शनिवार, 1 फ़रवरी 2025
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है। तृतीया तिथि 11:38 बजे तक, फिर चतुर्थी 09:14 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र 02:32 (कल) बजे तक, उसके बाद उत्तर भाद्रपदा 00:51 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग परिघ 12:23 बजे तक, फिर शिव योग 09:13 (कल) बजे तक। गर करण 11:38 बजे तक, उसके बाद वणिज 22:26 बजे तक, फिर विष्टि 09:14 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:52 से 11:13) के दौरान टालें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य मकर राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक माघ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल तृतीया
पिछले दिन13:59उसी दिन11:38
शुक्ल चतुर्थी
उसी दिन11:38अगले दिन09:14
तृतीया — सामान्यतः शुभ तिथि। यात्रा और उल्लासपूर्ण अवसरों के लिए उपयुक्त।
शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
- अमान्तमाघपूर्णिमान्तमाघ
नक्षत्र · योग · करण
पूर्व भाद्रपदा · पाद 1
उसी दिन04:13अगले दिन02:32
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
परिघ
पिछले दिन15:31उसी दिन12:23
शिव
उसी दिन12:23अगले दिन09:13
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
गर
उसी दिन00:49उसी दिन11:38
वणिज
उसी दिन11:38उसी दिन22:26
विष्टि
उसी दिन22:26अगले दिन09:14
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल तृतीया · शनि
1 फ़र॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 21 मि| 07:0908:30 | ||
| 08:3009:52 | ||
| 09:5211:13 | ||
| 11:1312:34 | ||
| 12:3413:56 | ||
| 13:5615:17 | ||
| 15:1716:39 | ||
| 16:3918:00 |
रात के समय
8·1 घं 39 मि| 18:0019:39 | ||
| 19:3921:17 | ||
| 21:1722:56 | ||
| 22:5600:34 | ||
| 00:3402:13 | ||
| 02:1303:51 | ||
| 03:5105:30 | ||
| 05:3007:08 |
दिन के समय
8·1 घं 21 मि| 07:0908:30 | ||
| 08:3009:52 | ||
| 09:5211:13 | ||
| 11:1312:34 | ||
| 12:3413:56 | ||
| 13:5615:17 | ||
| 15:1716:39 | ||
| 16:3918:00 |
रात के समय
8·1 घं 39 मि| 18:0019:39 | ||
| 19:3921:17 | ||
| 21:1722:56 | ||
| 22:5600:34 | ||
| 00:3402:13 | ||
| 02:1303:51 | ||
| 03:5105:30 | ||
| 05:3007:08 |
| 05:23→06:16 | ||
| 12:13→12:56 | ||
| 19:06→20:35 | ||
| 09:52→11:13 | ||
| 13:56→15:17 | ||
| 07:09→08:30 | ||
| 10:10→11:40 |
दिन के घंटे
12·54 मि| 07:0908:03 | ||
| 08:0308:57 | ||
| 08:5709:52 | ||
| 09:5210:46 | ||
| 10:4611:40 | ||
| 11:4012:34 | ||
| 12:3413:29 | ||
| 13:2914:23 | ||
| 14:2315:17 | ||
| 15:1716:11 | ||
| 16:1117:06 | ||
| 17:0618:00 |
रात के घंटे
12·1 घं 6 मि| 18:0019:06 | ||
| 19:0620:11 | ||
| 20:1121:17 | ||
| 21:1722:23 | ||
| 22:2323:28 | ||
| 23:2800:34 | ||
| 00:3401:40 | ||
| 01:4002:45 | ||
| 02:4503:51 | ||
| 03:5104:57 | ||
| 04:5706:02 | ||
| 06:0207:08 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 1 फ़रवरी 2025 की तिथि क्या है?
- 1 फ़रवरी 2025 की तिथि शुक्ल तृतीया है।
- 1 फ़रवरी 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 1 फ़रवरी 2025 का नक्षत्र पूर्व भाद्रपदा और योग परिघ है।
- 1 फ़रवरी 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 07:09 पर तथा सूर्यास्त 18:00 पर होगा।
- 1 फ़रवरी 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 09:52–11:13 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

