शनिवार, 16 अक्टूबर 2027
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है। प्रतिपदा तिथि 19:13 बजे तक, फिर द्वितीया 18:43 (कल) बजे तक रहेगी। अश्विनी नक्षत्र 23:58 बजे तक, उसके बाद भरणी 00:03 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग हर्षण 14:28 बजे तक, फिर वज्र योग 13:01 (कल) बजे तक। बालव करण 07:18 बजे तक, उसके बाद कौलव 19:13 बजे तक, फिर तैतिल 07:01 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:14 से 10:40) के दौरान टालें। चन्द्रमा मेष राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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कृष्ण प्रतिपदा
पिछले दिन 19:16 उसी दिन 19:13
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कृष्ण द्वितीया
उसी दिन 19:13 अगले दिन 18:43
प्रतिपदा — प्रथम तिथि। नए आरंभ और नींव रखने के लिए शुभ मानी जाती है।
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शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
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आश्विन · कार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
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अश्विनी
पिछले दिन 23:28 उसी दिन 23:58
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भरणी
उसी दिन 23:58 अगले दिन 00:03
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
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हर्षण
पिछले दिन 15:33 उसी दिन 14:28
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वज्र
उसी दिन 14:28 अगले दिन 13:01
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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बालव
पिछले दिन 19:16 उसी दिन 07:18
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कौलव
उसी दिन 07:18 उसी दिन 19:13
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तैतिल
उसी दिन 19:13 अगले दिन 07:01
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण प्रतिपदा · शनि
16 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 26 मि| 06:22 07:48 | ||
| 07:48 09:14 | ||
| 09:14 10:40 | ||
| 10:40 12:06 | ||
| 12:06 13:32 | ||
| 13:32 14:58 | ||
| 14:58 16:24 | ||
| 16:24 17:50 |
रात के समय
8 · 1 घं 34 मि| 17:50 19:24 | ||
| 19:24 20:58 | ||
| 20:58 22:32 | ||
| 22:32 00:06 | ||
| 00:06 01:40 | ||
| 01:40 03:14 | ||
| 03:14 04:48 | ||
| 04:48 06:22 |
दिन के समय
8 · 1 घं 26 मि| 06:22 07:48 | ||
| 07:48 09:14 | ||
| 09:14 10:40 | ||
| 10:40 12:06 | ||
| 12:06 13:32 | ||
| 13:32 14:58 | ||
| 14:58 16:24 | ||
| 16:24 17:50 |
रात के समय
8 · 1 घं 34 मि| 17:50 19:24 | ||
| 19:24 20:58 | ||
| 20:58 22:32 | ||
| 22:32 00:06 | ||
| 00:06 01:40 | ||
| 01:40 03:14 | ||
| 03:14 04:48 | ||
| 04:48 06:22 |
| 04:42 → 05:32 | ||
| 11:43 → 12:29 | ||
| 16:37 → 18:15 | ||
| 09:14 → 10:40 | ||
| 13:32 → 14:58 | ||
| 06:22 → 07:48 | ||
| 19:53 → 21:31 |
दिन के घंटे
12 · 57 मि| 06:22 07:19 | ||
| 07:19 08:17 | ||
| 08:17 09:14 | ||
| 09:14 10:11 | ||
| 10:11 11:09 | ||
| 11:09 12:06 | ||
| 12:06 13:04 | ||
| 13:04 14:01 | ||
| 14:01 14:58 | ||
| 14:58 15:56 | ||
| 15:56 16:53 | ||
| 16:53 17:50 |
रात के घंटे
12 · 1 घं 3 मि| 17:50 18:53 | ||
| 18:53 19:56 | ||
| 19:56 20:58 | ||
| 20:58 22:01 | ||
| 22:01 23:04 | ||
| 23:04 00:06 | ||
| 00:06 01:09 | ||
| 01:09 02:12 | ||
| 02:12 03:14 | ||
| 03:14 04:17 | ||
| 04:17 05:20 | ||
| 05:20 06:22 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 16 अक्टूबर 2027 की तिथि क्या है?
- 16 अक्टूबर 2027 की तिथि कृष्ण प्रतिपदा है।
- 16 अक्टूबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 16 अक्टूबर 2027 का नक्षत्र अश्विनी और योग हर्षण है।
- 16 अक्टूबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:22 पर तथा सूर्यास्त 17:50 पर होगा।
- 16 अक्टूबर 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 09:14–10:40 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।