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सोना खरीदने का मुहूर्त 2026

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जून 2026

8 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
1
2
3
4
6
9
12
13
14
15
16
18
19
20
22
23
25
26
27
28
29
30
सर्वोत्तम दिनशुभ

बुधवार, 24 जून 2026

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त15:5319:22
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त3 घं 29 मि
शुभ मुहूर्त05:2407:09
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 45 मि
नक्षत्र
चित्रा
तिथि
शुक्ल दशमी
योग
परिघ
करण
गर

यह दिन क्यों शुभ

  • चित्रा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • स्वाति — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल दशमी — अनुकूल तिथि

वर्जित समय

  • राहु काल12:23–14:08
  • यमगण्ड07:09–08:54
  • गुलिक काल10:38–12:23
  • वर्ज्यम्20:35–22:19
दिन का चौघड़िया देखें

113 शुभ दिन

2026 में सर्वाधिक शुभ स्वर्ण खरीद तिथियाँ।

जनवरी2026

11 शुभ दिन
  1. 1
  2. 5

    सोमवार, 5 जनवरी 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3209:50 – 11:08
    पुष्यकृष्ण द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  3. 8
  4. 11
  5. 12
  6. 19
  7. 23
  8. 25
  9. 26
  10. 28
  11. 29

फ़रवरी2026

6 शुभ दिन
  1. 6
  2. 18
  3. 20
  4. 22
  5. 26
  6. 27

मार्च2026

9 शुभ दिन
  1. 1

    रविवार, 1 मार्च 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त08:13 – 08:33
    पुष्यशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगरवि पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 4
  3. 8
  4. 9
  5. 15
  6. 16
  7. 19

    गुरुवार, 19 मार्च 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:57 – 09:2710:58 – 13:5915:57 – 18:31
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल प्रतिपदागुड़ी पड़वादिन का चौघड़िया देखें
  8. 20

    शुक्रवार, 20 मार्च 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:25 – 07:5609:27 – 10:5812:28 – 13:5917:01 – 18:32
    रेवतीशुक्ल द्वितीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  9. 25

अप्रैल2026

11 शुभ दिन
  1. 2
  2. 3
  3. 10
  4. 12
  5. 13
  6. 15
  7. 17

    शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त17:21 – 18:47
    अश्विनीशुक्ल प्रतिपदाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  8. 19
  9. 20
  10. 23

    गुरुवार, 23 अप्रैल 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त11:05 – 13:5717:13 – 18:51
    पुनर्वसुशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  11. 29

मई2026

14 शुभ दिन
  1. 3
  2. 4

    सोमवार, 4 मई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:38 – 07:1808:58 – 09:57
    अनुराधाकृष्ण तृतीयासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  3. 8
  4. 10
  5. 11
  6. 13
  7. 14
  8. 15
  9. 18

    सोमवार, 18 मई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:55 – 07:1108:53 – 10:3515:42 – 19:06
    रोहिणीशुक्ल द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  10. 21

    गुरुवार, 21 मई 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त10:57 – 11:4413:14 – 14:0017:25 – 19:08
    पुष्यशुक्ल षष्ठीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें
  11. 25
  12. 28
  13. 29
  14. 31

जून2026

8 शुभ दिन
  1. 5
  2. 7
  3. 8
  4. 10
  5. 11

    गुरुवार, 11 जून 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:36 – 14:0517:34 – 19:18
    अश्विनीकृष्ण एकादशीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  6. 17
  7. 21
  8. 24

जुलाई2026

11 शुभ दिन
  1. 1
  2. 2
  3. 5
  4. 9

    गुरुवार, 9 जुलाई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:42 – 11:0612:38 – 14:10
    अश्विनीकृष्ण दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  5. 12
  6. 15
  7. 19

    रविवार, 19 जुलाई 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:18 – 12:2714:10 – 15:53
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल षष्ठीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  8. 20
  9. 24

    शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:38 – 06:1109:02 – 10:4512:27 – 14:0917:34 – 19:17
    अनुराधाशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  10. 30
  11. 31

अगस्त2026

9 शुभ दिन
  1. 3
  2. 7
  3. 9
  4. 10
  5. 17
  6. 19
  7. 20
  8. 26
  9. 28

सितंबर2026

12 शुभ दिन
  1. 4
  2. 7
  3. 11
  4. 13

    रविवार, 13 सितंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:38 – 12:1613:49 – 15:22
    हस्तशुक्ल तृतीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  5. 14
  6. 16
  7. 17

    गुरुवार, 17 सितंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त10:43 – 13:4716:51 – 18:24
    अनुराधाशुक्ल षष्ठीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  8. 21
  9. 23
  10. 24
  11. 27

    रविवार, 27 सितंबर 2026

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:41 – 12:1213:42 – 15:12
    उत्तर भाद्रपदाकृष्ण प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  12. 28

अक्टूबर2026

8 शुभ दिन
  1. 1
  2. 5

    सोमवार, 5 अक्टूबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:16 – 07:4409:23 – 10:41
    पुष्यकृष्ण दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  3. 12
  4. 19
  5. 20
  6. 22
  7. 26
  8. 30

नवंबर2026

7 शुभ दिन
  1. 1

    रविवार, 1 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:55 – 12:04
    पुष्यकृष्ण सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगरवि पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 6

    शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:36 – 07:5809:20 – 10:4212:04 – 12:3514:15 – 14:4816:10 – 19:56
    हस्तकृष्ण द्वादशीधनतेरसदिन का चौघड़िया देखें
  3. 16

    सोमवार, 16 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:15 – 08:0409:25 – 10:4514:46 – 17:27
    श्रवणशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  4. 20

    शुक्रवार, 20 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:56 – 08:0709:27 – 10:4612:06 – 13:2616:05 – 17:25
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल दशमीदिन का चौघड़िया देखें
  5. 25

    बुधवार, 25 नवंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:51 – 08:1014:56 – 17:24
    रोहिणीकृष्ण प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  6. 26
  7. 29

दिसंबर2026

7 शुभ दिन
  1. 4
  2. 14

    सोमवार, 14 दिसंबर 2026

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:05 – 08:2209:40 – 10:5814:50 – 17:25
    श्रवणशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  3. 16
  4. 20
  5. 25
  6. 30
  7. 31

सोना खरीदने का मुहूर्त के बारे में

स्वर्ण-खरीद मुहूर्त वह दिन चुनता है जब लक्ष्मी की धातु घर लाना स्थायी समृद्धि का आह्वान बने। पुष्य — स्वयं लक्ष्मी का नक्षत्र — खरीद का सर्वश्रेष्ठ तारा है, और गुरुवार से उसका योग (गुरु पुष्य) तथा रविवार से (रवि पुष्य) परंपरा के प्रसिद्ध खरीद-दिन हैं; धनतेरस व अक्षय तृतीया जैसे पर्व-दिन अपने आप में शुभ हैं ही। सोना खरीद है, संस्कार नहीं — अतः कोई ऋतु-विराम लागू नहीं होता; हर महीने शुभ दिन मिलते हैं, प्रत्येक समय शुभ चौघड़ियों तक सीमित।

सोना खरीदने का मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • सोलह नक्षत्रों का शास्त्रीय खरीद-समूह मान्य है — अश्विनी से रेवती तक के लघु, मृदु, चर व ध्रुव गण — जिनमें लक्ष्मी का नक्षत्र पुष्य सर्वश्रेष्ठ है। गुरुवार को पुष्य (गुरु पुष्य) या रविवार को पुष्य (रवि पुष्य) परंपरा के प्रसिद्ध खरीद-दिन हैं।
  • श्रेष्ठ तिथियाँ — द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी व एकादशी — 'सर्वाधिक शुभ' स्तर पाती हैं; अन्य निर्दोष तिथियाँ — त्रयोदशी सहित, जो स्वयं धनतेरस की तिथि है — 'शुभ' स्तर पर मान्य हैं। रिक्ता तिथियाँ (4, 9, 14) व अमावस्या सर्वत्र की तरह हटाई गई हैं।
  • गुरुवार (बृहस्पति — स्वर्ण व धन के स्वामी) सर्वश्रेष्ठ वार है; रवि, सोम, बुध व शुक्र शुभ हैं। शनिवार दृढ़ता से वर्जित — शनि के दिन सोना नहीं खरीदा जाता — और मंगलवार हर खरीद की तरह वर्जित है।
  • पंचक आभूषण में बाधक नहीं — उसमें आभूषण खरीदना शुभ माना गया है — अतः पट्टी के शुभ नक्षत्र सम्मिलित हैं; और कोई ऋतु-विराम लागू नहीं (सोना खरीद है, संस्कार नहीं), अतः हर महीने तिथियाँ मिलती हैं।
  • प्रत्येक दिन का समय शुभ चौघड़ियों — अमृत, शुभ, लाभ व चल — तक सीमित है। चौघड़िया खरीद की लोकप्रिय पंचांग-विधि है; शास्त्रीय ग्रंथ होरा व लग्न से काम लेते हैं।
  • चार पर्व-दिन पर्व के अपने प्रमाण से सूचीबद्ध होते हैं, भले ही सामान्य नियम उन्हें छोड़ दें: धनतेरस — व्यापार परंपरा में स्वर्ण का सबसे प्रसिद्ध दिन — तथा साढ़े तीन मुहूर्त के दिन गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया (जिसके कर्मों को धर्मसिंधु अक्षय कहती है) व विजयादशमी।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सोना खरीदने के लिए सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
गुरुवार — बृहस्पति स्वर्ण व धन के स्वामी हैं — और सर्वोपरि पुष्य नक्षत्र वाला गुरुवार, प्रसिद्ध गुरु पुष्य योग। रविवार को पुष्य (रवि पुष्य) उसके समकक्ष है; यहाँ सूचीबद्ध प्रत्येक तिथि शुभ नक्षत्र-वार युति पर पड़ती है।
क्या शनिवार को सोना खरीद सकते हैं?
नहीं — परंपरा शनि के दिन सोना खरीदना दृढ़ता से वर्जित करती है (शनि की धातु लोहा है), और मंगलवार हर खरीद की तरह वर्जित है। रवि, सोम, बुध, गुरु व शुक्र खरीद के दिन हैं।
धनतेरस और अक्षय तृतीया का क्या?
दोनों इस कैलेंडर में पर्व-चिह्न के साथ दिखते हैं — पर्व के अपने प्रमाण से सूचीबद्ध, इसलिए नहीं कि उनका पंचांग संयोग से नियमों पर खरा उतरता है। पर्व स्वयं दिन निश्चित करता है (पर्व-निर्णय परंपरा), अतः सामान्य नक्षत्र/तिथि/वार नियम उस पर लागू नहीं होते; केवल दिन के भीतर के त्याज्य काल — राहु काल, भद्रा — समय को आकार देते हैं, ठीक वैसे ही जैसे पर्व-पंचांग स्वयं करते हैं।
क्या किसी ऋतु में सोना खरीदना वर्जित है?
नहीं। स्वर्ण-खरीद खरीद है, संस्कार नहीं — खरमास, चातुर्मास या अधिक मास का कोई विराम लागू नहीं, और पंचक भी आभूषण में बाधक नहीं; अतः हर महीने शुभ तिथियाँ मिलती हैं।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।