मंगलवार, 26 अक्टूबर 2027
दैनिक पंचांग
आज मंगलवार है। द्वादशी तिथि 01:03 (कल) बजे तक, फिर त्रयोदशी 22:50 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र 14:33 बजे तक, उसके बाद उत्तर फाल्गुनी 13:00 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग ब्रह्म 11:42 बजे तक, फिर ऐन्द्र योग 08:40 (कल) बजे तक। कौलव करण 14:12 बजे तक, उसके बाद तैतिल 01:03 (कल) बजे तक, फिर गर 11:56 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (14:53 से 16:17) के दौरान टालें। चन्द्रमा सिंह राशि में है और सूर्य तुला राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आश्विन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण द्वादशी
उसी दिन03:22अगले दिन01:03
द्वादशी — एकादशी व्रत की समाप्ति। शांत और पुनःस्थापन की तिथि।
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
- अमान्तआश्विनपूर्णिमान्तकार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
पूर्व फाल्गुनी
पिछले दिन16:08उसी दिन14:33
उत्तर फाल्गुनी
उसी दिन14:33अगले दिन13:00
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
ब्रह्म
पिछले दिन14:45उसी दिन11:42
ऐन्द्र
उसी दिन11:42अगले दिन08:40
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
कौलव
उसी दिन03:22उसी दिन14:12
तैतिल
उसी दिन14:12अगले दिन01:03
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण द्वादशी · मंगल
26 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 24 मि| 06:2807:52 | ||
| 07:5209:16 | ||
| 09:1610:40 | ||
| 10:4012:04 | ||
| 12:0413:29 | ||
| 13:2914:53 | ||
| 14:5316:17 | ||
| 16:1717:41 |
रात के समय
8·1 घं 36 मि| 17:4119:17 | ||
| 19:1720:53 | ||
| 20:5322:29 | ||
| 22:2900:05 | ||
| 00:0501:41 | ||
| 01:4103:17 | ||
| 03:1704:53 | ||
| 04:5306:29 |
दिन के समय
8·1 घं 24 मि| 06:2807:52 | ||
| 07:5209:16 | ||
| 09:1610:40 | ||
| 10:4012:04 | ||
| 12:0413:29 | ||
| 13:2914:53 | ||
| 14:5316:17 | ||
| 16:1717:41 |
रात के समय
8·1 घं 36 मि| 17:4119:17 | ||
| 19:1720:53 | ||
| 20:5322:29 | ||
| 22:2900:05 | ||
| 00:0501:41 | ||
| 01:4103:17 | ||
| 03:1704:53 | ||
| 04:5306:29 |
| 04:46→05:37 | ||
| 11:42→12:27 | ||
| 08:34→10:04 | ||
| 14:53→16:17 | ||
| 09:16→10:40 | ||
| 12:04→13:29 | ||
| 23:36→01:06 |
दिन के घंटे
12·56 मि| 06:2807:24 | ||
| 07:2408:20 | ||
| 08:2009:16 | ||
| 09:1610:12 | ||
| 10:1211:08 | ||
| 11:0812:04 | ||
| 12:0413:01 | ||
| 13:0113:57 | ||
| 13:5714:53 | ||
| 14:5315:49 | ||
| 15:4916:45 | ||
| 16:4517:41 |
रात के घंटे
12·1 घं 4 मि| 17:4118:45 | ||
| 18:4519:49 | ||
| 19:4920:53 | ||
| 20:5321:57 | ||
| 21:5723:01 | ||
| 23:0100:05 | ||
| 00:0501:09 | ||
| 01:0902:13 | ||
| 02:1303:17 | ||
| 03:1704:21 | ||
| 04:2105:25 | ||
| 05:2506:29 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 26 अक्टूबर 2027 की तिथि क्या है?
- 26 अक्टूबर 2027 की तिथि कृष्ण द्वादशी है।
- 26 अक्टूबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 26 अक्टूबर 2027 का नक्षत्र पूर्व फाल्गुनी और योग ब्रह्म है।
- 26 अक्टूबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:28 पर तथा सूर्यास्त 17:41 पर होगा।
- 26 अक्टूबर 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 14:53–16:17 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

