बजे तक, फिर चतुर्दशी 10:33 (कल) बजे तक रहेगी। आश्लेषा नक्षत्र 15:13 बजे तक, उसके बाद मघा 14:03 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शिव 21:51 बजे तक, फिर सिद्ध योग 19:16 (कल) बजे तक। वणिज करण 12:31 बजे तक, उसके बाद विष्टि 23:30 बजे तक, फिर शकुनि 10:33 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (12:18 से 13:52) के दौरान टालें। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक श्रावण
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण त्रयोदशी
बीते दिन14:43आज12:31
कृष्ण चतुर्दशी
आज12:31अगले दिन10:33
त्रयोदशी — उत्साह की तिथि। उत्सव और सक्रिय कार्यों के लिए शुभ।
बुधवार
बुधवार — बुध द्वारा शासित। संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तश्रावणपूर्णिमान्तभाद्रपद
नक्षत्र · योग · करण
आश्लेषा
बीते दिन16:38आज15:13
मघा
आज15:13अगले दिन14:03
तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।
शिव
आज00:39आज21:51
सिद्ध
आज21:51अगले दिन19:16
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
वणिज
आज01:35आज12:31
विष्टि
आज12:31आज23:30
शकुनि
आज23:30अगले दिन10:33
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
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कृष्ण त्रयोदशी · बुध
10:59:26
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0307:36 | ||
| 07:3609:10 | ||
| 09:1010:44 | ||
| 10:4412:18 | ||
| 12:1813:52 | ||
| 13:5215:25 | ||
| 15:2516:59 | ||
| 16:5918:33 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:3319:59 | ||
| 19:5921:26 | ||
| 21:2622:52 | ||
| 22:5200:18 | ||
| 00:1801:44 | ||
| 01:4403:11 | ||
| 03:1104:37 | ||
| 04:3706:03 |
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0307:36 | ||
| 07:3609:10 | ||
| 09:1010:44 | ||
| 10:4412:18 | ||
| 12:1813:52 | ||
| 13:5215:25 | ||
| 15:2516:59 | ||
| 16:5918:33 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:3319:59 | ||
| 19:5921:26 | ||
| 21:2622:52 | ||
| 22:5200:18 | ||
| 00:1801:44 | ||
| 01:4403:11 | ||
| 03:1104:37 | ||
| 04:3706:03 |
| 04:31→05:17 | ||
| 13:43→15:13 | ||
| 12:18→13:52 | ||
| 07:36→09:10 | ||
| 10:44→12:18 | ||
| 04:41→06:11 |
दिन के घंटे
12·1 घं 3 मि| 06:0307:05 | ||
| 07:0508:08 | ||
| 08:0809:10 | ||
| 09:1010:13 | ||
| 10:1311:15 | ||
| 11:1512:18 | ||
| 12:1813:20 | ||
| 13:2014:23 | ||
| 14:2315:25 | ||
| 15:2516:28 | ||
| 16:2817:31 | ||
| 17:3118:33 |
रात के घंटे
12·57 मि| 18:3319:31 | ||
| 19:3120:28 | ||
| 20:2821:26 | ||
| 21:2622:23 | ||
| 22:2323:21 | ||
| 23:2100:18 | ||
| 00:1801:16 | ||
| 01:1602:13 | ||
| 02:1303:11 | ||
| 03:1104:08 | ||
| 04:0805:06 | ||
| 05:0606:03 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 9 सितंबर 2026 की तिथि क्या है?
- 9 सितंबर 2026 की तिथि कृष्ण त्रयोदशी है।
- 9 सितंबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 9 सितंबर 2026 का नक्षत्र आश्लेषा और योग शिव है।
- 9 सितंबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:03 पर तथा सूर्यास्त 18:33 पर होगा।
- 9 सितंबर 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 12:18–13:52 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।
आजबुधवार, 9 सितंबर 2026कृष्ण त्रयोदशीआश्लेषा
आजबुधवार, 9 सितंबर 2026कृष्ण त्रयोदशीआश्लेषा
आगामी पर्व
शरद नवरात्रि
11 अक्टूबर 202632 दिन मेंदेवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित शरद ऋतु की नौ रातें, जो दशहरे पर समाप्त होती हैं। उपवास, गरबा और डांडिया के साथ मनाई जाती हैं।
दशहरा
20 अक्टूबर 202641 दिन मेंरावण पर श्रीराम की विजय का उत्सव — असत्य पर सत्य की जीत। अनेक नगरों में रावण के पुतले का दहन होता है; अन्य स्थानों पर यह नवरात्रि की पूर्णाहुति का दिन है।
करवा चौथ
29 अक्टूबर 202650 दिन मेंविवाहित स्त्रियाँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। छलनी से चंद्र दर्शन के बाद व्रत पूर्ण होता है।
आजबुधवार, 9 सितंबर 2026कृष्ण त्रयोदशीआश्लेषा
आगामी पर्व
धनतेरस
7 नवंबर 202659 दिन मेंदीपावली पर्व का प्रथम दिन। स्वर्ण, चाँदी या नए बर्तन ख़रीदना तथा आरोग्य देवता धन्वंतरि की पूजा शुभ मानी जाती है।
दीवाली
8 नवंबर 202660 दिन मेंप्रकाश पर्व, श्रीराम के अयोध्या लौटने तथा धन की देवी लक्ष्मी के पूजन का दिन। घरों में दीप जलाए जाते हैं, लक्ष्मी पूजन और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
गोवर्धन पूजा
10 नवंबर 20262 महीने मेंश्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने का स्मरण। भक्त अन्नकूट — विभिन्न व्यंजनों का पर्वत — कृष्ण को अर्पित करते हैं।
भाई दूज
11 नवंबर 20262 महीने मेंबहनें भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनके मंगल की कामना करती हैं और भाई बहनों को उपहार देते हैं। दीपावली पर्व का समापन दिवस।
लाभ पंचम
14 नवंबर 20262 महीने मेंदीपावली के बाद का पाँचवाँ दिन, गुजराती व्यापार परंपरा में 'लाभ' का दिन — दुकानें पुनः खुलती हैं, नए बही-खातों का शुभारंभ होता है और व्यापार नववर्ष की पहली प्रविष्टियाँ करते हैं।
छठ पूजा
15 नवंबर 20262 महीने मेंसूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिवसीय पर्व। भक्त कठोर उपवास रखते हैं और नदी या तालाब के तट पर अस्तगामी एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

