मंगलवार, 4 जून 2024
दैनिक पंचांग
आज मंगलवार है। त्रयोदशी तिथि 22:01 बजे तक, फिर चतुर्दशी 19:55 (कल) बजे तक रहेगी। भरणी नक्षत्र 22:34 बजे तक, उसके बाद कृत्तिका 21:16 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शोभन 06:10 बजे तक, फिर अतिगण्ड योग 03:17 (कल) बजे तक। गर करण 11:09 बजे तक, उसके बाद वणिज 22:01 बजे तक, फिर विष्टि 08:56 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (15:47 से 17:31) के दौरान टालें। चन्द्रमा मेष राशि में है और सूर्य वृषभ राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक वैशाख
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण त्रयोदशी
उसी दिन00:18उसी दिन22:01
कृष्ण चतुर्दशी
उसी दिन22:01अगले दिन19:55
त्रयोदशी — उत्साह की तिथि। उत्सव और सक्रिय कार्यों के लिए शुभ।
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
- अमान्तवैशाखपूर्णिमान्तज्येष्ठ
नक्षत्र · योग · करण
भरणी
उसी दिन00:04उसी दिन22:34
कृत्तिका
उसी दिन22:34अगले दिन21:16
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
शोभन
पिछले दिन09:09उसी दिन06:10
अतिगण्ड
उसी दिन06:10अगले दिन03:17
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
गर
उसी दिन00:18उसी दिन11:09
वणिज
उसी दिन11:09उसी दिन22:01
विष्टि
उसी दिन22:01अगले दिन08:56
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण त्रयोदशी · मंगल
4 जून
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:2307:07 | ||
| 07:0708:51 | ||
| 08:5110:35 | ||
| 10:3512:19 | ||
| 12:1914:03 | ||
| 14:0315:47 | ||
| 15:4717:31 | ||
| 17:3119:16 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:1620:31 | ||
| 20:3121:47 | ||
| 21:4723:03 | ||
| 23:0300:19 | ||
| 00:1901:35 | ||
| 01:3502:51 | ||
| 02:5104:07 | ||
| 04:0705:23 |
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:2307:07 | ||
| 07:0708:51 | ||
| 08:5110:35 | ||
| 10:3512:19 | ||
| 12:1914:03 | ||
| 14:0315:47 | ||
| 15:4717:31 | ||
| 17:3119:16 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:1620:31 | ||
| 20:3121:47 | ||
| 21:4723:03 | ||
| 23:0300:19 | ||
| 00:1901:35 | ||
| 01:3502:51 | ||
| 02:5104:07 | ||
| 04:0705:23 |
| 04:02→04:42 | ||
| 11:51→12:47 | ||
| 18:04→19:34 | ||
| 15:47→17:31 | ||
| 08:51→10:35 | ||
| 12:19→14:03 | ||
| 09:04→10:34 |
दिन के घंटे
12·1 घं 9 मि| 05:2306:32 | ||
| 06:3207:41 | ||
| 07:4108:51 | ||
| 08:5110:00 | ||
| 10:0011:10 | ||
| 11:1012:19 | ||
| 12:1913:29 | ||
| 13:2914:38 | ||
| 14:3815:47 | ||
| 15:4716:57 | ||
| 16:5718:06 | ||
| 18:0619:16 |
रात के घंटे
12·51 मि| 19:1620:06 | ||
| 20:0620:57 | ||
| 20:5721:47 | ||
| 21:4722:38 | ||
| 22:3823:29 | ||
| 23:2900:19 | ||
| 00:1901:10 | ||
| 01:1002:00 | ||
| 02:0002:51 | ||
| 02:5103:41 | ||
| 03:4104:32 | ||
| 04:3205:23 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 4 जून 2024 की तिथि क्या है?
- 4 जून 2024 की तिथि कृष्ण त्रयोदशी है।
- 4 जून 2024 का नक्षत्र क्या है?
- 4 जून 2024 का नक्षत्र भरणी और योग शोभन है।
- 4 जून 2024 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:23 पर तथा सूर्यास्त 19:16 पर होगा।
- 4 जून 2024 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 15:47–17:31 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

