सोमवार, 18 अगस्त 2025
दैनिक पंचांग
आज सोमवार है। दशमी तिथि 17:22 बजे तक, फिर एकादशी 15:33 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र 02:05 (कल) बजे तक, उसके बाद आर्द्रा 01:07 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग हर्षण 22:58 बजे तक, फिर वज्र योग 20:28 (कल) बजे तक। वणिज करण 06:22 बजे तक, उसके बाद विष्टि 17:22 बजे तक, फिर बव 04:26 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (07:30 से 09:08) के दौरान टालें। चन्द्रमा वृषभ राशि में है और सूर्य सिंह राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक श्रावण
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण दशमी
पिछले दिन19:24उसी दिन17:22
अजा एकादशी
उसी दिन17:22अगले दिन15:33
दशमी — स्थिर और भरोसेमंद तिथि। अधिकांश कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है।
सोमवार
सोमवार — चंद्र द्वारा शासित। शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
- अमान्तश्रावणपूर्णिमान्तभाद्रपद
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा · पाद 1
उसी दिन03:17अगले दिन02:05
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
हर्षण
उसी दिन01:39उसी दिन22:58
वज्र
उसी दिन22:58अगले दिन20:28
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
वणिज
पिछले दिन19:24उसी दिन06:22
विष्टि
उसी दिन06:22उसी दिन17:22
बव
उसी दिन17:22अगले दिन04:26
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण दशमी · सोम
18 अग॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 38 मि| 05:5207:30 | ||
| 07:3009:08 | ||
| 09:0810:46 | ||
| 10:4612:24 | ||
| 12:2414:03 | ||
| 14:0315:41 | ||
| 15:4117:19 | ||
| 17:1918:57 |
रात के समय
8·1 घं 22 मि| 18:5720:19 | ||
| 20:1921:41 | ||
| 21:4123:03 | ||
| 23:0300:25 | ||
| 00:2501:46 | ||
| 01:4603:08 | ||
| 03:0804:30 | ||
| 04:3005:52 |
दिन के समय
8·1 घं 38 मि| 05:5207:30 | ||
| 07:3009:08 | ||
| 09:0810:46 | ||
| 10:4612:24 | ||
| 12:2414:03 | ||
| 14:0315:41 | ||
| 15:4117:19 | ||
| 17:1918:57 |
रात के समय
8·1 घं 22 मि| 18:5720:19 | ||
| 20:1921:41 | ||
| 21:4123:03 | ||
| 23:0300:25 | ||
| 00:2501:46 | ||
| 01:4603:08 | ||
| 03:0804:30 | ||
| 04:3005:52 |
| 04:24→05:08 | ||
| 11:58→12:50 | ||
| 17:43→19:14 | ||
| 07:30→09:08 | ||
| 10:46→12:24 | ||
| 14:03→15:41 | ||
| 08:36→10:07 |
दिन के घंटे
12·1 घं 5 मि| 05:5206:57 | ||
| 06:5708:02 | ||
| 08:0209:08 | ||
| 09:0810:13 | ||
| 10:1311:19 | ||
| 11:1912:24 | ||
| 12:2413:30 | ||
| 13:3014:35 | ||
| 14:3515:41 | ||
| 15:4116:46 | ||
| 16:4617:52 | ||
| 17:5218:57 |
रात के घंटे
12·55 मि| 18:5719:52 | ||
| 19:5220:46 | ||
| 20:4621:41 | ||
| 21:4122:35 | ||
| 22:3523:30 | ||
| 23:3000:25 | ||
| 00:2501:19 | ||
| 01:1902:14 | ||
| 02:1403:08 | ||
| 03:0804:03 | ||
| 04:0304:58 | ||
| 04:5805:52 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 18 अगस्त 2025 की तिथि क्या है?
- 18 अगस्त 2025 की तिथि कृष्ण दशमी है।
- 18 अगस्त 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 18 अगस्त 2025 का नक्षत्र मृगशिरा और योग हर्षण है।
- 18 अगस्त 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:52 पर तथा सूर्यास्त 18:57 पर होगा।
- 18 अगस्त 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 07:30–09:08 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

