आज रविवार है, शुक्ल पक्ष चल रहा है। आज होलिका दहन है। चतुर्दशी तिथि शाम तक है, फिर पूर्णिमा शुरू होगी। चतुर्दशी तीव्र तिथि है। बड़े निर्णय सोच-समझकर लें। चन्द्रमा पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रात तक है, फिर उत्तर फाल्गुनी में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 12:04 से 12:52 बजे तक, और राहु काल में न करें, 17:01 से 18:32 बजे तक। चन्द्रमा सिंह राशि में है और सूर्य मीन राशि में।
होलिका प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद, पूर्णिमा रहते और भद्रा बीतने पर जलाई जाती है। रंग अगली सुबह खेले जाते हैं।
होली से एक शाम पहले का दहन — फाल्गुन पूर्णिमा के प्रदोष काल में, भद्रा बीत जाने पर अग्नि प्रज्वलित की जाती है। यह वर्ष भर के द्वेष को जलाने और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की स्मृति है।
इस दिन के अन्य पर्व
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छोटी होली
उत्तर भारत
होलिका दहन की संध्या को उत्तर भारत में छोटी होली कहा जाता है: सूर्यास्त के बाद होलिका जलती है और अगली सुबह रंग खेले जाते हैं।
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पुरुषोत्तम मास
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अधिक फाल्गुन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
तिथिहिन्दू पंचांग का चान्द्र दिवस — सूर्य और चंद्र के बीच की दूरी से मापा जाता है। पर्व ग्रेगोरियन तिथि के बजाय किसी विशेष तिथि (एकादशी, पूर्णिमा…) पर पड़ते हैं।शब्दावली में और जानें
शुक्ल चतुर्दशी
पिछले दिन20:45उसी दिन18:21तक
फिर
पूर्णिमा
उसी दिन18:21→अगले दिन16:13
चतुर्दशी — तीव्र और परिवर्तनकारी तिथि। बड़े निर्णय सावधानी से लेने चाहिए।
वारसप्ताह का दिन, जिसका शासक सात पारंपरिक ग्रहों में से एक होता है — रवि/सूर्य, सोम/चंद्र, और इसी क्रम में। प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का स्वभाव वहन करता है।शब्दावली में और जानें
रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
चान्द्र मासहिन्दू चान्द्र पंचांग का मास। दो परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — अमान्त अमावस्या से, पूर्णिमान्त पूर्णिमा से आरंभ होती है — इसलिए क्षेत्र अनुसार एक ही मास के दो नाम होते हैं।शब्दावली में और जानें
अमान्तफाल्गुन
पूर्णिमान्तफाल्गुन
नक्षत्र · योग · करण
नक्षत्रवर्तमान में जिस नक्षत्र में चंद्र स्थित है, वह नक्षत्र। आकाश को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है; प्रत्येक के अपने गुण होते हैं जो जन्म-कुंडली और शुभ मुहूर्त चुनने में उपयोग होते हैं।शब्दावली में और जानें
पूर्व फाल्गुनी
पिछले दिन23:44उसी दिन22:06तक
फिर
उत्तर फाल्गुनी
उसी दिन22:06→अगले दिन20:45
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
योगसूर्य-चंद्र का एक संयोग, जो दिन के स्वभाव को रंग देता है। 27 योगों में से लगभग आधे शुभ माने जाते हैं, शेष में संयम अपेक्षित है।शब्दावली में और जानें
शूल
पिछले दिन20:04उसी दिन16:57तक
फिर
गण्ड
उसी दिन16:57→अगले दिन14:02
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
करणतिथि का आधा भाग — हर चान्द्र दिवस में क्रमशः दो करण होते हैं। तिथि से अधिक सूक्ष्म समय-गणना के लिए उपयोगी।शब्दावली में और जानें
गर
पिछले दिन20:45उसी दिन07:32तक
फिर
वणिज
उसी दिन07:32→उसी दिन18:21
फिर
विष्टि
उसी दिन18:21→अगले दिन05:15
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
चौघड़ियाउत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।शब्दावली में और जानें
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
गौरी पंचांगम्दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।शब्दावली में और जानें
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
शुभ व अशुभदिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।शब्दावली में और जानें
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
होरादिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।शब्दावली में और जानें
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।