रविवार, 20 अप्रैल 2025
दैनिक पंचांग
आज रविवार है। सप्तमी तिथि 19:01 बजे तक, फिर अष्टमी 18:59 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व आषाढ़ा नक्षत्र 11:47 बजे तक, उसके बाद उत्तर आषाढ़ा 12:36 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग सिद्ध 00:11 (कल) बजे तक, फिर साध्य योग 22:59 (कल) बजे तक। विष्टि करण 06:46 बजे तक, उसके बाद बव 19:01 बजे तक, फिर बालव 07:05 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (17:12 से 18:49) के दौरान टालें। चन्द्रमा धनु राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक चैत्र
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण सप्तमी
पिछले दिन18:22उसी दिन19:01
कृष्ण अष्टमी
उसी दिन19:01अगले दिन18:59
सप्तमी — सामान्यतः सहज और संतुलित तिथि। नियमित कार्यों और यात्रा के लिए शुभ।
रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
- अमान्तचैत्रपूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
पूर्व आषाढ़ा
पिछले दिन10:20उसी दिन11:47
उत्तर आषाढ़ा
उसी दिन11:47अगले दिन12:36
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
सिद्ध
उसी दिन00:51अगले दिन00:11
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
विष्टि
पिछले दिन18:22उसी दिन06:46
बव
उसी दिन06:46उसी दिन19:01
बालव
उसी दिन19:01अगले दिन07:05
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण सप्तमी · रवि
20 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 37 मि| 05:5007:28 | ||
| 07:2809:05 | ||
| 09:0510:42 | ||
| 10:4212:20 | ||
| 12:2013:57 | ||
| 13:5715:35 | ||
| 15:3517:12 | ||
| 17:1218:49 |
रात के समय
8·1 घं 22 मि| 18:4920:12 | ||
| 20:1221:34 | ||
| 21:3422:57 | ||
| 22:5700:19 | ||
| 00:1901:42 | ||
| 01:4203:04 | ||
| 03:0404:27 | ||
| 04:2705:49 |
दिन के समय
8·1 घं 37 मि| 05:5007:28 | ||
| 07:2809:05 | ||
| 09:0510:42 | ||
| 10:4212:20 | ||
| 12:2013:57 | ||
| 13:5715:35 | ||
| 15:3517:12 | ||
| 17:1218:49 |
रात के समय
8·1 घं 22 मि| 18:4920:12 | ||
| 20:1221:34 | ||
| 21:3422:57 | ||
| 22:5700:19 | ||
| 00:1901:42 | ||
| 01:4203:04 | ||
| 03:0404:27 | ||
| 04:2705:49 |
| 04:22→05:06 | ||
| 11:54→12:46 | ||
| 06:42→08:24 | ||
| 17:12→18:49 | ||
| 12:20→13:57 | ||
| 15:35→17:12 | ||
| 20:31→22:13 |
दिन के घंटे
12·1 घं 5 मि| 05:5006:55 | ||
| 06:5508:00 | ||
| 08:0009:05 | ||
| 09:0510:10 | ||
| 10:1011:15 | ||
| 11:1512:20 | ||
| 12:2013:25 | ||
| 13:2514:30 | ||
| 14:3015:35 | ||
| 15:3516:39 | ||
| 16:3917:44 | ||
| 17:4418:49 |
रात के घंटे
12·55 मि| 18:4919:44 | ||
| 19:4420:39 | ||
| 20:3921:34 | ||
| 21:3422:29 | ||
| 22:2923:24 | ||
| 23:2400:19 | ||
| 00:1901:14 | ||
| 01:1402:09 | ||
| 02:0903:04 | ||
| 03:0403:59 | ||
| 03:5904:54 | ||
| 04:5405:49 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 20 अप्रैल 2025 की तिथि क्या है?
- 20 अप्रैल 2025 की तिथि कृष्ण सप्तमी है।
- 20 अप्रैल 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 20 अप्रैल 2025 का नक्षत्र पूर्व आषाढ़ा और योग सिद्ध है।
- 20 अप्रैल 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:50 पर तथा सूर्यास्त 18:49 पर होगा।
- 20 अप्रैल 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 17:12–18:49 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

