शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026
दैनिक पंचांग
आज शुक्रवार है। प्रतिपदा तिथि 08:42 बजे तक, फिर द्वितीया 10:09 (कल) बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र 19:24 बजे तक, उसके बाद स्वाति 21:34 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग व्याघात 14:07 बजे तक, फिर हर्षण योग 14:15 (कल) बजे तक। कौलव करण 08:42 बजे तक, उसके बाद तैतिल 21:23 बजे तक, फिर गर 10:09 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (10:50 से 12:24) के दौरान टालें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य मीन राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक चैत्र
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण प्रतिपदा
पिछले दिन07:41उसी दिन08:42
कृष्ण द्वितीया
उसी दिन08:42अगले दिन10:09
प्रतिपदा — प्रथम तिथि। नए आरंभ और नींव रखने के लिए शुभ मानी जाती है।
शुक्रवार
शुक्रवार — शुक्र द्वारा शासित। सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
- अमान्तचैत्रपूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
चित्रा
पिछले दिन17:38उसी दिन19:24
स्वाति
उसी दिन19:24अगले दिन21:34
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
व्याघात
पिछले दिन14:18उसी दिन14:07
हर्षण
उसी दिन14:07अगले दिन14:15
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
कौलव
पिछले दिन20:09उसी दिन08:42
तैतिल
उसी दिन08:42उसी दिन21:23
गर
उसी दिन21:23अगले दिन10:09
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण प्रतिपदा · शुक्र
3 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0907:43 | ||
| 07:4309:16 | ||
| 09:1610:50 | ||
| 10:5012:24 | ||
| 12:2413:58 | ||
| 13:5815:32 | ||
| 15:3217:06 | ||
| 17:0618:40 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:4020:06 | ||
| 20:0621:32 | ||
| 21:3222:58 | ||
| 22:5800:24 | ||
| 00:2401:50 | ||
| 01:5003:16 | ||
| 03:1604:42 | ||
| 04:4206:08 |
दिन के समय
8·1 घं 34 मि| 06:0907:43 | ||
| 07:4309:16 | ||
| 09:1610:50 | ||
| 10:5012:24 | ||
| 12:2413:58 | ||
| 13:5815:32 | ||
| 15:3217:06 | ||
| 17:0618:40 |
रात के समय
8·1 घं 26 मि| 18:4020:06 | ||
| 20:0621:32 | ||
| 21:3222:58 | ||
| 22:5800:24 | ||
| 00:2401:50 | ||
| 01:5003:16 | ||
| 03:1604:42 | ||
| 04:4206:08 |
| 04:37→05:23 | ||
| 11:59→12:49 | ||
| 12:32→14:15 | ||
| 10:50→12:24 | ||
| 15:32→17:06 | ||
| 07:43→09:16 | ||
| 02:13→03:56 |
दिन के घंटे
12·1 घं 3 मि| 06:0907:11 | ||
| 07:1108:14 | ||
| 08:1409:16 | ||
| 09:1610:19 | ||
| 10:1911:22 | ||
| 11:2212:24 | ||
| 12:2413:27 | ||
| 13:2714:29 | ||
| 14:2915:32 | ||
| 15:3216:34 | ||
| 16:3417:37 | ||
| 17:3718:40 |
रात के घंटे
12·57 मि| 18:4019:37 | ||
| 19:3720:34 | ||
| 20:3421:32 | ||
| 21:3222:29 | ||
| 22:2923:26 | ||
| 23:2600:24 | ||
| 00:2401:21 | ||
| 01:2102:18 | ||
| 02:1803:16 | ||
| 03:1604:13 | ||
| 04:1305:10 | ||
| 05:1006:08 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 3 अप्रैल 2026 की तिथि क्या है?
- 3 अप्रैल 2026 की तिथि कृष्ण प्रतिपदा है।
- 3 अप्रैल 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 3 अप्रैल 2026 का नक्षत्र चित्रा और योग व्याघात है।
- 3 अप्रैल 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:09 पर तथा सूर्यास्त 18:40 पर होगा।
- 3 अप्रैल 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 10:50–12:24 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

