सोमवार, 2 जून 2025
दैनिक पंचांग
आज सोमवार है। सप्तमी तिथि 20:35 बजे तक, फिर अष्टमी 21:56 (कल) बजे तक रहेगी। मघा नक्षत्र 22:55 बजे तक, उसके बाद पूर्व फाल्गुनी 00:58 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग व्याघात 08:19 बजे तक, फिर हर्षण योग 08:07 (कल) बजे तक। गर करण 08:11 बजे तक, उसके बाद वणिज 20:35 बजे तक, फिर विष्टि 09:10 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (07:07 से 08:51) के दौरान टालें। चन्द्रमा सिंह राशि में है और सूर्य वृषभ राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक ज्येष्ठ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल सप्तमी
पिछले दिन20:00उसी दिन20:35
शुक्ल अष्टमी
उसी दिन20:35अगले दिन21:56
सप्तमी — सामान्यतः सहज और संतुलित तिथि। नियमित कार्यों और यात्रा के लिए शुभ।
सोमवार
सोमवार — चंद्र द्वारा शासित। शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
- अमान्तज्येष्ठपूर्णिमान्तज्येष्ठ
नक्षत्र · योग · करण
मघा
पिछले दिन21:36उसी दिन22:55
पूर्व फाल्गुनी
उसी दिन22:55अगले दिन00:58
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
व्याघात
पिछले दिन09:10उसी दिन08:19
हर्षण
उसी दिन08:19अगले दिन08:07
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
गर
पिछले दिन20:00उसी दिन08:11
वणिज
उसी दिन08:11उसी दिन20:35
विष्टि
उसी दिन20:35अगले दिन09:10
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल सप्तमी · सोम
2 जून
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:2307:07 | ||
| 07:0708:51 | ||
| 08:5110:35 | ||
| 10:3512:19 | ||
| 12:1914:03 | ||
| 14:0315:47 | ||
| 15:4717:31 | ||
| 17:3119:15 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:1520:31 | ||
| 20:3121:47 | ||
| 21:4723:03 | ||
| 23:0300:19 | ||
| 00:1901:35 | ||
| 01:3502:51 | ||
| 02:5104:07 | ||
| 04:0705:23 |
दिन के समय
8·1 घं 44 मि| 05:2307:07 | ||
| 07:0708:51 | ||
| 08:5110:35 | ||
| 10:3512:19 | ||
| 12:1914:03 | ||
| 14:0315:47 | ||
| 15:4717:31 | ||
| 17:3119:15 |
रात के समय
8·1 घं 16 मि| 19:1520:31 | ||
| 20:3121:47 | ||
| 21:4723:03 | ||
| 23:0300:19 | ||
| 00:1901:35 | ||
| 01:3502:51 | ||
| 02:5104:07 | ||
| 04:0705:23 |
| 04:02→04:42 | ||
| 11:51→12:46 | ||
| 20:23→22:04 | ||
| 07:07→08:51 | ||
| 10:35→12:19 | ||
| 14:03→15:47 | ||
| 10:15→11:56 |
दिन के घंटे
12·1 घं 9 मि| 05:2306:32 | ||
| 06:3207:42 | ||
| 07:4208:51 | ||
| 08:5110:00 | ||
| 10:0011:09 | ||
| 11:0912:19 | ||
| 12:1913:28 | ||
| 13:2814:37 | ||
| 14:3715:47 | ||
| 15:4716:56 | ||
| 16:5618:05 | ||
| 18:0519:15 |
रात के घंटे
12·51 मि| 19:1520:05 | ||
| 20:0520:56 | ||
| 20:5621:47 | ||
| 21:4722:37 | ||
| 22:3723:28 | ||
| 23:2800:19 | ||
| 00:1901:09 | ||
| 01:0902:00 | ||
| 02:0002:51 | ||
| 02:5103:41 | ||
| 03:4104:32 | ||
| 04:3205:23 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 2 जून 2025 की तिथि क्या है?
- 2 जून 2025 की तिथि शुक्ल सप्तमी है।
- 2 जून 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 2 जून 2025 का नक्षत्र मघा और योग व्याघात है।
- 2 जून 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:23 पर तथा सूर्यास्त 19:15 पर होगा।
- 2 जून 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 07:07–08:51 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

