गुरुवार, 30 सितंबर 2027
दैनिक पंचांग
आज गुरुवार है। अमावस्या तिथि 08:05 बजे तक, फिर प्रतिपदा 05:35 (कल) बजे तक रहेगी। हस्त नक्षत्र 02:10 (कल) बजे तक, उसके बाद चित्रा 00:48 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग ब्रह्म 21:07 बजे तक, फिर ऐन्द्र योग 18:10 (कल) बजे तक। नाग करण 08:05 बजे तक, उसके बाद किंस्तुघ्न 18:47 बजे तक, फिर बव 05:35 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (13:40 से 15:09) के दौरान टालें। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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अमावस्या
पिछले दिन 10:55 उसी दिन 08:05
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शुक्ल प्रतिपदा
उसी दिन 08:05 अगले दिन 05:35
पूर्णिमा अथवा अमावस्या — पूर्ण या नव चंद्र की तिथि। भक्ति, समापन और संकल्प के लिए विशेष ऊर्जावान दिन।
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गुरुवार
गुरुवार — गुरु (बृहस्पति) द्वारा शासित। सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।
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आश्विन · कार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
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हस्त · पाद 1
उसी दिन 03:59 अगले दिन 02:10
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
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ब्रह्म
उसी दिन 00:25 उसी दिन 21:07
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ऐन्द्र
उसी दिन 21:07 अगले दिन 18:10
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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नाग
पिछले दिन 21:28 उसी दिन 08:05
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किंस्तुघ्न
उसी दिन 08:05 उसी दिन 18:47
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बव
उसी दिन 18:47 अगले दिन 05:35
स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
अमावस्या · गुरु
30 सित॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 29 मि| 06:13 07:42 | ||
| 07:42 09:12 | ||
| 09:12 10:41 | ||
| 10:41 12:11 | ||
| 12:11 13:40 | ||
| 13:40 15:09 | ||
| 15:09 16:39 | ||
| 16:39 18:08 |
रात के समय
8 · 1 घं 31 मि| 18:08 19:39 | ||
| 19:39 21:10 | ||
| 21:10 22:40 | ||
| 22:40 00:11 | ||
| 00:11 01:41 | ||
| 01:41 03:12 | ||
| 03:12 04:43 | ||
| 04:43 06:13 |
दिन के समय
8 · 1 घं 29 मि| 06:13 07:42 | ||
| 07:42 09:12 | ||
| 09:12 10:41 | ||
| 10:41 12:11 | ||
| 12:11 13:40 | ||
| 13:40 15:09 | ||
| 15:09 16:39 | ||
| 16:39 18:08 |
रात के समय
8 · 1 घं 31 मि| 18:08 19:39 | ||
| 19:39 21:10 | ||
| 21:10 22:40 | ||
| 22:40 00:11 | ||
| 00:11 01:41 | ||
| 01:41 03:12 | ||
| 03:12 04:43 | ||
| 04:43 06:13 |
| 04:36 → 05:25 | ||
| 11:47 → 12:34 | ||
| 20:37 → 22:06 | ||
| 13:40 → 15:09 | ||
| 06:13 → 07:42 | ||
| 09:12 → 10:41 | ||
| 11:45 → 13:14 |
दिन के घंटे
12 · 1 घं| 06:13 07:12 | ||
| 07:12 08:12 | ||
| 08:12 09:12 | ||
| 09:12 10:11 | ||
| 10:11 11:11 | ||
| 11:11 12:11 | ||
| 12:11 13:10 | ||
| 13:10 14:10 | ||
| 14:10 15:09 | ||
| 15:09 16:09 | ||
| 16:09 17:09 | ||
| 17:09 18:08 |
रात के घंटे
12 · 1 घं| 18:08 19:09 | ||
| 19:09 20:09 | ||
| 20:09 21:10 | ||
| 21:10 22:10 | ||
| 22:10 23:10 | ||
| 23:10 00:11 | ||
| 00:11 01:11 | ||
| 01:11 02:12 | ||
| 02:12 03:12 | ||
| 03:12 04:13 | ||
| 04:13 05:13 | ||
| 05:13 06:13 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 30 सितंबर 2027 की तिथि क्या है?
- 30 सितंबर 2027 की तिथि अमावस्या है।
- 30 सितंबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 30 सितंबर 2027 का नक्षत्र हस्त और योग ब्रह्म है।
- 30 सितंबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:13 पर तथा सूर्यास्त 18:08 पर होगा।
- 30 सितंबर 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 13:40–15:09 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।