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नामकरण मुहूर्त 2025

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2025

5 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
3
4
5
7
9
10
11
12
13
14
15
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28
29
30
सर्वोत्तम दिनशुभ

गुरुवार, 2 जनवरी 2025

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त11:0713:43
अभिजित — मध्याह्न का 'विजय' काल सम्मिलित2 घं 36 मि
शुभ मुहूर्त08:3109:49
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 18 मि
शुभ मुहूर्त15:0017:36
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त2 घं 36 मि
नक्षत्र
श्रवण
तिथि
शुक्ल तृतीया
योग
हर्षण
करण
तैतिल

यह दिन क्यों शुभ

  • श्रवण — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल तृतीया — अनुकूल तिथि
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल

वर्जित समय

  • राहु काल13:43–15:00
  • यमगण्ड07:14–08:31
  • गुलिक काल09:49–11:07
  • वर्ज्यम्03:41–05:14
पूरा पंचांग देखें

46 शुभ दिन

2025 में सर्वाधिक शुभ नामकरण तिथियाँ।

जनवरी2025

5 शुभ दिन
  1. 1

    बुधवार, 1 जनवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:13 – 07:5809:49 – 11:0713:42 – 17:35
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  2. 2

    गुरुवार, 2 जनवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:31 – 09:4911:07 – 13:4315:00 – 17:36
    श्रवणशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें
  3. 6

    सोमवार, 6 जनवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3209:50 – 11:0912:27 – 13:4515:03 – 17:39
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल सप्तमीपूरा पंचांग देखें
  4. 8
  5. 31

    शुक्रवार, 31 जनवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:09 – 08:3109:52 – 11:1314:04 – 15:1716:38 – 17:59
    शतभिषाशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें

फ़रवरी2025

3 शुभ दिन
  1. 7

    शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:05 – 08:2809:50 – 10:5712:35 – 15:20
    रोहिणीशुक्ल दशमीपूरा पंचांग देखें
  2. 10

    सोमवार, 10 फ़रवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:34 – 08:2609:49 – 11:1212:35 – 13:5815:21 – 18:07
    पुनर्वसुशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  3. 28

    शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:47 – 08:1309:40 – 11:0712:33 – 13:41
    शतभिषाशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें

मार्च2025

2 शुभ दिन
  1. 3
  2. 6

अप्रैल2025

4 शुभ दिन
  1. 2

    बुधवार, 2 अप्रैल 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:17 – 10:5113:58 – 18:39
    रोहिणीशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 7

    सोमवार, 7 अप्रैल 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:04 – 06:25
    पुष्यशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 10

    गुरुवार, 10 अप्रैल 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त12:25 – 13:5815:33 – 18:44
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  4. 30

    बुधवार, 30 अप्रैल 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:41 – 07:20
    रोहिणीशुक्ल तृतीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

मई2025

4 शुभ दिन
  1. 1
  2. 7
  3. 9
  4. 28

    बुधवार, 28 मई 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:24 – 07:0809:21 – 10:3514:02 – 19:10
    मृगशिराशुक्ल द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

जून2025

4 शुभ दिन
  1. 5
  2. 6
  3. 26

    गुरुवार, 26 जून 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:39 – 14:0815:53 – 19:22
    पुनर्वसुशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें
  4. 27

    शुक्रवार, 27 जून 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:25 – 07:1008:54 – 10:3912:24 – 15:5317:38 – 19:22
    पुनर्वसुशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें

जुलाई2025

4 शुभ दिन
  1. 2

    बुधवार, 2 जुलाई 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:27 – 07:1108:56 – 10:40
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल सप्तमीपूरा पंचांग देखें
  2. 4
  3. 25

    शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:38 – 07:2009:03 – 10:4512:27 – 15:51
    पुष्यशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें
  4. 31

    गुरुवार, 31 जुलाई 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:37 – 09:0410:46 – 14:0815:50 – 19:12
    चित्राशुक्ल सप्तमीपूरा पंचांग देखें

अगस्त2025

4 शुभ दिन
  1. 4

    सोमवार, 4 अगस्त 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:44 – 07:25
    अनुराधाशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 25

    सोमवार, 25 अगस्त 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:55 – 07:3209:09 – 09:4912:23 – 13:5915:36 – 18:50
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  3. 27

    बुधवार, 27 अगस्त 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त15:44 – 18:48
    चित्राशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  4. 28

    गुरुवार, 28 अगस्त 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:33 – 09:0910:45 – 13:5815:34 – 17:57
    चित्राशुक्ल पंचमीपूरा पंचांग देखें

सितंबर2025

3 शुभ दिन
  1. 5

    शुक्रवार, 5 सितंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:01 – 07:3509:10 – 10:4512:19 – 13:54
    श्रवणशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  2. 22

    सोमवार, 22 सितंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:09 – 07:4009:11 – 10:4212:13 – 13:4415:15 – 18:17
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें
  3. 24

    बुधवार, 24 सितंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:10 – 07:4109:11 – 10:4213:43 – 18:15
    चित्राशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें

अक्टूबर2025

6 शुभ दिन
  1. 2

    गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:43 – 09:1210:41 – 13:3915:08 – 18:05
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल दशमीपूरा पंचांग देखें
  2. 3
  3. 22

    बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:03 – 07:5109:15 – 10:4013:30 – 17:44
    स्वातिशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें
  4. 24

    शुक्रवार, 24 अक्टूबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:27 – 07:5212:05 – 14:5316:18 – 17:42
    अनुराधाशुक्ल तृतीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  5. 29
  6. 31

    शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:04 – 10:4112:04 – 14:5016:13 – 17:36
    धनिष्ठाशुक्ल दशमीपूरा पंचांग देखें

नवंबर2025

3 शुभ दिन
  1. 3

    सोमवार, 3 नवंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:34 – 07:5709:19 – 10:4212:04 – 13:2714:49 – 17:34
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  2. 21

    शुक्रवार, 21 नवंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त12:06 – 13:56
    अनुराधाशुक्ल प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 27

    गुरुवार, 27 नवंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:12 – 09:3010:49 – 13:2714:46 – 17:24
    धनिष्ठाशुक्ल सप्तमीपूरा पंचांग देखें

दिसंबर2025

4 शुभ दिन
  1. 22

    सोमवार, 22 दिसंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:10 – 08:2709:44 – 11:0214:54 – 17:29
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  2. 24
  3. 25
  4. 29

    सोमवार, 29 दिसंबर 2025

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:12 – 11:0512:23 – 13:4014:58 – 17:33
    अश्विनीशुक्ल दशमीपूरा पंचांग देखें

नामकरण मुहूर्त के बारे में

नामकरण शिशु के नाम का संस्कार है, जो शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है, जब नक्षत्र-अक्षर से चुना नाम विधिवत दिया जाता है। यह सोलह 'सौम्य' नक्षत्रों के पूर्ण समूह पर, शुक्ल पक्ष में होता है, और इस पर कोई ऋतु-विराम नहीं — अतः वर्ष की हर जन्मतिथि के निकट उपयुक्त दिन मिल जाता है।

नामकरण मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • नामकरण सोलह 'सौम्य' नक्षत्रों के पूर्ण समूह — अश्विनी से रेवती तक के लघु, मृदु, चर व ध्रुव गण — पर होता है। बाल संस्कारों पर पंचक लागू नहीं, अतः पट्टी के शुभ नक्षत्र सम्मिलित रहते हैं।
  • यह शुक्ल पक्ष में, शुभ तिथियों — प्रतिपदा सहित; द्वादशी शास्त्रीय नामकरण-नियम से वर्जित — पर, सौम्य वारों (सोम, बुध, गुरु, शुक्र) में, दिन के समय किया जाता है।
  • शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन होता है, और इस पर कोई ऋतु-विराम नहीं — खरमास व चातुर्मास नामकरण नहीं रोकते — अतः हर जन्मतिथि के निकट उपयुक्त दिन मिलता है।
  • मानक फ़िल्टर लागू हैं: रिक्ता तिथि, अमावस्या, भद्रा व अशुभ योग हटा दिए जाते हैं, और प्रत्येक समय राहु काल व अन्य दैनिक दोषों से मुक्त है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नामकरण कब करना चाहिए?
शास्त्रतः जन्म के 11वें या 12वें दिन; संभव न हो तो आगे की निकटतम शुभ तिथि ली जाती है। यहाँ वर्ष के वे सभी दिन दिए हैं जिनका पंचांग नामकरण के योग्य है, ताकि शिशु की जन्मतिथि के निकटतम दिन चुना जा सके।
यदि जन्म का 11वाँ दिन सूची में न हो तो?
उसके बाद की निकटतम सूचीबद्ध तिथि लें। कोई दिन तभी छूटता है जब उसके पंचांग में दोष हो — रिक्ता तिथि, भद्रा, अशुभ योग या अनुपयुक्त नक्षत्र — और ऐसे दिन नामकरण परंपरागत रूप से आगे बढ़ा दिया जाता है।
नामकरण शुक्ल पक्ष में ही क्यों?
बढ़ता चंद्रमा वृद्धि का प्रतीक है — शिशु के पहले सोपान के अनुरूप। इसलिए नामकरण केवल बढ़ते पखवाड़े में, अमावस्या से पूर्णिमा के बीच, सूचीबद्ध है।
क्या पंचक नामकरण में बाधक है?
नहीं — पंचक दोष निर्माण, ईंधन-संग्रह, शय्या व दक्षिण यात्रा पर लागू होता है, बाल संस्कारों पर नहीं; अतः धनिष्ठा से रेवती तक के दिन अन्य कारक शुभ होने पर रखे गए हैं।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।