रविवार, 4 मई 2025
दैनिक पंचांग
आज रविवार है। सप्तमी तिथि 07:19 बजे तक, फिर अष्टमी 07:36 (कल) बजे तक रहेगी। पुष्य नक्षत्र 12:53 बजे तक, उसके बाद आश्लेषा 14:00 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग गण्ड 00:40 (कल) बजे तक, फिर वृद्धि योग 00:18 (कल) बजे तक। वणिज करण 07:19 बजे तक, उसके बाद विष्टि 19:21 बजे तक, फिर बव 07:36 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (17:18 से 18:58) के दौरान टालें। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक वैशाख
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल सप्तमी
पिछले दिन07:52उसी दिन07:19
शुक्ल अष्टमी
उसी दिन07:19अगले दिन07:36
सप्तमी — सामान्यतः सहज और संतुलित तिथि। नियमित कार्यों और यात्रा के लिए शुभ।
रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
- अमान्तवैशाखपूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
पुष्य
पिछले दिन12:33उसी दिन12:53
आश्लेषा
उसी दिन12:53अगले दिन14:00
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
गण्ड
उसी दिन01:39अगले दिन00:40
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
वणिज
पिछले दिन19:29उसी दिन07:19
विष्टि
उसी दिन07:19उसी दिन19:21
बव
उसी दिन19:21अगले दिन07:36
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल सप्तमी · रवि
4 मई
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:3807:18 | ||
| 07:1808:58 | ||
| 08:5810:38 | ||
| 10:3812:18 | ||
| 12:1813:58 | ||
| 13:5815:38 | ||
| 15:3817:18 | ||
| 17:1818:58 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 18:5820:18 | ||
| 20:1821:37 | ||
| 21:3722:57 | ||
| 22:5700:17 | ||
| 00:1701:37 | ||
| 01:3702:57 | ||
| 02:5704:17 | ||
| 04:1705:37 |
दिन के समय
8·1 घं 40 मि| 05:3807:18 | ||
| 07:1808:58 | ||
| 08:5810:38 | ||
| 10:3812:18 | ||
| 12:1813:58 | ||
| 13:5815:38 | ||
| 15:3817:18 | ||
| 17:1818:58 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 18:5820:18 | ||
| 20:1821:37 | ||
| 21:3722:57 | ||
| 22:5700:17 | ||
| 00:1701:37 | ||
| 01:3702:57 | ||
| 02:5704:17 | ||
| 04:1705:37 |
| 04:12→04:55 | ||
| 11:51→12:44 | ||
| 06:23→08:01 | ||
| 17:18→18:58 | ||
| 12:18→13:58 | ||
| 15:38→17:18 | ||
| 20:40→22:17 |
दिन के घंटे
12·1 घं 7 मि| 05:3806:44 | ||
| 06:4407:51 | ||
| 07:5108:58 | ||
| 08:5810:04 | ||
| 10:0411:11 | ||
| 11:1112:18 | ||
| 12:1813:24 | ||
| 13:2414:31 | ||
| 14:3115:38 | ||
| 15:3816:44 | ||
| 16:4417:51 | ||
| 17:5118:58 |
रात के घंटे
12·53 मि| 18:5819:51 | ||
| 19:5120:44 | ||
| 20:4421:37 | ||
| 21:3722:31 | ||
| 22:3123:24 | ||
| 23:2400:17 | ||
| 00:1701:10 | ||
| 01:1002:04 | ||
| 02:0402:57 | ||
| 02:5703:50 | ||
| 03:5004:43 | ||
| 04:4305:37 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 4 मई 2025 की तिथि क्या है?
- 4 मई 2025 की तिथि शुक्ल सप्तमी है।
- 4 मई 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 4 मई 2025 का नक्षत्र पुष्य और योग गण्ड है।
- 4 मई 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:38 पर तथा सूर्यास्त 18:58 पर होगा।
- 4 मई 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 17:18–18:58 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

