आज सोमवार है, शुक्ल पक्ष चल रहा है। आज होली है। पूर्णिमा तिथि शाम तक है, फिर प्रतिपदा शुरू होगी। पूर्णिमा पूर्ण चंद्र की तिथि है, भक्ति और काम पूरे करने का दिन। चन्द्रमा उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में रात तक है, फिर हस्त में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 12:04 से 12:52 बजे तक, और राहु काल में न करें, 07:54 से 09:25 बजे तक। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य मीन राशि में।
रंगों का त्योहार, वसंत के आगमन और बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव। लोग एक-दूसरे पर रंग लगाते हैं, गीत-संगीत और मेल-मिलाप करते हैं।
इस दिन के अन्य पर्व
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धुलंडी
उत्तर भारतगुजरातअन्य नाम: धुलेटी · रंगवाली होली
होलिका दहन के अगले दिन की सुबह, जब रंग और पानी खेला जाता है: उत्तर भारत में धुलंडी, गुजरात में धुलेटी — जिसे अधिकांश लोग बस होली कहते हैं।
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पुरुषोत्तम मास
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अधिक फाल्गुन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
तिथिहिन्दू पंचांग का चान्द्र दिवस — सूर्य और चंद्र के बीच की दूरी से मापा जाता है। पर्व ग्रेगोरियन तिथि के बजाय किसी विशेष तिथि (एकादशी, पूर्णिमा…) पर पड़ते हैं।शब्दावली में और जानें
पूर्णिमा
पिछले दिन18:21उसी दिन16:13तक
फिर
कृष्ण प्रतिपदा
उसी दिन16:13→अगले दिन14:28
पूर्णिमा अथवा अमावस्या — पूर्ण या नव चंद्र की तिथि। भक्ति, समापन और संकल्प के लिए विशेष ऊर्जावान दिन।
वारसप्ताह का दिन, जिसका शासक सात पारंपरिक ग्रहों में से एक होता है — रवि/सूर्य, सोम/चंद्र, और इसी क्रम में। प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का स्वभाव वहन करता है।शब्दावली में और जानें
सोमवार
सोमवार — चंद्र द्वारा शासित। शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
चान्द्र मासहिन्दू चान्द्र पंचांग का मास। दो परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — अमान्त अमावस्या से, पूर्णिमान्त पूर्णिमा से आरंभ होती है — इसलिए क्षेत्र अनुसार एक ही मास के दो नाम होते हैं।शब्दावली में और जानें
अमान्तफाल्गुन
पूर्णिमान्तफाल्गुन
नक्षत्र · योग · करण
नक्षत्रवर्तमान में जिस नक्षत्र में चंद्र स्थित है, वह नक्षत्र। आकाश को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है; प्रत्येक के अपने गुण होते हैं जो जन्म-कुंडली और शुभ मुहूर्त चुनने में उपयोग होते हैं।शब्दावली में और जानें
उत्तर फाल्गुनी
पिछले दिन22:06उसी दिन20:45तक
फिर
हस्त
उसी दिन20:45→अगले दिन19:49
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
योगसूर्य-चंद्र का एक संयोग, जो दिन के स्वभाव को रंग देता है। 27 योगों में से लगभग आधे शुभ माने जाते हैं, शेष में संयम अपेक्षित है।शब्दावली में और जानें
गण्ड
पिछले दिन16:57उसी दिन14:02तक
फिर
वृद्धि
उसी दिन14:02→अगले दिन11:26
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
करणतिथि का आधा भाग — हर चान्द्र दिवस में क्रमशः दो करण होते हैं। तिथि से अधिक सूक्ष्म समय-गणना के लिए उपयोगी।शब्दावली में और जानें
बव
उसी दिन05:15उसी दिन16:13तक
फिर
बालव
उसी दिन16:13→अगले दिन03:17
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
चौघड़ियाउत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।शब्दावली में और जानें
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
गौरी पंचांगम्दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।शब्दावली में और जानें
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
शुभ व अशुभदिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।शब्दावली में और जानें
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
होरादिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।शब्दावली में और जानें
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
पूर्णिमा · सोम
22 मार्च
दैनिक पंचांग
शुभमिला-जुलाबचें
☀️
दिन के समय
8·1 घं 31 मि
अमृतअमृत — सर्वोत्तम चौघड़िया। किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए श्रेष्ठ।शब्दावली में और जानें