शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
दैनिक पंचांग
आज शुक्रवार है। दशमी तिथि 07:16 बजे तक, फिर एकादशी 06:31 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र 06:56 बजे तक, उसके बाद उत्तर भाद्रपदा 06:50 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग वज्र 04:54 (कल) बजे तक, फिर सिद्धि योग 02:29 (कल) बजे तक। गर करण 07:16 बजे तक, उसके बाद वणिज 19:00 बजे तक, फिर विष्टि 06:31 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (10:46 से 12:06) के दौरान टालें। चन्द्रमा मीन राशि में है और सूर्य वृश्चिक राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक कार्तिक
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल दशमी
पिछले दिन07:06उसी दिन07:16
देवउठनी एकादशी
उसी दिन07:16अगले दिन06:31
दशमी — स्थिर और भरोसेमंद तिथि। अधिकांश कार्यों के लिए शुभ मानी जाती है।
शुक्रवार
शुक्रवार — शुक्र द्वारा शासित। सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
- अमान्तकार्तिकपूर्णिमान्तकार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
पूर्व भाद्रपदा
पिछले दिन06:09उसी दिन06:56
उत्तर भाद्रपदा
उसी दिन06:56अगले दिन06:50
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
वज्र
उसी दिन06:38अगले दिन04:54
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
गर
पिछले दिन19:17उसी दिन07:16
वणिज
उसी दिन07:16उसी दिन19:00
विष्टि
उसी दिन19:00अगले दिन06:31
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल दशमी · शुक्र
20 नव॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 20 मि| 06:4708:07 | ||
| 08:0709:27 | ||
| 09:2710:46 | ||
| 10:4612:06 | ||
| 12:0613:26 | ||
| 13:2614:46 | ||
| 14:4616:05 | ||
| 16:0517:25 |
रात के समय
8·1 घं 40 मि| 17:2519:06 | ||
| 19:0620:46 | ||
| 20:4622:26 | ||
| 22:2600:07 | ||
| 00:0701:47 | ||
| 01:4703:27 | ||
| 03:2705:07 | ||
| 05:0706:48 |
दिन के समय
8·1 घं 20 मि| 06:4708:07 | ||
| 08:0709:27 | ||
| 09:2710:46 | ||
| 10:4612:06 | ||
| 12:0613:26 | ||
| 13:2614:46 | ||
| 14:4616:05 | ||
| 16:0517:25 |
रात के समय
8·1 घं 40 मि| 17:2519:06 | ||
| 19:0620:46 | ||
| 20:4622:26 | ||
| 22:2600:07 | ||
| 00:0701:47 | ||
| 01:4703:27 | ||
| 03:2705:07 | ||
| 05:0706:48 |
| 05:00→05:54 | ||
| 11:45→12:27 | ||
| 22:40→00:19 | ||
| 10:46→12:06 | ||
| 14:46→16:05 | ||
| 08:07→09:27 | ||
| 12:46→14:25 |
दिन के घंटे
12·53 मि| 06:4707:40 | ||
| 07:4008:33 | ||
| 08:3309:27 | ||
| 09:2710:20 | ||
| 10:2011:13 | ||
| 11:1312:06 | ||
| 12:0612:59 | ||
| 12:5913:52 | ||
| 13:5214:46 | ||
| 14:4615:39 | ||
| 15:3916:32 | ||
| 16:3217:25 |
रात के घंटे
12·1 घं 7 मि| 17:2518:32 | ||
| 18:3219:39 | ||
| 19:3920:46 | ||
| 20:4621:53 | ||
| 21:5323:00 | ||
| 23:0000:07 | ||
| 00:0701:13 | ||
| 01:1302:20 | ||
| 02:2003:27 | ||
| 03:2704:34 | ||
| 04:3405:41 | ||
| 05:4106:48 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 20 नवंबर 2026 की तिथि क्या है?
- 20 नवंबर 2026 की तिथि शुक्ल दशमी है।
- 20 नवंबर 2026 का नक्षत्र क्या है?
- 20 नवंबर 2026 का नक्षत्र पूर्व भाद्रपदा और योग वज्र है।
- 20 नवंबर 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:47 पर तथा सूर्यास्त 17:25 पर होगा।
- 20 नवंबर 2026 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 10:46–12:06 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

