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Kundli GPT

शनिवार, 4 सितंबर 2027

दैनिक पंचांग

शुभ दिन

आज शनिवार है। चतुर्थी तिथि 12:26 बजे तक, फिर पंचमी 11:17 (कल) बजे तक रहेगी। चित्रा नक्षत्र 14:48 बजे तक, उसके बाद स्वाति 14:29 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शुक्ल 08:12 बजे तक, फिर ब्रह्म योग 06:05 (कल) बजे तक। विष्टि करण 12:26 बजे तक, उसके बाद बव 23:46 बजे तक, फिर बालव 11:17 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:10 से 10:45) के दौरान टालें। चन्द्रमा तुला राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल चतुर्थी

      पिछले दिन 14:19 उसी दिन 12:26

    • शुक्ल पंचमी

      उसी दिन 12:26 अगले दिन 11:17

    चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।

  • शनिवार

    शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।

  • भाद्रपद · आश्विन

नक्षत्र · योग · करण

    • चित्रा

      पिछले दिन 15:53 उसी दिन 14:48

    • स्वाति

      उसी दिन 14:48 अगले दिन 14:29

    मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।

    • शुक्ल

      पिछले दिन 10:55 उसी दिन 08:12

    • ब्रह्म

      उसी दिन 08:12 अगले दिन 06:05

    शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।

    • विष्टि

      उसी दिन 01:17 उसी दिन 12:26

    • बव

      उसी दिन 12:26 उसी दिन 23:46

    • बालव

      उसी दिन 23:46 अगले दिन 11:17

    विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।

एक नज़र में दिन

उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल चतुर्थी · शनि

00 06 12 18 काल · 06:00 – 07:35 शुभ · 07:35 – 09:10 रोग · 09:10 – 10:45 उद्वेग · 10:45 – 12:20 चल · 12:20 – 13:55 लाभ · 13:55 – 15:29 अमृत · 15:29 – 17:04 काल · 17:04 – 18:39 काल · 18:39 – 20:04 लाभ · 20:04 – 21:30 उद्वेग · 21:30 – 22:55 शुभ · 22:55 – 00:20 अमृत · 00:20 – 01:45 चल · 01:45 – 03:10 रोग · 03:10 – 04:35 काल · 04:35 – 06:01 काल · 06:00 – 07:35 चल · 07:35 – 09:10 उद्योग · 09:10 – 10:45 अमृत · 10:45 – 12:20 लाभ · 12:20 – 13:55 रोग · 13:55 – 15:29 शुभ · 15:29 – 17:04 शून्य · 17:04 – 18:39 अमृत · 18:39 – 20:04 रोग · 20:04 – 21:30 शून्य · 21:30 – 22:55 उद्योग · 22:55 – 00:20 शुभ · 00:20 – 01:45 लाभ · 01:45 – 03:10 चल · 03:10 – 04:35 काल · 04:35 – 06:01 ब्रह्म मुहूर्त · 04:29 – 05:15 अभिजित मुहूर्त · 11:54 – 12:45 अमृत काल · 08:41 – 10:13 राहु काल · 09:10 – 10:45 यमगण्ड काल · 13:55 – 15:29 गुलिक काल · 06:00 – 07:35 वर्ज्यम् · 23:31 – 01:03 शनि · 06:00 – 07:03 गुरु · 07:03 – 08:07 मंगल · 08:07 – 09:10 सूर्य · 09:10 – 10:13 शुक्र · 10:13 – 11:16 बुध · 11:16 – 12:20 चंद्र · 12:20 – 13:23 शनि · 13:23 – 14:26 गुरु · 14:26 – 15:29 मंगल · 15:29 – 16:33 सूर्य · 16:33 – 17:36 शुक्र · 17:36 – 18:39 बुध · 18:39 – 19:36 चंद्र · 19:36 – 20:33 शनि · 20:33 – 21:30 गुरु · 21:30 – 22:26 मंगल · 22:26 – 23:23 सूर्य · 23:23 – 00:20 शुक्र · 00:20 – 01:17 बुध · 01:17 – 02:13 चंद्र · 02:13 – 03:10 शनि · 03:10 – 04:07 गुरु · 04:07 – 05:04 मंगल · 05:04 – 06:01

4 सित॰

दैनिक पंचांग

दिन के समय

8 · 1 घं 35 मि
06:00
07:35
09:10
10:45
12:20
13:55
15:29
17:04

रात के समय

8 · 1 घं 25 मि
18:39
20:04
21:30
22:55
00:20
01:45
03:10
04:35

दिन के समय

8 · 1 घं 35 मि
06:00
07:35
09:10
10:45
12:20
13:55
15:29
17:04

रात के समय

8 · 1 घं 25 मि
18:39
20:04
21:30
22:55
00:20
01:45
03:10
04:35
04:29 05:15
11:54 12:45
08:41 10:13
09:10 10:45
13:55 15:29
06:00 07:35
23:31 01:03

दिन के घंटे

12 · 1 घं 3 मि
06:00
07:03
08:07
09:10
10:13
11:16
12:20
13:23
14:26
15:29
16:33
17:36

रात के घंटे

12 · 57 मि
18:39
19:36
20:33
21:30
22:26
23:23
00:20
01:17
02:13
03:10
04:07
05:04

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

4 सितंबर 2027 की तिथि क्या है?
4 सितंबर 2027 की तिथि शुक्ल चतुर्थी है।
4 सितंबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
4 सितंबर 2027 का नक्षत्र चित्रा और योग शुक्ल है।
4 सितंबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
दिल्ली में सूर्योदय 06:00 पर तथा सूर्यास्त 18:39 पर होगा।
4 सितंबर 2027 को राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल 09:10–10:45 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।