दैनिक पंचांग
आज · सोमवार, 13 जुलाई 2026
विक्रम संवत् 2083शक संवत् 1948
आज सोमवार है। चतुर्दशी तिथि 18:49 बजे तक, फिर अमावस्या 15:13 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र 05:41 बजे तक, उसके बाद आर्द्रा 02:51 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग ध्रुव 15:59 बजे तक, फिर व्याघात योग 11:56 (कल) बजे तक। विष्टि करण 08:40 बजे तक, उसके बाद शकुनि 18:49 बजे तक, फिर चतुष्पाद 05:00 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (07:15 से 08:59) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य मिथुन राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक ज्येष्ठ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण चतुर्दशी
बीते दिन22:30आज18:49
अमावस्या
आज18:49अगले दिन15:13
चतुर्दशी — तीव्र और परिवर्तनकारी तिथि। बड़े निर्णय सावधानी से लेने चाहिए।
सोमवार
सोमवार — चंद्र द्वारा शासित। शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
- अमान्तज्येष्ठपूर्णिमान्तआषाढ़
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा
बीते दिन08:28आज05:41
आर्द्रा
आज05:41अगले दिन02:51
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
ध्रुव
बीते दिन20:05आज15:59
व्याघात
आज15:59अगले दिन11:56
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
विष्टि
बीते दिन22:30आज08:40
शकुनि
आज08:40आज18:49
चतुष्पाद
आज18:49अगले दिन05:00
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
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कृष्ण चतुर्दशी · सोम
16:36:17
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:3207:15 | ||
| 07:1508:59 | ||
| 08:5910:43 | ||
| 10:4312:26 | ||
| 12:2614:10 | ||
| 14:1015:54 | ||
| 15:5417:37 | ||
| 17:3719:21 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:2120:37 | ||
| 20:3721:54 | ||
| 21:5423:10 | ||
| 23:1000:27 | ||
| 00:2701:43 | ||
| 01:4302:59 | ||
| 02:5904:16 | ||
| 04:1605:32 |
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:3207:15 | ||
| 07:1508:59 | ||
| 08:5910:43 | ||
| 10:4312:26 | ||
| 12:2614:10 | ||
| 14:1015:54 | ||
| 15:5417:37 | ||
| 17:3719:21 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:2120:37 | ||
| 20:3721:54 | ||
| 21:5423:10 | ||
| 23:1000:27 | ||
| 00:2701:43 | ||
| 01:4302:59 | ||
| 02:5904:16 | ||
| 04:1605:32 |
| 04:10→04:51 | ||
| 11:59→12:54 | ||
| 21:54→23:19 | ||
| 07:15→08:59 | ||
| 10:43→12:26 | ||
| 14:10→15:54 | ||
| 13:25→14:50 |
दिन के घंटे
12·1 घं 9 मि| 05:3206:41 | ||
| 06:4107:50 | ||
| 07:5008:59 | ||
| 08:5910:08 | ||
| 10:0811:17 | ||
| 11:1712:26 | ||
| 12:2613:35 | ||
| 13:3514:45 | ||
| 14:4515:54 | ||
| 15:5417:03 | ||
| 17:0318:12 | ||
| 18:1219:21 |
रात के घंटे
12·51 मि| 19:2120:12 | ||
| 20:1221:03 | ||
| 21:0321:54 | ||
| 21:5422:45 | ||
| 22:4523:36 | ||
| 23:3600:27 | ||
| 00:2701:18 | ||
| 01:1802:08 | ||
| 02:0802:59 | ||
| 02:5903:50 | ||
| 03:5004:41 | ||
| 04:4105:32 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 13 जुलाई 2026 की तिथि क्या है?
- 13 जुलाई 2026 की तिथि कृष्ण चतुर्दशी है।
- 13 जुलाई 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 13 जुलाई 2026 का नक्षत्र मृगशिरा और योग ध्रुव है।
- 13 जुलाई 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:32 पर तथा सूर्यास्त 19:21 पर होगा।
- 13 जुलाई 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 07:15–08:59 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।
आजसोमवार, 13 जुलाई 2026कृष्ण चतुर्दशीमृगशिरा
आजसोमवार, 13 जुलाई 2026कृष्ण चतुर्दशीमृगशिरा
आगामी पर्व
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3 सितंबर 202652 दिन मेंभगवान श्रीकृष्ण के अर्धरात्रि जन्म का उत्सव। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं, झूले सजाते हैं, भजन-कीर्तन करते हैं और मध्यरात्रि की आरती के बाद व्रत खोलते हैं।
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14 सितंबर 20262 महीने मेंविघ्नहर्ता गणेश के जन्म का उत्सव। घरों और सार्वजनिक पंडालों में मिट्टी की प्रतिमाएँ स्थापित कर एक से दस दिनों तक पूजा की जाती है, और अंत में जल में विसर्जन किया जाता है।

