- रजिस्ट्री के लिए कौन सा वार सर्वोत्तम है?
- गुरुवार व शुक्रवार — बृहस्पति व शुक्र के दिन। मुख्यधारा की संपत्ति-सूचियाँ खरीद हेतु अन्य हर वार निषिद्ध मानती हैं, और 'शनि का दिन भूमि को भाता है' वाली लोक-धारणा को समर्थन नहीं — अतः यहाँ केवल गुरुवार-शुक्रवार की तिथियाँ दिखती हैं।
- इस पृष्ठ पर रोहिणी या पुष्य क्यों नहीं दिखते?
- वे अलग नियमों के तारे हैं। स्थिर तारे (रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा) निर्माण व नींव — गृहारंभ — के हैं, और पुष्य सोने जैसी चल वस्तुओं की खरीद का अग्रणी है। अचल संपत्ति की खरीद परंपरा के तिर्यङ्मुख 'क्रय' तारों व अधोमुख 'भूमि' तारों से होती है — वही समूह यहाँ सूचीबद्ध है।
- क्या पंचक में रजिस्ट्री हो सकती है?
- हाँ — पंचक दोष निर्माण-कार्य को वर्जित करता है, कागज़ात को नहीं। खरीद या रजिस्ट्री लेन-देन है, अतः पट्टी के तारों वाले दिन अन्य कारक शुभ होने पर सूचीबद्ध रहते हैं।
- अन्य पंचांग-सूचियों की कुछ तिथियाँ यहाँ क्यों नहीं दिखतीं?
- क्योंकि वे रिक्ता तिथि, अमावस्या या व्यतीपात जैसे अशुभ योग पर पड़ती हैं — जिन्हें हर शास्त्रीय परंपरा शुभ कार्य हेतु वर्जित मानती है। कच्ची सूचियाँ केवल वार व नक्षत्र से तिथि चुनती हैं; यह कैलेंडर उन सार्वभौमिक वर्जनाओं को भी लागू करता है और प्रत्येक समय को भद्रा, राहु काल व अन्य दैनिक दोषों से छाँटता है।
- एक महीने में तिथियाँ लगभग क्यों नहीं दिखतीं?
- वह अधिक मास है — अधिमास/मलमास — संपत्ति परंपरा का एकमात्र सर्वसम्मत विराम। संस्कारों के विपरीत खरीद व रजिस्ट्री चातुर्मास और खरमास में भी चलती हैं।
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।