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संपत्ति खरीद मुहूर्त 2027

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2027

4 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
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30
31
सर्वोत्तम दिनशुभ

शुक्रवार, 15 जनवरी 2027

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त07:1508:33
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त1 घं 19 मि
शुभ मुहूर्त09:5211:11
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 19 मि
शुभ मुहूर्त13:1314:13
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं
नक्षत्र
रेवती
तिथि
शुक्ल सप्तमी
योग
शिव
करण
वणिज

यह दिन क्यों शुभ

  • रेवती — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल सप्तमी — अनुकूल तिथि
  • अमृत सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता
  • सर्वार्थ सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल

वर्जित समय

  • राहु काल11:11–12:30
  • यमगण्ड15:08–16:27
  • गुलिक काल08:33–09:52
  • वर्ज्यम्11:35–13:13
पूरा पंचांग देखें

48 शुभ दिन

2027 में सर्वाधिक शुभ संपत्ति खरीद तिथियाँ।

जनवरी2027

4 शुभ दिन
  1. 7
  2. 8
  3. 14

    गुरुवार, 14 जनवरी 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त11:11 – 13:4815:07 – 07:15
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल षष्ठीपूरा पंचांग देखें
  4. 15

    शुक्रवार, 15 जनवरी 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:15 – 08:3309:52 – 11:1113:13 – 14:13
    रेवतीशुक्ल सप्तमीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

फ़रवरी2027

4 शुभ दिन
  1. 4

    गुरुवार, 4 फ़रवरी 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:29 – 09:5111:13 – 13:57
    पूर्व आषाढ़ाकृष्ण त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  2. 11

    गुरुवार, 11 फ़रवरी 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:26 – 09:4911:12 – 13:5815:21 – 17:1918:58 – 05:42
    रेवतीशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 18

    गुरुवार, 18 फ़रवरी 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:21 – 09:4611:44 – 13:5915:24 – 21:06
    पुनर्वसुशुक्ल द्वादशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  4. 26

मार्च2027

4 शुभ दिन
  1. 11

    गुरुवार, 11 मार्च 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:04 – 09:3311:02 – 11:20
    रेवतीशुक्ल तृतीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 18

    गुरुवार, 18 मार्च 2027

    शुभ
    शुभ मुहूर्त03:21 – 06:28
    आश्लेषाशुक्ल द्वादशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  3. 19

    शुक्रवार, 19 मार्च 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:26 – 07:5709:28 – 10:5812:29 – 15:1117:01 – 06:26
    आश्लेषाशुक्ल द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  4. 26

अप्रैल2027

3 शुभ दिन
  1. 7

    बुधवार, 7 अप्रैल 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:05 – 06:2509:14 – 10:4813:58 – 18:42
    रेवतीशुक्ल · 1गुड़ी पड़वापूरा पंचांग देखें
  2. 22

    गुरुवार, 22 अप्रैल 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:26 – 09:0412:11 – 13:57
    विशाखाकृष्ण द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  3. 23

    शुक्रवार, 23 अप्रैल 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त14:14 – 15:35
    अनुराधाकृष्ण तृतीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

मई2027

5 शुभ दिन
  1. 8

    शनिवार, 8 मई 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:15 – 08:5610:37 – 13:5815:58 – 19:00
    रोहिणीशुक्ल · 3अक्षय तृतीयापूरा पंचांग देखें
  2. 13
  3. 14
  4. 20
  5. 21

    शुक्रवार, 21 मई 2027

    शुभ
    शुभ मुहूर्त05:27 – 07:1008:52 – 10:3512:17 – 14:51
    अनुराधाकृष्ण प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

जून2027

2 शुभ दिन
  1. 10
  2. 25

जुलाई2027

5 शुभ दिन
  1. 8
  2. 16

    शुक्रवार, 16 जुलाई 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:40 – 07:1609:00 – 10:4312:27 – 15:53
    मूलशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  3. 23

    शुक्रवार, 23 जुलाई 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:02 – 10:4412:27 – 15:5217:35 – 20:04
    पूर्व भाद्रपदाकृष्ण पंचमीपूरा पंचांग देखें
  4. 29
  5. 30

    शुक्रवार, 30 जुलाई 2027

    शुभ
    शुभ मुहूर्त05:41 – 07:2210:03 – 10:4512:27 – 15:5017:32 – 01:24
    मृगशिराकृष्ण द्वादशीपूरा पंचांग देखें

अगस्त2027

5 शुभ दिन
  1. 12
  2. 13

    शुक्रवार, 13 अगस्त 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:49 – 07:2809:07 – 10:4614:20 – 15:4417:23 – 05:49
    मूलशुक्ल द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  3. 19

    गुरुवार, 19 अगस्त 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:30 – 09:0810:46 – 12:1815:40 – 05:52
    पूर्व भाद्रपदाकृष्ण द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  4. 20

    शुक्रवार, 20 अगस्त 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:52 – 06:08
    पूर्व भाद्रपदाकृष्ण तृतीयापूरा पंचांग देखें
  5. 26

सितंबर2027

4 शुभ दिन
  1. 9
  2. 10

    शुक्रवार, 10 सितंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:03 – 07:3709:28 – 10:4412:18 – 15:2516:59 – 23:51
    पूर्व आषाढ़ाशुक्ल दशमीपूरा पंचांग देखें
  3. 17

    शुक्रवार, 17 सितंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:28 – 10:4312:15 – 15:1916:52 – 06:06
    उत्तर भाद्रपदाकृष्ण द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  4. 24

अक्टूबर2027

4 शुभ दिन
  1. 9

    शनिवार, 9 अक्टूबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:45 – 09:1310:40 – 13:3515:03 – 17:58
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल · 10दशहरापूरा पंचांग देखें
  2. 15

    शुक्रवार, 15 अक्टूबर 2027

    शुभ
    शुभ मुहूर्त19:16 – 23:30
    रेवतीकृष्ण प्रतिपदाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 21
  4. 22

    शुक्रवार, 22 अक्टूबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:25 – 07:5012:05 – 14:5516:20 – 20:25
    पुनर्वसुकृष्ण सप्तमीपूरा पंचांग देखें

नवंबर2027

4 शुभ दिन
  1. 4
  2. 11

    गुरुवार, 11 नवंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:01 – 09:2210:43 – 13:2614:47 – 06:40
    रेवतीशुक्ल द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  3. 12

    शुक्रवार, 12 नवंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:40 – 07:56
    रेवतीशुक्ल त्रयोदशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  4. 18

    गुरुवार, 18 नवंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:05 – 09:2510:45 – 13:2616:05 – 01:52
    पुनर्वसुकृष्ण पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

दिसंबर2027

4 शुभ दिन
  1. 9

    गुरुवार, 9 दिसंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:19 – 09:3710:55 – 13:3114:48 – 15:15
    रेवतीशुक्ल एकादशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 17
  3. 23
  4. 24

    शुक्रवार, 24 दिसंबर 2027

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:39 – 08:2809:45 – 11:0312:20 – 14:5516:12 – 07:10
    विशाखाकृष्ण द्वादशीपूरा पंचांग देखें

संपत्ति खरीद मुहूर्त के बारे में

संपत्ति मुहूर्त भूमि, मकान या फ्लैट की खरीद अथवा रजिस्ट्री का समय तय करता है। यह अपना अलग प्रसंग है — भूमि पूजन (शिलान्यास) और गृह प्रवेश (पहला प्रवेश) के अपने-अपने पृष्ठ हैं — और परंपरा इसे वार-प्रधान मानती है: बृहस्पति का गुरुवार और शुक्र का शुक्रवार ही संपत्ति के दिन हैं, उन नक्षत्र-समूहों पर जो मुहूर्त ग्रंथ क्रय (तिर्यङ्मुख तारे) और भूमि (अधोमुख तारे) को सौंपते हैं। कागज़ात निर्माण नहीं हैं, अतः पंचक इसमें बाधक नहीं; कैलेंडर केवल अधिक मास में रुकता है, और प्रत्येक समय उन दोषों से भी छाँटा गया है जिन्हें कच्ची सूचियाँ अनदेखा करती हैं।

संपत्ति खरीद मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • बारह नक्षत्र मान्य हैं — मुहूर्त परंपरा के तिर्यङ्मुख 'क्रय' तारे (मृगशिरा, पुनर्वसु, अनुराधा, रेवती) और अधोमुख 'भूमि' तारे (आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, विशाखा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, पूर्वा भाद्रपद), साथ में उत्तरा भाद्रपद — वही समूह जो मुख्यधारा की संपत्ति-सूचियाँ लेती हैं। स्थिर 'निर्माण' तारे (रोहिणी, शेष उत्तरा-तारे) गृह-निर्माण के नियमों के हैं, खरीद के नहीं।
  • केवल गुरुवार (बृहस्पति) व शुक्रवार (शुक्र) — मुख्यधारा की सूचियों में संपत्ति खरीद हेतु अन्य हर वार निषिद्ध है; 'शनि का दिन भूमि को भाता है' वाली लोक-धारणा को समर्थन नहीं।
  • रिक्ता तिथियों (4, 9, 14) व अमावस्या को छोड़ हर तिथि मान्य है; शास्त्रीय शुभ तिथियाँ — द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी — 'सर्वाधिक शुभ' स्तर पाती हैं, शेष 'शुभ'।
  • केवल अधिक मास में कैलेंडर रुकता है। खरीद व रजिस्ट्री चातुर्मास और खरमास में भी चलती हैं — वे संस्कारों को रोकते हैं, लेन-देन को नहीं — पंचक निर्माण को वर्जित करता है, कागज़ात को नहीं (अतः उसकी पट्टी के तारे सम्मिलित हैं), और गुरु/शुक्र अस्त गृह-प्रवेश को रोकता है, रजिस्ट्री को नहीं।
  • समय पूरे दिन-रात के विस्तार में खोजे जाते हैं — संध्या के नक्षत्र-खंड सहित — और भद्रा, अशुभ योगों, राहु काल व अन्य दैनिक दोषों से छाँटे जाते हैं, जिन्हें कच्ची सूचियाँ बिना काटे दिखाती हैं।
  • साढ़े तीन मुहूर्त के दिन — गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया व विजयादशमी — गुरुवार/शुक्रवार नियम से चूकने पर भी पर्व के अपने प्रमाण से सूचीबद्ध होते हैं: पंचांग परंपरा इन्हें संपत्ति हेतु स्वयंसिद्ध मानती है, और धर्मसिंधु विजयादशमी के कार्यों को 'मुहूर्त की अपेक्षा बिना' शुभ बताती है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रजिस्ट्री के लिए कौन सा वार सर्वोत्तम है?
गुरुवार व शुक्रवार — बृहस्पति व शुक्र के दिन। मुख्यधारा की संपत्ति-सूचियाँ खरीद हेतु अन्य हर वार निषिद्ध मानती हैं, और 'शनि का दिन भूमि को भाता है' वाली लोक-धारणा को समर्थन नहीं — अतः यहाँ केवल गुरुवार-शुक्रवार की तिथियाँ दिखती हैं।
इस पृष्ठ पर रोहिणी या पुष्य क्यों नहीं दिखते?
वे अलग नियमों के तारे हैं। स्थिर तारे (रोहिणी, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा) निर्माण व नींव — गृहारंभ — के हैं, और पुष्य सोने जैसी चल वस्तुओं की खरीद का अग्रणी है। अचल संपत्ति की खरीद परंपरा के तिर्यङ्मुख 'क्रय' तारों व अधोमुख 'भूमि' तारों से होती है — वही समूह यहाँ सूचीबद्ध है।
क्या पंचक में रजिस्ट्री हो सकती है?
हाँ — पंचक दोष निर्माण-कार्य को वर्जित करता है, कागज़ात को नहीं। खरीद या रजिस्ट्री लेन-देन है, अतः पट्टी के तारों वाले दिन अन्य कारक शुभ होने पर सूचीबद्ध रहते हैं।
अन्य पंचांग-सूचियों की कुछ तिथियाँ यहाँ क्यों नहीं दिखतीं?
क्योंकि वे रिक्ता तिथि, अमावस्या या व्यतीपात जैसे अशुभ योग पर पड़ती हैं — जिन्हें हर शास्त्रीय परंपरा शुभ कार्य हेतु वर्जित मानती है। कच्ची सूचियाँ केवल वार व नक्षत्र से तिथि चुनती हैं; यह कैलेंडर उन सार्वभौमिक वर्जनाओं को भी लागू करता है और प्रत्येक समय को भद्रा, राहु काल व अन्य दैनिक दोषों से छाँटता है।
एक महीने में तिथियाँ लगभग क्यों नहीं दिखतीं?
वह अधिक मास है — अधिमास/मलमास — संपत्ति परंपरा का एकमात्र सर्वसम्मत विराम। संस्कारों के विपरीत खरीद व रजिस्ट्री चातुर्मास और खरमास में भी चलती हैं।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।