शुभ मुहूर्त 2027
जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ
शुभ मुहूर्त क्या है?
शुभ मुहूर्त वह मंगलमय समय है जब पंचांग के पाँच अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — परस्पर अनुकूल हों, तब कोई नया कार्य आरंभ किया जाता है। शास्त्रीय मुहूर्त परंपरा (मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका, धर्मसिंधु व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त') के अनुसार नीचे दिया गया प्रत्येक दिन उसके नक्षत्र, तिथि व वार पर अंकित किया जाता है, फिर मानक दोष — अमावस्या, रिक्ता तिथि (4, 9, 14), भद्रा (विष्टि करण), पंचक, पंचांग शुद्धि के पाँच अशुभ योग (अतिगण्ड, शूल, गण्ड, व्यतीपात व वैधृति) एवं संबंधित ऋतु-विराम — हटा दिए जाते हैं। सभी समय नई दिल्ली के दृक (वास्तविक स्थिति) पंचांग से निकाले गए हैं।
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विवाह मुहूर्त
विवाह संस्कार के लिए शुभ तिथियाँ
अनुकूल नक्षत्र, तिथि व वार के योग पर चुनी गई विवाह तिथियाँ, जिनमें नई दिल्ली हेतु अशुभ तिथि, पंचक व भद्रा हटा दी गई हैं।
विवाह मुहूर्त शुभ नक्षत्र तिथि व पक्ष अभिजित मुहूर्ततिथियाँ देखें -
सगाई मुहूर्त
सगाई (अंगूठी रस्म) की शुभ तिथियाँ
विवाह नक्षत्र-परिवार पर सगाई की तिथियाँ — पुष्य व श्रवण अतिरिक्त शुभ — खरमास, चातुर्मास व गुरु/शुक्र अस्त में विवाह की ही तरह स्थगित।
अंगूठी रस्म विवाह नक्षत्र तिथि व पक्ष गुरु-शुक्र बलतिथियाँ देखें -
कार / बाइक मुहूर्त
वाहन खरीदने या लेने के शुभ दिन
नई कार या बाइक खरीदने या लेने के सर्वोत्तम दिन — नक्षत्र व वार पर आधारित, रिक्ता तिथि व भद्रा से बचते हुए।
डिलीवरी दिन शुभ नक्षत्र शुभ वार वाहन पूजातिथियाँ देखें -
सोना खरीदने का मुहूर्त
सोना व आभूषण खरीदने के शुभ दिन
सोना व आभूषण खरीदने के पुष्य-प्रधान शुभ दिन — कोई ऋतु-विराम नहीं, प्रत्येक समय शुभ चौघड़ियों तक सीमित।
स्वर्ण खरीद पुष्य नक्षत्र गुरुवार श्रेष्ठ शुभ चौघड़ियातिथियाँ देखें -
संपत्ति खरीद मुहूर्त
संपत्ति खरीदने व रजिस्ट्री के शुभ दिन
भूमि, मकान या फ्लैट खरीदने व रजिस्ट्री की गुरु/शुक्रवार तिथियाँ — परंपरा के क्रय व भूमि नक्षत्रों पर, केवल अधिक मास में विराम।
रजिस्ट्री दिन क्रय नक्षत्र केवल गुरु-शुक्रवार तिथितिथियाँ देखें -
व्यापार आरंभ मुहूर्त
दुकान खोलने व नया व्यवसाय शुरू करने के शुभ दिन
दुकान या नया व्यवसाय खोलने की बुध-गुरुवार प्रधान तिथियाँ — लाभ चौघड़िये के समय, पंचक हटाकर।
दुकान उद्घाटन पुष्य नक्षत्र बुध व गुरुवार लाभ चौघड़ियातिथियाँ देखें -
गृह प्रवेश मुहूर्त
नए घर में प्रवेश की शुभ तिथियाँ
नए घर में प्रवेश का शुभ मुहूर्त — स्थिर नक्षत्र, शुक्ल पक्ष व दिन का निर्दोष समय, अभिजित सहित।
गृह प्रवेश स्थिर नक्षत्र शुक्ल पक्ष अभिजित मुहूर्ततिथियाँ देखें -
भूमि पूजन मुहूर्त
निर्माण से पूर्व शिलान्यास की शुभ तिथियाँ
भूमि पूजन व शिलान्यास के शुभ दिन — स्थिर नक्षत्रों पर, पंचक पट्टी हटाकर।
शिलान्यास स्थिर नक्षत्र तिथि दिन का समयतिथियाँ देखें -
नामकरण मुहूर्त
नामकरण संस्कार के शुभ दिन
नवजात के नामकरण के शुभ दिन — सौम्य नक्षत्र-समूह, शुक्ल पक्ष में; कोई ऋतु-विराम नहीं।
नामकरण सौम्य नक्षत्र शुक्ल पक्ष 11वें दिन की परंपरातिथियाँ देखें -
मुंडन मुहूर्त
प्रथम मुंडन (चूड़ाकरण) की तिथियाँ
प्रथम चूड़ाकरण की तिथियाँ — लघु व मृदु नक्षत्र तथा ज्येष्ठा अपवाद, केवल उत्तरायण, पूर्वाह्न के मुहूर्त।
चूड़ाकरण लघु नक्षत्र शुक्ल पक्ष विषम वर्ष परंपरातिथियाँ देखें -
अन्नप्राशन मुहूर्त
प्रथम अन्न की शुभ तिथियाँ
शिशु के प्रथम अन्न के शुभ दिन — शुक्ल पक्ष में सौम्य नक्षत्र, वर्ष भर उपलब्ध।
प्रथम अन्न सौम्य नक्षत्र शुक्ल पक्ष छठे माह की परंपरातिथियाँ देखें -
उपनयन (जनेऊ) मुहूर्त
उपनयन (जनेऊ) संस्कार की शुभ तिथियाँ
केवल उत्तरायण में जनेऊ की तिथियाँ — तेरह शास्त्रीय नक्षत्र, पूर्वाह्न के मुहूर्त; खरमास, चातुर्मास व गुरु/शुक्र अस्त में विराम।
जनेऊ संस्कार शुभ नक्षत्र केवल उत्तरायण पूर्वाह्न मुहूर्ततिथियाँ देखें -
विद्यारंभ मुहूर्त
शिशु की शिक्षा आरंभ के शुभ दिन
शास्त्रीय विद्या-नक्षत्रों पर अक्षरारंभ की तिथियाँ — बुध-गुरु प्रधान वार, पूर्वाह्न के मुहूर्त; चातुर्मास में विराम नहीं।
अक्षरारंभ विद्या नक्षत्र बुध-गुरुवार श्रेष्ठ पूर्वाह्न मुहूर्ततिथियाँ देखें -
कर्णवेध मुहूर्त
कर्णवेध (कान छेदन) संस्कार की शुभ तिथियाँ
मृदु व लघु नक्षत्रों पर कान छेदन की तिथियाँ — सौम्य वार, दोनों पक्ष मान्य, ऋतु-विरामों से बाहर।
कर्णवेध मृदु नक्षत्र दोनों पक्ष सौम्य वारतिथियाँ देखें
ध्यान रखने योग्य बातें
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
- पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
- राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
- खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
- चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
- अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।