दैनिक पंचांग
आज · शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026
विक्रम संवत् 2083शक संवत् 1948
आज शुक्रवार है। षष्ठी तिथि 10:15 बजे तक, फिर सप्तमी 08:00 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र है। आज का योग व्यतीपात 18:16 बजे तक, फिर वरीयान् योग 15:20 (कल) बजे तक। वणिज करण 10:15 बजे तक, उसके बाद विष्टि 21:07 बजे तक, फिर बव 08:00 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (10:41 से 12:10) के दौरान टालें। चन्द्रमा वृषभ राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक भाद्रपद
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण षष्ठी
बीते दिन12:35आज10:15
कृष्ण सप्तमी
आज10:15अगले दिन08:00
षष्ठी — साहस और बल की तिथि। कठिन कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
शुक्रवार
शुक्रवार — शुक्र द्वारा शासित। सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
- अमान्तभाद्रपदपूर्णिमान्तआश्विन
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा · पाद 1
आज04:26अगले दिन02:54
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
व्यतीपात
बीते दिन21:17आज18:16
वरीयान्
आज18:16अगले दिन15:20
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
वणिज
बीते दिन23:25आज10:15
विष्टि
आज10:15आज21:07
बव
आज21:07अगले दिन08:00
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
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कृष्ण षष्ठी · शुक्र
13:02:29
दिन के समय
8·1 घं 29 मि| 06:1407:43 | ||
| 07:4309:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:10 | ||
| 12:1013:39 | ||
| 13:3915:08 | ||
| 15:0816:37 | ||
| 16:3718:06 |
रात के समय
8·1 घं 31 मि| 18:0619:37 | ||
| 19:3721:08 | ||
| 21:0822:39 | ||
| 22:3900:10 | ||
| 00:1001:41 | ||
| 01:4103:12 | ||
| 03:1204:43 | ||
| 04:4306:15 |
दिन के समय
8·1 घं 29 मि| 06:1407:43 | ||
| 07:4309:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:10 | ||
| 12:1013:39 | ||
| 13:3915:08 | ||
| 15:0816:37 | ||
| 16:3718:06 |
रात के समय
8·1 घं 31 मि| 18:0619:37 | ||
| 19:3721:08 | ||
| 21:0822:39 | ||
| 22:3900:10 | ||
| 00:1001:41 | ||
| 01:4103:12 | ||
| 03:1204:43 | ||
| 04:4306:15 |
| 04:37→05:26 | ||
| 11:46→12:34 | ||
| 18:40→20:10 | ||
| 10:41→12:10 | ||
| 15:08→16:37 | ||
| 07:43→09:12 | ||
| 09:41→11:11 |
दिन के घंटे
12·59 मि| 06:1407:13 | ||
| 07:1308:13 | ||
| 08:1309:12 | ||
| 09:1210:11 | ||
| 10:1111:11 | ||
| 11:1112:10 | ||
| 12:1013:09 | ||
| 13:0914:08 | ||
| 14:0815:08 | ||
| 15:0816:07 | ||
| 16:0717:06 | ||
| 17:0618:06 |
रात के घंटे
12·1 घं 1 मि| 18:0619:06 | ||
| 19:0620:07 | ||
| 20:0721:08 | ||
| 21:0822:09 | ||
| 22:0923:09 | ||
| 23:0900:10 | ||
| 00:1001:11 | ||
| 01:1102:12 | ||
| 02:1203:12 | ||
| 03:1204:13 | ||
| 04:1305:14 | ||
| 05:1406:15 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 2 अक्टूबर 2026 की तिथि क्या है?
- 2 अक्टूबर 2026 की तिथि कृष्ण षष्ठी है।
- 2 अक्टूबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 2 अक्टूबर 2026 का नक्षत्र मृगशिरा और योग व्यतीपात है।
- 2 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:14 पर तथा सूर्यास्त 18:06 पर होगा।
- 2 अक्टूबर 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 10:41–12:10 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।
आजशुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026कृष्ण षष्ठीमृगशिरा
आगामी पर्व
शरद नवरात्रि
11 अक्टूबर 20269 दिन मेंदेवी दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित शरद ऋतु की नौ रातें, जो दशहरे पर समाप्त होती हैं। उपवास, गरबा और डांडिया के साथ मनाई जाती हैं।
दशहरा
20 अक्टूबर 202618 दिन मेंरावण पर श्रीराम की विजय का उत्सव — असत्य पर सत्य की जीत। अनेक नगरों में रावण के पुतले का दहन होता है; अन्य स्थानों पर यह नवरात्रि की पूर्णाहुति का दिन है।
करवा चौथ
29 अक्टूबर 202627 दिन मेंविवाहित स्त्रियाँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। छलनी से चंद्र दर्शन के बाद व्रत पूर्ण होता है।
आजशुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026कृष्ण षष्ठीमृगशिरा
आगामी पर्व
धनतेरस
7 नवंबर 202636 दिन मेंदीपावली पर्व का प्रथम दिन। स्वर्ण, चाँदी या नए बर्तन ख़रीदना तथा आरोग्य देवता धन्वंतरि की पूजा शुभ मानी जाती है।
दीवाली
8 नवंबर 202637 दिन मेंप्रकाश पर्व, श्रीराम के अयोध्या लौटने तथा धन की देवी लक्ष्मी के पूजन का दिन। घरों में दीप जलाए जाते हैं, लक्ष्मी पूजन और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
गोवर्धन पूजा
10 नवंबर 202639 दिन मेंश्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने का स्मरण। भक्त अन्नकूट — विभिन्न व्यंजनों का पर्वत — कृष्ण को अर्पित करते हैं।
भाई दूज
11 नवंबर 202640 दिन मेंबहनें भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनके मंगल की कामना करती हैं और भाई बहनों को उपहार देते हैं। दीपावली पर्व का समापन दिवस।
लाभ पंचम
14 नवंबर 202643 दिन मेंदीपावली के बाद का पाँचवाँ दिन, गुजराती व्यापार परंपरा में 'लाभ' का दिन — दुकानें पुनः खुलती हैं, नए बही-खातों का शुभारंभ होता है और व्यापार नववर्ष की पहली प्रविष्टियाँ करते हैं।
छठ पूजा
15 नवंबर 202644 दिन मेंसूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिवसीय पर्व। भक्त कठोर उपवास रखते हैं और नदी या तालाब के तट पर अस्तगामी एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
आजशुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026कृष्ण षष्ठीमृगशिरा

