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Kundli GPT

गुरुवार, 30 अक्टूबर 2025

दैनिक पंचांग

शुभ दिन

आज गुरुवार है। अष्टमी तिथि 10:06 बजे तक, फिर नवमी 10:04 (कल) बजे तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र 18:33 बजे तक, उसके बाद धनिष्ठा 18:50 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शूल 07:19 बजे तक, फिर गण्ड योग 06:14 (कल) बजे तक। बव करण 10:06 बजे तक, उसके बाद बालव 22:11 बजे तक, फिर कौलव 10:04 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (13:27 से 14:51) के दौरान टालें। चन्द्रमा मकर राशि में है और सूर्य तुला राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल अष्टमी

      पिछले दिन 09:23 उसी दिन 10:06

    • शुक्ल नवमी

      उसी दिन 10:06 अगले दिन 10:04

    अष्टमी — तीव्र ऊर्जा वाली तिथि। नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरा में टाली जाती है।

  • गुरुवार

    गुरुवार — गुरु (बृहस्पति) द्वारा शासित। सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।

  • कार्तिक · मार्गशीर्ष

नक्षत्र · योग · करण

    • श्रवण

      पिछले दिन 17:29 उसी दिन 18:33

    • धनिष्ठा

      उसी दिन 18:33 अगले दिन 18:50

    चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।

    • शूल

      पिछले दिन 07:49 उसी दिन 07:19

    • गण्ड

      उसी दिन 07:19 अगले दिन 06:14

    अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।

    • बव

      पिछले दिन 21:50 उसी दिन 10:06

    • बालव

      उसी दिन 10:06 उसी दिन 22:11

    • कौलव

      उसी दिन 22:11 अगले दिन 10:04

    चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।

एक नज़र में दिन

उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल अष्टमी · गुरु

00 06 12 18 शुभ · 06:31 – 07:54 रोग · 07:54 – 09:18 उद्वेग · 09:18 – 10:41 चल · 10:41 – 12:04 लाभ · 12:04 – 13:27 अमृत · 13:27 – 14:51 काल · 14:51 – 16:14 शुभ · 16:14 – 17:37 अमृत · 17:37 – 19:14 चल · 19:14 – 20:51 रोग · 20:51 – 22:28 काल · 22:28 – 00:05 लाभ · 00:05 – 01:41 उद्वेग · 01:41 – 03:18 शुभ · 03:18 – 04:55 अमृत · 04:55 – 06:32 शुभ · 06:31 – 07:54 रोग · 07:54 – 09:18 शून्य · 09:18 – 10:41 लाभ · 10:41 – 12:04 काल · 12:04 – 13:27 चल · 13:27 – 14:51 उद्योग · 14:51 – 16:14 अमृत · 16:14 – 17:37 लाभ · 17:37 – 19:14 चल · 19:14 – 20:51 शुभ · 20:51 – 22:28 उद्योग · 22:28 – 00:05 अमृत · 00:05 – 01:41 शून्य · 01:41 – 03:18 रोग · 03:18 – 04:55 काल · 04:55 – 06:32 ब्रह्म मुहूर्त · 04:48 – 05:40 अभिजित मुहूर्त · 11:42 – 12:26 अमृत काल · 07:41 – 09:21 राहु काल · 13:27 – 14:51 यमगण्ड काल · 06:31 – 07:54 गुलिक काल · 09:18 – 10:41 वर्ज्यम् · 21:39 – 23:20 गुरु · 06:31 – 07:27 मंगल · 07:27 – 08:22 सूर्य · 08:22 – 09:18 शुक्र · 09:18 – 10:13 बुध · 10:13 – 11:09 चंद्र · 11:09 – 12:04 शनि · 12:04 – 13:00 गुरु · 13:00 – 13:55 मंगल · 13:55 – 14:51 सूर्य · 14:51 – 15:46 शुक्र · 15:46 – 16:42 बुध · 16:42 – 17:37 चंद्र · 17:37 – 18:42 शनि · 18:42 – 19:46 गुरु · 19:46 – 20:51 मंगल · 20:51 – 21:55 सूर्य · 21:55 – 23:00 शुक्र · 23:00 – 00:05 बुध · 00:05 – 01:09 चंद्र · 01:09 – 02:14 शनि · 02:14 – 03:18 गुरु · 03:18 – 04:23 मंगल · 04:23 – 05:27 सूर्य · 05:27 – 06:32

30 अक्टू॰

दैनिक पंचांग

दिन के समय

8 · 1 घं 23 मि
06:31
07:54
09:18
10:41
12:04
13:27
14:51
16:14

रात के समय

8 · 1 घं 37 मि
17:37
19:14
20:51
22:28
00:05
01:41
03:18
04:55

दिन के समय

8 · 1 घं 23 मि
06:31
07:54
09:18
10:41
12:04
13:27
14:51
16:14

रात के समय

8 · 1 घं 37 मि
17:37
19:14
20:51
22:28
00:05
01:41
03:18
04:55
04:48 05:40
11:42 12:26
07:41 09:21
13:27 14:51
06:31 07:54
09:18 10:41
21:39 23:20

दिन के घंटे

12 · 55 मि
06:31
07:27
08:22
09:18
10:13
11:09
12:04
13:00
13:55
14:51
15:46
16:42

रात के घंटे

12 · 1 घं 5 मि
17:37
18:42
19:46
20:51
21:55
23:00
00:05
01:09
02:14
03:18
04:23
05:27

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
30 अक्टूबर 2025 की तिथि शुक्ल अष्टमी है।
30 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
30 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र श्रवण और योग शूल है।
30 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
दिल्ली में सूर्योदय 06:31 पर तथा सूर्यास्त 17:37 पर होगा।
30 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल 13:27–14:51 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।