दैनिक पंचांग
आज · बुधवार, 14 अक्टूबर 2026
विक्रम संवत् 2083शक संवत् 1948
आज बुधवार है। चतुर्थी तिथि है। अनुराधा नक्षत्र है। आज का योग आयुष्मान् 20:37 बजे तक, फिर सौभाग्य योग 21:13 (कल) बजे तक। वणिज करण 12:17 बजे तक, फिर विष्टि 01:13 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (12:07 से 13:33) के दौरान टालें। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आश्विन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल चतुर्थी
बीते दिन23:28अगले दिन01:13
चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।
बुधवार
बुधवार — बुध द्वारा शासित। संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तआश्विनपूर्णिमान्तआश्विन
नक्षत्र · योग · करण
अनुराधा · पाद 1
आज01:42अगले दिन04:02
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
आयुष्मान्
बीते दिन20:22आज20:37
सौभाग्य
आज20:37अगले दिन21:13
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
वणिज
बीते दिन23:28आज12:17
विष्टि
आज12:17अगले दिन01:13
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
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शुक्ल चतुर्थी · बुध
18:06:14
दिन के समय
8·1 घं 26 मि| 06:2107:47 | ||
| 07:4709:14 | ||
| 09:1410:40 | ||
| 10:4012:07 | ||
| 12:0713:33 | ||
| 13:3314:59 | ||
| 14:5916:26 | ||
| 16:2617:52 |
रात के समय
8·1 घं 34 मि| 17:5219:26 | ||
| 19:2621:00 | ||
| 21:0022:33 | ||
| 22:3300:07 | ||
| 00:0701:40 | ||
| 01:4003:14 | ||
| 03:1404:48 | ||
| 04:4806:21 |
दिन के समय
8·1 घं 26 मि| 06:2107:47 | ||
| 07:4709:14 | ||
| 09:1410:40 | ||
| 10:4012:07 | ||
| 12:0713:33 | ||
| 13:3314:59 | ||
| 14:5916:26 | ||
| 16:2617:52 |
रात के समय
8·1 घं 34 मि| 17:5219:26 | ||
| 19:2621:00 | ||
| 21:0022:33 | ||
| 22:3300:07 | ||
| 00:0701:40 | ||
| 01:4003:14 | ||
| 03:1404:48 | ||
| 04:4806:21 |
| 04:41→05:31 | ||
| 16:37→18:23 | ||
| 12:07→13:33 | ||
| 07:47→09:14 | ||
| 10:40→12:07 | ||
| 06:05→07:51 |
दिन के घंटे
12·58 मि| 06:2107:18 | ||
| 07:1808:16 | ||
| 08:1609:14 | ||
| 09:1410:11 | ||
| 10:1111:09 | ||
| 11:0912:07 | ||
| 12:0713:04 | ||
| 13:0414:02 | ||
| 14:0214:59 | ||
| 14:5915:57 | ||
| 15:5716:55 | ||
| 16:5517:52 |
रात के घंटे
12·1 घं 2 मि| 17:5218:55 | ||
| 18:5519:57 | ||
| 19:5721:00 | ||
| 21:0022:02 | ||
| 22:0223:04 | ||
| 23:0400:07 | ||
| 00:0701:09 | ||
| 01:0902:12 | ||
| 02:1203:14 | ||
| 03:1404:16 | ||
| 04:1605:19 | ||
| 05:1906:21 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 14 अक्टूबर 2026 की तिथि क्या है?
- 14 अक्टूबर 2026 की तिथि शुक्ल चतुर्थी है।
- 14 अक्टूबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 14 अक्टूबर 2026 का नक्षत्र अनुराधा और योग आयुष्मान् है।
- 14 अक्टूबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:21 पर तथा सूर्यास्त 17:52 पर होगा।
- 14 अक्टूबर 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 12:07–13:33 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।
आजबुधवार, 14 अक्टूबर 2026शुक्ल चतुर्थीअनुराधा
आगामी पर्व
दशहरा
20 अक्टूबर 20266 दिन मेंरावण पर श्रीराम की विजय का उत्सव — असत्य पर सत्य की जीत। अनेक नगरों में रावण के पुतले का दहन होता है; अन्य स्थानों पर यह नवरात्रि की पूर्णाहुति का दिन है।
करवा चौथ
29 अक्टूबर 202615 दिन मेंविवाहित स्त्रियाँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। छलनी से चंद्र दर्शन के बाद व्रत पूर्ण होता है।
आजबुधवार, 14 अक्टूबर 2026शुक्ल चतुर्थीअनुराधा
आगामी पर्व
धनतेरस
7 नवंबर 202624 दिन मेंदीपावली पर्व का प्रथम दिन। स्वर्ण, चाँदी या नए बर्तन ख़रीदना तथा आरोग्य देवता धन्वंतरि की पूजा शुभ मानी जाती है।
दीवाली
8 नवंबर 202625 दिन मेंप्रकाश पर्व, श्रीराम के अयोध्या लौटने तथा धन की देवी लक्ष्मी के पूजन का दिन। घरों में दीप जलाए जाते हैं, लक्ष्मी पूजन और मिठाइयों का आदान-प्रदान होता है।
गोवर्धन पूजा
10 नवंबर 202627 दिन मेंश्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने का स्मरण। भक्त अन्नकूट — विभिन्न व्यंजनों का पर्वत — कृष्ण को अर्पित करते हैं।
भाई दूज
11 नवंबर 202628 दिन मेंबहनें भाइयों के मस्तक पर तिलक लगाकर उनके मंगल की कामना करती हैं और भाई बहनों को उपहार देते हैं। दीपावली पर्व का समापन दिवस।
लाभ पंचम
14 नवंबर 202631 दिन मेंदीपावली के बाद का पाँचवाँ दिन, गुजराती व्यापार परंपरा में 'लाभ' का दिन — दुकानें पुनः खुलती हैं, नए बही-खातों का शुभारंभ होता है और व्यापार नववर्ष की पहली प्रविष्टियाँ करते हैं।
छठ पूजा
15 नवंबर 202632 दिन मेंसूर्य देव और छठी मैया को समर्पित चार दिवसीय पर्व। भक्त कठोर उपवास रखते हैं और नदी या तालाब के तट पर अस्तगामी एवं उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।
आजबुधवार, 14 अक्टूबर 2026शुक्ल चतुर्थीअनुराधा



