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विद्यारंभ मुहूर्त 2026

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जून 2026

1 शुभ दिन

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30
सर्वोत्तम दिनशुभ

बुधवार, 17 जून 2026

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त05:2307:07
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त1 घं 45 मि
शुभ मुहूर्त08:5210:37
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 45 मि
नक्षत्र
पुनर्वसु
तिथि
शुक्ल तृतीया
योग
ध्रुव
करण
तैतिल

यह दिन क्यों शुभ

  • पुनर्वसु — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल तृतीया — अनुकूल तिथि

वर्जित समय

  • राहु काल12:22–14:06
  • यमगण्ड07:07–08:52
  • गुलिक काल10:37–12:22
  • वर्ज्यम्02:55–04:21
पूरा पंचांग देखें

19 शुभ दिन

2026 में सर्वाधिक शुभ विद्यारंभ तिथियाँ।

फ़रवरी2026

3 शुभ दिन
  1. 22

    रविवार, 22 फ़रवरी 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:53 – 12:34
    अश्विनीशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 26
  3. 27

    शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:48 – 08:1409:41 – 11:07
    आर्द्राशुक्ल एकादशीपूरा पंचांग देखें

मार्च2026

2 शुभ दिन
  1. 1

    रविवार, 1 मार्च 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:46 – 08:35
    पुष्यशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगरवि पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  2. 8

अप्रैल2026

3 शुभ दिन
  1. 22
  2. 23

    गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:25 – 09:0311:06 – 12:19
    पुनर्वसुशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 29

    बुधवार, 29 अप्रैल 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त05:42 – 07:2109:18 – 10:39
    हस्तशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

मई2026

1 शुभ दिन
  1. 3

जून2026

1 शुभ दिन
  1. 17

अगस्त2026

3 शुभ दिन
  1. 17
  2. 19
  3. 26

सितंबर2026

4 शुभ दिन
  1. 13

    रविवार, 13 सितंबर 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:05 – 12:16
    हस्तशुक्ल द्वितीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 14
  3. 23
  4. 28

अक्टूबर2026

1 शुभ दिन
  1. 30

नवंबर2026

1 शुभ दिन
  1. 16

    सोमवार, 16 नवंबर 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:17 – 08:0409:25 – 10:45
    श्रवणशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

विद्यारंभ मुहूर्त के बारे में

विद्यारंभ (अक्षराभ्यास) पहले अक्षरों का संस्कार है — परंपरागत रूप से पाँचवें वर्ष में बालक से पहले अक्षर लिखवाए जाते हैं और सरस्वती की वंदना के साथ शिक्षा विधिवत आरंभ होती है। शास्त्रीय मुहूर्त-ग्रंथ इस संस्कार को अपना अध्याय देते हैं: विद्या के सौम्य नक्षत्र, बुध व गुरु के वारों की अगुवाई में, शुभ तिथि के पूर्वाह्न में। वसंत पंचमी इसका सबसे प्रसिद्ध दिन है; नीचे की प्रत्येक तिथि दृक-पंचांग पर पूर्णतः खरी है।

विद्यारंभ मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • तिथियाँ विद्या के दस नक्षत्रों पर पड़ती हैं — शास्त्रीय अक्षरारंभ-सूची के अश्विनी, आर्द्रा, पुनर्वसु, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण व रेवती, साथ में व्यापक परंपरा से पुष्य व अनुराधा। सामान्यतः वर्जित आर्द्रा विद्या हेतु शास्त्र-सम्मत है; पंचक विद्यारंभ में बाधक नहीं, अतः श्रवण व रेवती सम्मिलित हैं।
  • द्वितीया, तृतीया, पंचमी, दशमी, एकादशी व द्वादशी 'सर्वाधिक शुभ'; षष्ठी, सप्तमी व त्रयोदशी 'शुभ' स्तर पर। कृष्ण पक्ष में केवल आरंभिक शुभ तिथियाँ — द्वितीया, तृतीया व पंचमी — ली जाती हैं; प्रतिपदा (अनध्याय तिथि), रिक्ता तिथियाँ व अमावस्या वर्जित हैं।
  • बुधवार, गुरुवार व शुक्रवार — बुध, बृहस्पति व शुक्र, विद्या के तीनों कारकों के दिन — सर्वश्रेष्ठ वार हैं; सोम व रवि 'शुभ' स्तर पर मान्य; मंगलवार व शनिवार वर्जित।
  • नौ अशुभ योग व भद्रा हटाए जाते हैं; कैलेंडर खरमास व अधिक मास में रुकता है; और विद्या के स्वामी बृहस्पति होने से गुरु या शुक्र के अस्त काल में विद्यारंभ सूचीबद्ध नहीं होता।
  • चातुर्मास विद्यारंभ नहीं रोकता — गुरु पूर्णिमा व विजयादशमी, विद्या आरंभ के दो प्रिय पारंपरिक दिन, इसी अवधि में आते हैं।
  • 'मध्याह्न सर्वोत्तम, पूर्वाह्न उत्तम; अपराह्न, संध्या व रात्रि वर्जित' — अतः प्रत्येक मुहूर्त सूर्योदय से स्थानीय सौर मध्याह्न तक का है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या विद्यारंभ के लिए वसंत पंचमी सर्वश्रेष्ठ दिन है?
परंपरा वसंत पंचमी (सरस्वती जयंती) को विद्यारंभ का अबूझ — स्वयंसिद्ध — मुहूर्त मानती है, जिसके लिए पंचांग देखना आवश्यक नहीं। यह कैलेंडर उन सभी दिनों को सूचीबद्ध करता है जिनका अपना पंचांग कठोर नियमों पर खरा है; किसी वर्ष वसंत पंचमी पर कोई दोष हो (जैसे गुरु या शुक्र अस्त) तो वह यहाँ नहीं दिखेगी — फिर भी परंपरा से वह अपने आप में शुभ है।
इन तिथियों में बुधवार-गुरुवार आगे क्यों हैं?
बुध बुद्धि व विद्या के, बृहस्पति ज्ञान के और शुक्र कला के कारक हैं — इन तीनों के वार (बुध, गुरु, शुक्रवार) विद्यारंभ हेतु सर्वश्रेष्ठ माने गए हैं; सोम व रवि मध्यम हैं, मंगल व शनि वर्जित।
क्या चातुर्मास में विद्यारंभ हो सकता है?
हाँ — चातुर्मास विद्यारंभ नहीं रोकता। गुरु पूर्णिमा और विजयादशमी, विद्या आरंभ के दो सबसे प्रिय पारंपरिक दिन, इसी अवधि में आते हैं — अतः उन महीनों में भी तिथियाँ दिखती हैं; विराम केवल खरमास व अधिक मास में है।
विद्यारंभ की सही आयु क्या है?
शास्त्र पाँचवाँ वर्ष बताते हैं — अर्थात चार वर्ष पूर्ण होने पर — और अक्षराभ्यास उपनयन से पहले होना चाहिए। व्यवहार में परिवार ढाई से पाँच वर्ष के बीच कोई शुभ दिन चुनते हैं।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।