विवाह मुहूर्त 2025
जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ
जनवरी 2025
2 शुभ दिन
गुरुवार, 23 जनवरी 2025
सर्वाधिक शुभमुहूर्त समय
- नक्षत्र
- अनुराधा
- तिथि
- कृष्ण दशमी
- योग
- वृद्धि
- करण
- वणिज
यह दिन क्यों शुभ
- अनुराधा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
- कृष्ण दशमी — अनुकूल तिथि
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल
वर्जित समय
- राहु काल13:53–15:13
- यमगण्ड07:13–08:33
- गुलिक काल09:53–11:13
- वर्ज्यम्08:45–10:31
26 शुभ दिन
2025 में सर्वाधिक शुभ विवाह तिथियाँ।
जनवरी2025
- 18शुभशुभ मुहूर्त15:10 – 01:14
- 23★सर्वाधिक शुभ
गुरुवार, 23 जनवरी 2025
शुभ मुहूर्त05:07 – 06:36
फ़रवरी2025
- 2शुभ
रविवार, 2 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त09:14 – 11:2813:56 – 15:1818:01 – 06:53 - 6★सर्वाधिक शुभ
गुरुवार, 6 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त22:53 – 07:06 - 7सर्वाधिक शुभ
शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त07:05 – 08:2809:50 – 10:5612:35 – 15:20 - 12शुभ
बुधवार, 12 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त01:57 – 07:01 - 14सर्वाधिक शुभ
शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त23:08 – 07:00 - 15शुभ
शनिवार, 15 फ़रवरी 2025
शुभ मुहूर्त08:51 – 09:47
मार्च2025
- 1शुभ
शनिवार, 1 मार्च 2025
शुभ मुहूर्त11:22 – 14:0015:27 – 06:46 - 2★शुभ
रविवार, 2 मार्च 2025
शुभ मुहूर्त06:45 – 12:3314:00 – 15:2718:21 – 21:02
अप्रैल2025
- 14सर्वाधिक शुभ
सोमवार, 14 अप्रैल 2025
शुभ मुहूर्त22:37 – 00:13 - 20शुभ
रविवार, 20 अप्रैल 2025
शुभ मुहूर्त11:47 – 12:2013:57 – 15:35 - 30★सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 30 अप्रैल 2025
शुभ मुहूर्त05:41 – 07:20
मई2025
- 1सर्वाधिक शुभ
गुरुवार, 1 मई 2025
शुभ मुहूर्त11:24 – 13:57 - 14★सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 14 मई 2025
शुभ मुहूर्त06:32 – 07:1208:54 – 10:36 - 17शुभ
शनिवार, 17 मई 2025
शुभ मुहूर्त17:43 – 05:29 - 18शुभ
रविवार, 18 मई 2025
शुभ मुहूर्त05:28 – 05:58 - 28सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 28 मई 2025
शुभ मुहूर्त05:24 – 07:0809:19 – 10:3514:02 – 19:07
जून2025
- 2★सर्वाधिक शुभ
सोमवार, 2 जून 2025
शुभ मुहूर्त08:51 – 10:1512:19 – 14:0315:47 – 20:35 - 4सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 4 जून 2025
शुभ मुहूर्त23:54 – 05:23 - 5सर्वाधिक शुभ
गुरुवार, 5 जून 2025
शुभ मुहूर्त07:07 – 08:51
नवंबर2025
- 2शुभ
रविवार, 2 नवंबर 2025
शुभ मुहूर्त05:07 – 06:33 - 3★सर्वाधिक शुभ
सोमवार, 3 नवंबर 2025
शुभ मुहूर्त06:34 – 07:5709:19 – 10:4212:04 – 13:2714:49 – 19:38 - 21शुभ
शुक्रवार, 21 नवंबर 2025
शुभ मुहूर्त12:06 – 13:55 - 22शुभ
शनिवार, 22 नवंबर 2025
शुभ मुहूर्त23:26 – 06:49 - 23शुभ
रविवार, 23 नवंबर 2025
शुभ मुहूर्त06:50 – 12:07
विवाह मुहूर्त के बारे में
विवाह मुहूर्त वह सुनिश्चित समय है जब विवाह के बंधनकारी संस्कार — विशेषतः कन्यादान व फेरे — अनुकूल आकाश के नीचे संपन्न हों, ताकि वैवाहिक जीवन शुभ आरंभ पाए। सभी संस्कारों में विवाह के समय-नियम सबसे कठोर हैं: मुहूर्त चिंतामणि व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' इस पर पूरे अध्याय देती हैं — इसीलिए विवाह-ऋतुएँ एक साथ आती हैं और कई महीने वास्तव में रिक्त रहते हैं। नीचे की प्रत्येक तिथि इन नियमों पर पूर्णतः खरी है, दृक (वास्तविक स्थिति) पंचांग से गणना की गई है, और उसके साथ वास्तविक मुहूर्त समय — संध्या व रात्रि के विवाह लग्न सहित — दिया गया है।
विवाह मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
- तिथियाँ ग्यारह शास्त्रीय विवाह नक्षत्रों — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद व रेवती — पर पड़ती हैं — वही विवाह-समूह जो बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' और कालप्रकाशिका दोनों एक समान देती हैं। पंचक विवाह में बाधक नहीं, अतः उत्तरा भाद्रपद व रेवती सम्मिलित हैं।
- शुभ तिथियाँ स्तर तय करती हैं: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी 'सर्वाधिक शुभ'; प्रतिपदा 'शुभ' स्तर पर। षष्ठी, अष्टमी व द्वादशी रमन की 'मुहूर्त' के विवाह-तिथि नियम से एक साथ वर्जित हैं, साथ ही रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14), अमावस्या व पूर्णिमा; और कृष्ण पक्ष में एकादशी से अमावस्या तक कोई तिथि नहीं ली जाती।
- सोम, बुध, गुरु व शुक्र वार श्रेष्ठ हैं; रवि व शनि 'मध्यम' होकर 'शुभ' स्तर पर दिखते हैं। विवाह हेतु केवल मंगलवार वर्जित है।
- मुहूर्त ग्रंथों के नौ अशुभ योग — विष्कम्भ, अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ व वैधृति — तथा भद्रा (विष्टि करण) और गण्डान्त पद (मघा व मूल का प्रथम, रेवती का अंतिम चरण) हटा दिए जाते हैं।
- खरमास (सूर्य धनु या मीन में), चातुर्मास (देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी), अधिक मास तथा गुरु या शुक्र के अस्त काल में विवाह स्थगित रहते हैं — विवाह हेतु दोनों ग्रहों का उदित होना आवश्यक है।
- प्रत्येक तिथि के साथ उसका वास्तविक मुहूर्त समय — संध्या व रात्रि के विवाह लग्न सहित — दिया गया है। फिर भी यह पंचांग-स्तर की सूची है — वर-वधू की कुंडलियों का मिलान ज्योतिषी से अवश्य कराएँ।
ध्यान रखने योग्य बातें
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
- पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
- राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
- खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
- चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
- अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- विवाह के लिए कौन से नक्षत्र श्रेष्ठ हैं?
- मुहूर्त ग्रंथ ग्यारह विवाह नक्षत्र बताते हैं: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद व रेवती। यहाँ सूचीबद्ध प्रत्येक तिथि इन्हीं में से किसी नक्षत्र पर पड़ती है।
- क्या शनिवार या रविवार को विवाह हो सकता है?
- हाँ — शास्त्रीय परंपरा विवाह हेतु केवल मंगलवार का दृढ़ निषेध करती है। शनि व रवि 'मध्यम' माने जाते हैं, वर्जित नहीं — इसलिए ऐसी तिथियाँ 'सर्वाधिक शुभ' के बजाय 'शुभ' स्तर पर दिखाई जाती हैं।
- मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी में विवाह तिथियाँ क्यों नहीं हैं?
- वह खरमास (मलमास) है — सूर्य का धनु राशि में संक्रमण — जिसमें विवाह परंपरागत रूप से रुकते हैं। यही मध्य मार्च–मध्य अप्रैल (सूर्य मीन में), चातुर्मास, अधिक मास तथा गुरु या शुक्र के अस्त रहने पर भी लागू होता है, क्योंकि विवाह हेतु दोनों ग्रहों का बली होना आवश्यक है।
- कृष्ण पक्ष के अंतिम दिनों में तिथियाँ क्यों नहीं हैं?
- बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' कृष्ण एकादशी से अमावस्या तक का पक्षांत वर्जित करती है — क्षीण होते चंद्रमा के अंतिम दिन — भले ही वे श्रेष्ठ नक्षत्रों पर पड़ें। जो सूचियाँ उन दिनों के विवाह दिखाती हैं, वे यह नियम छोड़ देती हैं; यहाँ वे वर्जित हैं, इसलिए अमावस्या से पहले के दिन सदा रिक्त रहते हैं।
- क्या ये तिथियाँ कुंडली मिलान का विकल्प हैं?
- नहीं। ये पंचांग-स्तर की साझा सूची हैं; गुण मिलान तथा दोनों कुंडलियों में गुरु व शुक्र का बल व्यक्तिगत विषय है — विवाह निश्चित करने से पहले ज्योतिषी से पुष्टि अवश्य कराएँ।
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।

