शनिवार, 25 अप्रैल 2026
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है। नवमी तिथि 18:28 बजे तक, फिर दशमी 18:07 (कल) बजे तक रहेगी। आश्लेषा नक्षत्र 20:04 बजे तक, उसके बाद मघा 20:26 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग गण्ड 23:42 बजे तक, फिर वृद्धि योग 22:26 (कल) बजे तक। बालव करण 06:51 बजे तक, उसके बाद कौलव 18:28 बजे तक, फिर तैतिल 06:13 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:02 से 10:41) के दौरान टालें। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल नवमी
पिछले दिन 19:22 उसी दिन 18:28
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शुक्ल दशमी
उसी दिन 18:28 अगले दिन 18:07
नवमी — दुर्गा को समर्पित। साधना के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्य परंपरा में टाले जाते हैं।
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शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
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वैशाख · ज्येष्ठ
नक्षत्र · योग · करण
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आश्लेषा
पिछले दिन 20:13 उसी दिन 20:04
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मघा
उसी दिन 20:04 अगले दिन 20:26
तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।
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गण्ड
उसी दिन 01:23 उसी दिन 23:42
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वृद्धि
उसी दिन 23:42 अगले दिन 22:26
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
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बालव
पिछले दिन 19:22 उसी दिन 06:51
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कौलव
उसी दिन 06:51 उसी दिन 18:28
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तैतिल
उसी दिन 18:28 अगले दिन 06:13
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल नवमी · शनि
25 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 38 मि| 05:46 07:24 | ||
| 07:24 09:02 | ||
| 09:02 10:41 | ||
| 10:41 12:19 | ||
| 12:19 13:57 | ||
| 13:57 15:36 | ||
| 15:36 17:14 | ||
| 17:14 18:52 |
रात के समय
8 · 1 घं 22 मि| 18:52 20:14 | ||
| 20:14 21:35 | ||
| 21:35 22:57 | ||
| 22:57 00:18 | ||
| 00:18 01:40 | ||
| 01:40 03:02 | ||
| 03:02 04:23 | ||
| 04:23 05:45 |
दिन के समय
8 · 1 घं 38 मि| 05:46 07:24 | ||
| 07:24 09:02 | ||
| 09:02 10:41 | ||
| 10:41 12:19 | ||
| 12:19 13:57 | ||
| 13:57 15:36 | ||
| 15:36 17:14 | ||
| 17:14 18:52 |
रात के समय
8 · 1 घं 22 मि| 18:52 20:14 | ||
| 20:14 21:35 | ||
| 21:35 22:57 | ||
| 22:57 00:18 | ||
| 00:18 01:40 | ||
| 01:40 03:02 | ||
| 03:02 04:23 | ||
| 04:23 05:45 |
| 04:18 → 05:02 | ||
| 11:53 → 12:45 | ||
| 18:28 → 20:04 | ||
| 09:02 → 10:41 | ||
| 13:57 → 15:36 | ||
| 05:46 → 07:24 | ||
| 08:56 → 10:32 |
दिन के घंटे
12 · 1 घं 6 मि| 05:46 06:51 | ||
| 06:51 07:57 | ||
| 07:57 09:02 | ||
| 09:02 10:08 | ||
| 10:08 11:13 | ||
| 11:13 12:19 | ||
| 12:19 13:24 | ||
| 13:24 14:30 | ||
| 14:30 15:36 | ||
| 15:36 16:41 | ||
| 16:41 17:47 | ||
| 17:47 18:52 |
रात के घंटे
12 · 54 मि| 18:52 19:47 | ||
| 19:47 20:41 | ||
| 20:41 21:35 | ||
| 21:35 22:30 | ||
| 22:30 23:24 | ||
| 23:24 00:18 | ||
| 00:18 01:13 | ||
| 01:13 02:07 | ||
| 02:07 03:02 | ||
| 03:02 03:56 | ||
| 03:56 04:50 | ||
| 04:50 05:45 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 25 अप्रैल 2026 की तिथि क्या है?
- 25 अप्रैल 2026 की तिथि शुक्ल नवमी है।
- 25 अप्रैल 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 25 अप्रैल 2026 का नक्षत्र आश्लेषा और योग गण्ड है।
- 25 अप्रैल 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:46 पर तथा सूर्यास्त 18:52 पर होगा।
- 25 अप्रैल 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 09:02–10:41 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।