गुरुवार, 6 अगस्त 2026
दैनिक पंचांग
आज गुरुवार है। अष्टमी तिथि 18:53 बजे तक, फिर नवमी 16:37 (कल) बजे तक रहेगी। भरणी नक्षत्र 20:13 बजे तक, उसके बाद कृत्तिका 18:42 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग गण्ड 14:59 बजे तक, फिर वृद्धि योग 12:09 (कल) बजे तक। बालव करण 07:51 बजे तक, उसके बाद कौलव 18:53 बजे तक, फिर तैतिल 05:48 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (14:07 से 15:47) के दौरान टालें। चन्द्रमा मेष राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आषाढ़
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण अष्टमी
पिछले दिन20:42उसी दिन18:53
कृष्ण नवमी
उसी दिन18:53अगले दिन16:37
अष्टमी — तीव्र ऊर्जा वाली तिथि। नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरा में टाली जाती है।
गुरुवार
गुरुवार — गुरु (बृहस्पति) द्वारा शासित। सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।
- अमान्तआषाढ़पूर्णिमान्तश्रावण
नक्षत्र · योग · करण
भरणी
पिछले दिन21:17उसी दिन20:13
कृत्तिका
उसी दिन20:13अगले दिन18:42
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
गण्ड
पिछले दिन17:27उसी दिन14:59
वृद्धि
उसी दिन14:59अगले दिन12:09
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
बालव
पिछले दिन20:42उसी दिन07:51
कौलव
उसी दिन07:51उसी दिन18:53
तैतिल
उसी दिन18:53अगले दिन05:48
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण अष्टमी · गुरु
6 अग॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:4507:25 | ||
| 07:2509:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:07 | ||
| 14:0715:47 | ||
| 15:4717:28 | ||
| 17:2819:08 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 19:0820:28 | ||
| 20:2821:47 | ||
| 21:4723:07 | ||
| 23:0700:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:06 | ||
| 03:0604:26 | ||
| 04:2605:45 |
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:4507:25 | ||
| 07:2509:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:07 | ||
| 14:0715:47 | ||
| 15:4717:28 | ||
| 17:2819:08 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 19:0820:28 | ||
| 20:2821:47 | ||
| 21:4723:07 | ||
| 23:0700:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:06 | ||
| 03:0604:26 | ||
| 04:2605:45 |
| 04:20→05:02 | ||
| 12:00→12:53 | ||
| 15:38→17:09 | ||
| 14:07→15:47 | ||
| 05:45→07:25 | ||
| 09:06→10:46 | ||
| 06:27→07:59 |
दिन के घंटे
12·1 घं 7 मि| 05:4506:52 | ||
| 06:5207:59 | ||
| 07:5909:06 | ||
| 09:0610:13 | ||
| 10:1311:19 | ||
| 11:1912:26 | ||
| 12:2613:33 | ||
| 13:3314:40 | ||
| 14:4015:47 | ||
| 15:4716:54 | ||
| 16:5418:01 | ||
| 18:0119:08 |
रात के घंटे
12·53 मि| 19:0820:01 | ||
| 20:0120:54 | ||
| 20:5421:47 | ||
| 21:4722:40 | ||
| 22:4023:34 | ||
| 23:3400:27 | ||
| 00:2701:20 | ||
| 01:2002:13 | ||
| 02:1303:06 | ||
| 03:0603:59 | ||
| 03:5904:52 | ||
| 04:5205:45 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 6 अगस्त 2026 की तिथि क्या है?
- 6 अगस्त 2026 की तिथि कृष्ण अष्टमी है।
- 6 अगस्त 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 6 अगस्त 2026 का नक्षत्र भरणी और योग गण्ड है।
- 6 अगस्त 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:45 पर तथा सूर्यास्त 19:08 पर होगा।
- 6 अगस्त 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 14:07–15:47 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

