मकर संक्रांति
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। पतंगबाज़ी, तिल-गुड़ की मिठाइयाँ और फसल उत्सव के साथ मनाया जाता है।
दैनिक पंचांग
आज मंगलवार है, कृष्ण पक्ष चल रहा है। आज मकर संक्रांति है। प्रतिपदा तिथि कल तड़के तक है, फिर द्वितीया शुरू होगी। प्रतिपदा नए आरंभ के लिए शुभ तिथि है। चन्द्रमा पुनर्वसु नक्षत्र में सुबह तक है, फिर पुष्य में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 12:09 से 12:51 बजे तक, और राहु काल में न करें, 15:07 से 16:26 बजे तक। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य धनु राशि में।
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। पतंगबाज़ी, तिल-गुड़ की मिठाइयाँ और फसल उत्सव के साथ मनाया जाता है।
अधिक पौष
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
कृष्ण प्रतिपदा
उसी दिन 03:56 अगले दिन 03:21 तक
प्रतिपदा — प्रथम तिथि। नए आरंभ और नींव रखने के लिए शुभ मानी जाती है।
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
पुनर्वसु
पिछले दिन 10:37 उसी दिन 10:16 तक
पुष्य
उसी दिन 10:16 अगले दिन 10:27
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
विष्कुम्भ
उसी दिन 04:38 अगले दिन 02:57 तक
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
बालव
उसी दिन 03:56 उसी दिन 15:34 तक
कौलव
उसी दिन 15:34 अगले दिन 03:21
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण प्रतिपदा · मंगल
14 जन॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 19 मि| 07:1508:33 | ||
| 08:3309:52 | ||
| 09:5211:11 | ||
| 11:1112:30 | ||
| 12:3013:49 | ||
| 13:4915:07 | ||
| 15:0716:26 | ||
| 16:2617:45 |
रात के समय
8·1 घं 41 मि| 17:4519:26 | ||
| 19:2621:07 | ||
| 21:0722:49 | ||
| 22:4900:30 | ||
| 00:3002:11 | ||
| 02:1103:52 | ||
| 03:5205:33 | ||
| 05:3307:14 |
दिन के समय
8·1 घं 19 मि| 07:1508:33 | ||
| 08:3309:52 | ||
| 09:5211:11 | ||
| 11:1112:30 | ||
| 12:3013:49 | ||
| 13:4915:07 | ||
| 15:0716:26 | ||
| 16:2617:45 |
रात के समय
8·1 घं 41 मि| 17:4519:26 | ||
| 19:2621:07 | ||
| 21:0722:49 | ||
| 22:4900:30 | ||
| 00:3002:11 | ||
| 02:1103:52 | ||
| 03:5205:33 | ||
| 05:3307:14 |
| 05:27→06:21 | ||
| 12:09→12:51 | ||
| 07:54→09:29 | ||
| 15:07→16:26 | ||
| 09:52→11:11 | ||
| 12:30→13:49 | ||
| 22:27→00:01 |
दिन के घंटे
12·53 मि| 07:1508:07 | ||
| 08:0709:00 | ||
| 09:0009:52 | ||
| 09:5210:45 | ||
| 10:4511:37 | ||
| 11:3712:30 | ||
| 12:3013:22 | ||
| 13:2214:15 | ||
| 14:1515:07 | ||
| 15:0716:00 | ||
| 16:0016:53 | ||
| 16:5317:45 |
रात के घंटे
12·1 घं 7 मि| 17:4518:53 | ||
| 18:5320:00 | ||
| 20:0021:07 | ||
| 21:0722:15 | ||
| 22:1523:22 | ||
| 23:2200:30 | ||
| 00:3001:37 | ||
| 01:3702:45 | ||
| 02:4503:52 | ||
| 03:5205:00 | ||
| 05:0006:07 | ||
| 06:0707:14 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
KundliGPT का उपयोग कैसे होता है, यह समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए हम कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति ·