नाग पंचमी
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
नाग देवताओं की पूजा का दिन। भक्त नाग प्रतिमाओं और बाँबियों पर दूध अर्पित कर रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
दैनिक पंचांग
आज शुक्रवार है, शुक्ल पक्ष चल रहा है। आज नाग पंचमी है। पंचमी तिथि कल तड़के तक है, फिर षष्ठी शुरू होगी। चन्द्रमा उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में सुबह तक है, फिर हस्त में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 12:00 से 12:53 बजे तक, और राहु काल में न करें, 10:46 से 12:26 बजे तक। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।
जिस दिन सूर्योदय के समय यह तिथि हो, उसी दिन पर्व — पूरे दिन मनाया जाता है।
नाग देवताओं की पूजा का दिन। भक्त नाग प्रतिमाओं और बाँबियों पर दूध अर्पित कर रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
अधिक श्रावण
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
शुक्ल पंचमी
उसी दिन 02:27 अगले दिन 00:23 तक
पंचमी — शांति और सामंजस्य की तिथि। अध्ययन, संगीत और कला के लिए शुभ।
शुक्रवार
शुक्रवार — शुक्र द्वारा शासित। सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
उत्तर फाल्गुनी
पिछले दिन 09:18 उसी दिन 07:32 तक
हस्त
उसी दिन 07:32 अगले दिन 06:24
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
सिद्ध
उसी दिन 03:33 अगले दिन 00:50 तक
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
बव
उसी दिन 02:27 उसी दिन 13:20 तक
बालव
उसी दिन 13:20 अगले दिन 00:23
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल पंचमी · शुक्र
6 अग॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:4507:25 | ||
| 07:2509:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:07 | ||
| 14:0715:47 | ||
| 15:4717:28 | ||
| 17:2819:08 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 19:0820:28 | ||
| 20:2821:47 | ||
| 21:4723:07 | ||
| 23:0700:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:06 | ||
| 03:0604:26 | ||
| 04:2605:45 |
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:4507:25 | ||
| 07:2509:06 | ||
| 09:0610:46 | ||
| 10:4612:26 | ||
| 12:2614:07 | ||
| 14:0715:47 | ||
| 15:4717:28 | ||
| 17:2819:08 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 19:0820:28 | ||
| 20:2821:47 | ||
| 21:4723:07 | ||
| 23:0700:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:06 | ||
| 03:0604:26 | ||
| 04:2605:45 |
| 04:20→05:02 | ||
| 12:00→12:53 | ||
| 00:52→02:21 | ||
| 10:46→12:26 | ||
| 15:47→17:28 | ||
| 07:25→09:06 | ||
| 15:58→17:27 |
दिन के घंटे
12·1 घं 7 मि| 05:4506:52 | ||
| 06:5207:59 | ||
| 07:5909:06 | ||
| 09:0610:13 | ||
| 10:1311:19 | ||
| 11:1912:26 | ||
| 12:2613:33 | ||
| 13:3314:40 | ||
| 14:4015:47 | ||
| 15:4716:54 | ||
| 16:5418:01 | ||
| 18:0119:08 |
रात के घंटे
12·53 मि| 19:0820:01 | ||
| 20:0120:54 | ||
| 20:5421:47 | ||
| 21:4722:41 | ||
| 22:4123:34 | ||
| 23:3400:27 | ||
| 00:2701:20 | ||
| 01:2002:13 | ||
| 02:1303:06 | ||
| 03:0603:59 | ||
| 03:5904:52 | ||
| 04:5205:45 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·