शनिवार, 27 अप्रैल 2024
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है। तृतीया तिथि 08:18 बजे तक, फिर चतुर्थी 08:22 (कल) बजे तक रहेगी। ज्येष्ठा नक्षत्र 04:27 (कल) बजे तक, उसके बाद मूल 04:48 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग परिघ 03:22 (कल) बजे तक, फिर शिव योग 02:04 (कल) बजे तक। विष्टि करण 08:18 बजे तक, उसके बाद बव 20:23 बजे तक, फिर बालव 08:22 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:01 से 10:40) के दौरान टालें। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
-
-
कृष्ण तृतीया
पिछले दिन 07:46 उसी दिन 08:18
-
कृष्ण चतुर्थी
उसी दिन 08:18 अगले दिन 08:22
तृतीया — सामान्यतः शुभ तिथि। यात्रा और उल्लासपूर्ण अवसरों के लिए उपयुक्त।
-
-
शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
-
वैशाख · ज्येष्ठ
नक्षत्र · योग · करण
-
-
ज्येष्ठा · पाद 1
उसी दिन 03:39 अगले दिन 04:27
तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।
-
-
-
परिघ
उसी दिन 04:18 अगले दिन 03:22
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
-
-
-
विष्टि
पिछले दिन 20:06 उसी दिन 08:18
-
बव
उसी दिन 08:18 उसी दिन 20:23
-
बालव
उसी दिन 20:23 अगले दिन 08:22
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
-
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण तृतीया · शनि
27 अप्रैल
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 39 मि| 05:43 07:22 | ||
| 07:22 09:01 | ||
| 09:01 10:40 | ||
| 10:40 12:18 | ||
| 12:18 13:57 | ||
| 13:57 15:36 | ||
| 15:36 17:15 | ||
| 17:15 18:54 |
रात के समय
8 · 1 घं 21 मि| 18:54 20:15 | ||
| 20:15 21:36 | ||
| 21:36 22:57 | ||
| 22:57 00:18 | ||
| 00:18 01:39 | ||
| 01:39 03:00 | ||
| 03:00 04:21 | ||
| 04:21 05:42 |
दिन के समय
8 · 1 घं 39 मि| 05:43 07:22 | ||
| 07:22 09:01 | ||
| 09:01 10:40 | ||
| 10:40 12:18 | ||
| 12:18 13:57 | ||
| 13:57 15:36 | ||
| 15:36 17:15 | ||
| 17:15 18:54 |
रात के समय
8 · 1 घं 21 मि| 18:54 20:15 | ||
| 20:15 21:36 | ||
| 21:36 22:57 | ||
| 22:57 00:18 | ||
| 00:18 01:39 | ||
| 01:39 03:00 | ||
| 03:00 04:21 | ||
| 04:21 05:42 |
| 04:17 → 05:00 | ||
| 11:52 → 12:45 | ||
| 19:22 → 21:01 | ||
| 09:01 → 10:40 | ||
| 13:57 → 15:36 | ||
| 05:43 → 07:22 | ||
| 09:26 → 11:05 |
दिन के घंटे
12 · 1 घं 6 मि| 05:43 06:49 | ||
| 06:49 07:55 | ||
| 07:55 09:01 | ||
| 09:01 10:07 | ||
| 10:07 11:13 | ||
| 11:13 12:18 | ||
| 12:18 13:24 | ||
| 13:24 14:30 | ||
| 14:30 15:36 | ||
| 15:36 16:42 | ||
| 16:42 17:48 | ||
| 17:48 18:54 |
रात के घंटे
12 · 54 मि| 18:54 19:48 | ||
| 19:48 20:42 | ||
| 20:42 21:36 | ||
| 21:36 22:30 | ||
| 22:30 23:24 | ||
| 23:24 00:18 | ||
| 00:18 01:12 | ||
| 01:12 02:06 | ||
| 02:06 03:00 | ||
| 03:00 03:54 | ||
| 03:54 04:48 | ||
| 04:48 05:42 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 27 अप्रैल 2024 की तिथि क्या है?
- 27 अप्रैल 2024 की तिथि कृष्ण तृतीया है।
- 27 अप्रैल 2024 का नक्षत्र क्या है?
- 27 अप्रैल 2024 का नक्षत्र ज्येष्ठा और योग परिघ है।
- 27 अप्रैल 2024 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:43 पर तथा सूर्यास्त 18:54 पर होगा।
- 27 अप्रैल 2024 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 09:01–10:40 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।