बुधवार, 25 जून 2025
दैनिक पंचांग
आज बुधवार है। अमावस्या तिथि 16:01 बजे तक, फिर प्रतिपदा 13:24 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र 10:40 बजे तक, उसके बाद आर्द्रा 08:46 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग गण्ड 05:59 बजे तक, फिर वृद्धि योग 02:38 (कल) बजे तक। चतुष्पाद करण 05:28 बजे तक, उसके बाद नाग 16:01 बजे तक, फिर किंस्तुघ्न 02:39 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (12:23 से 14:08) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य मिथुन राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक ज्येष्ठ
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
अमावस्या
पिछले दिन18:59उसी दिन16:01
शुक्ल प्रतिपदा
उसी दिन16:01अगले दिन13:24
पूर्णिमा अथवा अमावस्या — पूर्ण या नव चंद्र की तिथि। भक्ति, समापन और संकल्प के लिए विशेष ऊर्जावान दिन।
बुधवार
बुधवार — बुध द्वारा शासित। संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
- अमान्तज्येष्ठपूर्णिमान्तआषाढ़
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा
पिछले दिन12:53उसी दिन10:40
आर्द्रा
उसी दिन10:40अगले दिन08:46
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
गण्ड
पिछले दिन09:34उसी दिन05:59
वृद्धि
उसी दिन05:59अगले दिन02:38
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
चतुष्पाद
पिछले दिन18:59उसी दिन05:28
नाग
उसी दिन05:28उसी दिन16:01
किंस्तुघ्न
उसी दिन16:01अगले दिन02:39
स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
अमावस्या · बुध
25 जून
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 45 मि| 05:2407:09 | ||
| 07:0908:54 | ||
| 08:5410:39 | ||
| 10:3912:23 | ||
| 12:2314:08 | ||
| 14:0815:53 | ||
| 15:5317:37 | ||
| 17:3719:22 |
रात के समय
8·1 घं 15 मि| 19:2220:37 | ||
| 20:3721:53 | ||
| 21:5323:08 | ||
| 23:0800:23 | ||
| 00:2301:39 | ||
| 01:3902:54 | ||
| 02:5404:09 | ||
| 04:0905:25 |
दिन के समय
8·1 घं 45 मि| 05:2407:09 | ||
| 07:0908:54 | ||
| 08:5410:39 | ||
| 10:3912:23 | ||
| 12:2314:08 | ||
| 14:0815:53 | ||
| 15:5317:37 | ||
| 17:3719:22 |
रात के समय
8·1 घं 15 मि| 19:2220:37 | ||
| 20:3721:53 | ||
| 21:5323:08 | ||
| 23:0800:23 | ||
| 00:2301:39 | ||
| 01:3902:54 | ||
| 02:5404:09 | ||
| 04:0905:25 |
| 04:04→04:44 | ||
| 02:41→04:08 | ||
| 12:23→14:08 | ||
| 07:09→08:54 | ||
| 10:39→12:23 | ||
| 17:58→19:25 |
दिन के घंटे
12·1 घं 10 मि| 05:2406:34 | ||
| 06:3407:44 | ||
| 07:4408:54 | ||
| 08:5410:04 | ||
| 10:0411:14 | ||
| 11:1412:23 | ||
| 12:2313:33 | ||
| 13:3314:43 | ||
| 14:4315:53 | ||
| 15:5317:03 | ||
| 17:0318:12 | ||
| 18:1219:22 |
रात के घंटे
12·50 मि| 19:2220:12 | ||
| 20:1221:03 | ||
| 21:0321:53 | ||
| 21:5322:43 | ||
| 22:4323:33 | ||
| 23:3300:23 | ||
| 00:2301:14 | ||
| 01:1402:04 | ||
| 02:0402:54 | ||
| 02:5403:44 | ||
| 03:4404:35 | ||
| 04:3505:25 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 25 जून 2025 की तिथि क्या है?
- 25 जून 2025 की तिथि अमावस्या है।
- 25 जून 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 25 जून 2025 का नक्षत्र मृगशिरा और योग गण्ड है।
- 25 जून 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:24 पर तथा सूर्यास्त 19:22 पर होगा।
- 25 जून 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 12:23–14:08 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

