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नामकरण मुहूर्त 2026

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जून 2026

2 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
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28
29
30
सर्वोत्तम दिनशुभ

बुधवार, 24 जून 2026

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त14:0819:22
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त5 घं 14 मि
शुभ मुहूर्त05:2407:09
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 45 मि
शुभ मुहूर्त08:5410:38
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 45 मि
नक्षत्र
चित्रा
तिथि
शुक्ल दशमी
योग
परिघ
करण
गर

यह दिन क्यों शुभ

  • चित्रा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • स्वाति — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल दशमी — अनुकूल तिथि

वर्जित समय

  • राहु काल12:23–14:08
  • यमगण्ड07:09–08:54
  • गुलिक काल10:38–12:23
  • वर्ज्यम्20:35–22:19
दिन का चौघड़िया देखें

37 शुभ दिन

2026 में सर्वाधिक शुभ नामकरण तिथियाँ।

जनवरी2026

4 शुभ दिन
  1. 1
  2. 19

    सोमवार, 19 जनवरी 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3309:53 – 11:1212:31 – 13:5115:10 – 17:49
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल प्रतिपदादिन का चौघड़िया देखें
  3. 23
  4. 28

    बुधवार, 28 जनवरी 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:52 – 11:1313:54 – 17:57
    रोहिणीशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

फ़रवरी2026

4 शुभ दिन
  1. 18
  2. 20
  3. 26
  4. 27

मार्च2026

2 शुभ दिन
  1. 20

    शुक्रवार, 20 मार्च 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:25 – 07:5609:27 – 10:5812:28 – 15:1517:01 – 18:32
    रेवतीशुक्ल द्वितीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 25

    बुधवार, 25 मार्च 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:19 – 07:5109:23 – 10:55
    मृगशिराशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

अप्रैल2026

4 शुभ दिन
  1. 2
  2. 20
  3. 23

    गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:25 – 09:0311:05 – 13:5715:35 – 18:51
    पुनर्वसुशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  4. 29

    बुधवार, 29 अप्रैल 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:42 – 07:2109:17 – 10:3913:57 – 18:55
    हस्तशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

मई2026

4 शुभ दिन
  1. 18

    सोमवार, 18 मई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:55 – 07:1108:53 – 10:3512:17 – 13:5915:42 – 19:06
    रोहिणीशुक्ल द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 25
  3. 28
  4. 29

जून2026

2 शुभ दिन
  1. 17
  2. 24

जुलाई2026

3 शुभ दिन
  1. 15
  2. 20
  3. 24

    शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:38 – 06:1109:02 – 10:4512:27 – 15:5217:34 – 19:17
    अनुराधाशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

अगस्त2026

4 शुभ दिन
  1. 17
  2. 19
  3. 26
  4. 28

सितंबर2026

4 शुभ दिन
  1. 14
  2. 17

    गुरुवार, 17 सितंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:48 – 13:4715:19 – 18:24
    अनुराधाशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  3. 21
  4. 24

अक्टूबर2026

2 शुभ दिन
  1. 12
  2. 26

नवंबर2026

2 शुभ दिन
  1. 16

    सोमवार, 16 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:15 – 08:0409:25 – 10:4512:05 – 13:2614:46 – 17:27
    श्रवणशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 20

    शुक्रवार, 20 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:56 – 08:0709:27 – 10:4612:06 – 14:4616:05 – 17:25
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल दशमीदिन का चौघड़िया देखें

दिसंबर2026

2 शुभ दिन
  1. 14

    सोमवार, 14 दिसंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:05 – 08:2209:40 – 10:5812:15 – 13:3314:50 – 17:25
    श्रवणशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 16

नामकरण मुहूर्त के बारे में

नामकरण शिशु के नाम का संस्कार है, जो शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है, जब नक्षत्र-अक्षर से चुना नाम विधिवत दिया जाता है। यह सोलह 'सौम्य' नक्षत्रों के पूर्ण समूह पर, शुक्ल पक्ष में होता है, और इस पर कोई ऋतु-विराम नहीं — अतः वर्ष की हर जन्मतिथि के निकट उपयुक्त दिन मिल जाता है।

नामकरण मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • नामकरण सोलह 'सौम्य' नक्षत्रों के पूर्ण समूह — अश्विनी से रेवती तक के लघु, मृदु, चर व ध्रुव गण — पर होता है। बाल संस्कारों पर पंचक लागू नहीं, अतः पट्टी के शुभ नक्षत्र सम्मिलित रहते हैं।
  • यह शुक्ल पक्ष में, शुभ तिथियों — प्रतिपदा सहित; द्वादशी शास्त्रीय नामकरण-नियम से वर्जित — पर, सौम्य वारों (सोम, बुध, गुरु, शुक्र) में, दिन के समय किया जाता है।
  • शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है, और इस पर कोई ऋतु-विराम नहीं — खरमास व चातुर्मास नामकरण नहीं रोकते — अतः हर जन्मतिथि के निकट उपयुक्त दिन मिलता है।
  • मानक फ़िल्टर लागू हैं: रिक्ता तिथि, अमावस्या, भद्रा व अशुभ योग हटा दिए जाते हैं, और प्रत्येक समय राहु काल व अन्य दैनिक दोषों से मुक्त है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नामकरण कब करना चाहिए?
शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन; संभव न हो तो आगे की निकटतम शुभ तिथि ली जाती है। यहाँ वर्ष के वे सभी दिन दिए हैं जिनका पंचांग नामकरण के योग्य है, ताकि शिशु की जन्मतिथि के निकटतम दिन चुना जा सके।
यदि जन्म का 11वाँ दिन सूची में न हो तो?
उसके बाद की निकटतम सूचीबद्ध तिथि लें। कोई दिन तभी छूटता है जब उसके पंचांग में दोष हो — रिक्ता तिथि, भद्रा, अशुभ योग या अनुपयुक्त नक्षत्र — और ऐसे दिन नामकरण परंपरागत रूप से आगे बढ़ा दिया जाता है।
नामकरण शुक्ल पक्ष में ही क्यों?
बढ़ता चंद्रमा वृद्धि का प्रतीक है — शिशु के पहले सोपान के अनुरूप। इसलिए नामकरण केवल बढ़ते पखवाड़े में, अमावस्या से पूर्णिमा के बीच, सूचीबद्ध है।
क्या पंचक नामकरण में बाधक है?
नहीं — पंचक दोष निर्माण, ईंधन-संग्रह, शय्या व दक्षिण यात्रा पर लागू होता है, बाल संस्कारों पर नहीं; अतः धनिष्ठा से रेवती तक के दिन अन्य कारक शुभ होने पर रखे गए हैं।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।