सोमवार, 22 सितंबर 2025
दैनिक पंचांग
आज सोमवार है। प्रतिपदा तिथि 02:56 (कल) बजे तक, फिर द्वितीया 04:52 (कल) बजे तक रहेगी। उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र 11:23 बजे तक, उसके बाद हस्त 13:39 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शुक्ल 19:57 बजे तक, फिर ब्रह्म योग 20:21 (कल) बजे तक। किंस्तुघ्न करण 14:07 बजे तक, उसके बाद बव 02:56 (कल) बजे तक, फिर बालव 15:51 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (07:40 से 09:11) के दौरान टालें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल प्रतिपदा
उसी दिन 01:24 अगले दिन 02:56
प्रतिपदा — प्रथम तिथि। नए आरंभ और नींव रखने के लिए शुभ मानी जाती है।
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सोमवार
सोमवार — चंद्र द्वारा शासित। शांत और भावपूर्ण दिन; पारिवारिक कार्य, जल-सम्बन्धित कार्य और अध्ययन के लिए उपयुक्त।
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आश्विन · कार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
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उत्तर फाल्गुनी
पिछले दिन 09:31 उसी दिन 11:23
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हस्त
उसी दिन 11:23 अगले दिन 13:39
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
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शुक्ल
पिछले दिन 19:51 उसी दिन 19:57
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ब्रह्म
उसी दिन 19:57 अगले दिन 20:21
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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किंस्तुघ्न
उसी दिन 01:24 उसी दिन 14:07
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बव
उसी दिन 14:07 अगले दिन 02:56
स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल प्रतिपदा · सोम
22 सित॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 31 मि| 06:09 07:40 | ||
| 07:40 09:11 | ||
| 09:11 10:42 | ||
| 10:42 12:13 | ||
| 12:13 13:44 | ||
| 13:44 15:15 | ||
| 15:15 16:46 | ||
| 16:46 18:17 |
रात के समय
8 · 1 घं 29 मि| 18:17 19:46 | ||
| 19:46 21:15 | ||
| 21:15 22:44 | ||
| 22:44 00:13 | ||
| 00:13 01:42 | ||
| 01:42 03:11 | ||
| 03:11 04:41 | ||
| 04:41 06:10 |
दिन के समय
8 · 1 घं 31 मि| 06:09 07:40 | ||
| 07:40 09:11 | ||
| 09:11 10:42 | ||
| 10:42 12:13 | ||
| 12:13 13:44 | ||
| 13:44 15:15 | ||
| 15:15 16:46 | ||
| 16:46 18:17 |
रात के समय
8 · 1 घं 29 मि| 18:17 19:46 | ||
| 19:46 21:15 | ||
| 21:15 22:44 | ||
| 22:44 00:13 | ||
| 00:13 01:42 | ||
| 01:42 03:11 | ||
| 03:11 04:41 | ||
| 04:41 06:10 |
| 04:34 → 05:22 | ||
| 11:49 → 12:37 | ||
| 03:38 → 05:21 | ||
| 07:40 → 09:11 | ||
| 10:42 → 12:13 | ||
| 13:44 → 15:15 | ||
| 17:17 → 19:00 |
दिन के घंटे
12 · 1 घं 1 मि| 06:09 07:10 | ||
| 07:10 08:10 | ||
| 08:10 09:11 | ||
| 09:11 10:12 | ||
| 10:12 11:12 | ||
| 11:12 12:13 | ||
| 12:13 13:14 | ||
| 13:14 14:15 | ||
| 14:15 15:15 | ||
| 15:15 16:16 | ||
| 16:16 17:17 | ||
| 17:17 18:17 |
रात के घंटे
12 · 59 मि| 18:17 19:17 | ||
| 19:17 20:16 | ||
| 20:16 21:15 | ||
| 21:15 22:15 | ||
| 22:15 23:14 | ||
| 23:14 00:13 | ||
| 00:13 01:13 | ||
| 01:13 02:12 | ||
| 02:12 03:11 | ||
| 03:11 04:11 | ||
| 04:11 05:10 | ||
| 05:10 06:10 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 22 सितंबर 2025 की तिथि क्या है?
- 22 सितंबर 2025 की तिथि शुक्ल प्रतिपदा है।
- 22 सितंबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 22 सितंबर 2025 का नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी और योग शुक्ल है।
- 22 सितंबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:09 पर तथा सूर्यास्त 18:17 पर होगा।
- 22 सितंबर 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 07:40–09:11 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।