रविवार, 6 सितंबर 2026
दैनिक पंचांग
आज रविवार है। दशमी तिथि 19:29 बजे तक, फिर एकादशी 17:04 (कल) बजे तक रहेगी। आर्द्रा नक्षत्र 19:52 बजे तक, उसके बाद पुनर्वसु 18:13 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग सिद्धि 09:43 बजे तक, फिर व्यतीपात योग 06:39 (कल) बजे तक। वणिज करण 08:42 बजे तक, उसके बाद विष्टि 19:29 बजे तक, फिर बव 06:16 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (17:02 से 18:37) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक श्रावण
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण दशमी
पिछले दिन21:54उसी दिन19:29
अजा एकादशी
उसी दिन19:29अगले दिन17:04
दशमी — स्थिर और भरोसेमंद तिथि। अधिकांश कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है।
रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
- अमान्तश्रावणपूर्णिमान्तभाद्रपद
नक्षत्र · योग · करण
आर्द्रा
पिछले दिन21:30उसी दिन19:52
पुनर्वसु
उसी दिन19:52अगले दिन18:13
तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।
सिद्धि
पिछले दिन12:45उसी दिन09:43
व्यतीपात
उसी दिन09:43अगले दिन06:39
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
वणिज
पिछले दिन21:54उसी दिन08:42
विष्टि
उसी दिन08:42उसी दिन19:29
बव
उसी दिन19:29अगले दिन06:16
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण दशमी · रवि
6 सित॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0107:36 | ||
| 07:3609:10 | ||
| 09:1010:44 | ||
| 10:4412:19 | ||
| 12:1913:53 | ||
| 13:5315:28 | ||
| 15:2817:02 | ||
| 17:0218:37 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:3720:02 | ||
| 20:0221:28 | ||
| 21:2822:54 | ||
| 22:5400:19 | ||
| 00:1901:45 | ||
| 01:4503:10 | ||
| 03:1004:36 | ||
| 04:3606:02 |
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0107:36 | ||
| 07:3609:10 | ||
| 09:1010:44 | ||
| 10:4412:19 | ||
| 12:1913:53 | ||
| 13:5315:28 | ||
| 15:2817:02 | ||
| 17:0218:37 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:3720:02 | ||
| 20:0221:28 | ||
| 21:2822:54 | ||
| 22:5400:19 | ||
| 00:1901:45 | ||
| 01:4503:10 | ||
| 03:1004:36 | ||
| 04:3606:02 |
| 04:30→05:16 | ||
| 11:54→12:44 | ||
| 10:33→12:02 | ||
| 17:02→18:37 | ||
| 12:19→13:53 | ||
| 15:28→17:02 | ||
| 05:19→06:49 |
दिन के घंटे
12·1 घं 3 मि| 06:0107:04 | ||
| 07:0408:07 | ||
| 08:0709:10 | ||
| 09:1010:13 | ||
| 10:1311:16 | ||
| 11:1612:19 | ||
| 12:1913:22 | ||
| 13:2214:25 | ||
| 14:2515:28 | ||
| 15:2816:31 | ||
| 16:3117:34 | ||
| 17:3418:37 |
रात के घंटे
12·57 मि| 18:3719:34 | ||
| 19:3420:31 | ||
| 20:3121:28 | ||
| 21:2822:25 | ||
| 22:2523:22 | ||
| 23:2200:19 | ||
| 00:1901:16 | ||
| 01:1602:13 | ||
| 02:1303:10 | ||
| 03:1004:07 | ||
| 04:0705:05 | ||
| 05:0506:02 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 6 सितंबर 2026 की तिथि क्या है?
- 6 सितंबर 2026 की तिथि कृष्ण दशमी है।
- 6 सितंबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 6 सितंबर 2026 का नक्षत्र आर्द्रा और योग सिद्धि है।
- 6 सितंबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:01 पर तथा सूर्यास्त 18:37 पर होगा।
- 6 सितंबर 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 17:02–18:37 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

