आज बुधवार है, कृष्ण पक्ष चल रहा है। आज मासिक शिवरात्रि व्रत रखा जाता है। त्रयोदशी तिथि रात तक है, फिर चतुर्दशी शुरू होगी। त्रयोदशी उत्साह की तिथि है, उत्सव के लिए अच्छी। चन्द्रमा पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र में दोपहर तक है, फिर उत्तर भाद्रपदा में। राहु काल में नया काम न करें, 12:21 से 13:57 बजे तक। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
इस तिथि के पर्व
बुधवार, 15 अप्रैल
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मासिक शिवरात्रि
व्रत
निशीथ काल23:58 – 00:43
पूजा निशीथ काल — मध्यरात्रि — में, चतुर्दशी रहते की जाती है।
हर कृष्ण चतुर्दशी को, जब तिथि मध्यरात्रि में हो, मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि। भक्त दिन भर उपवास रखते हैं और निशीथ काल में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं; माघ मास की शिवरात्रि ही महाशिवरात्रि है।
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पुरुषोत्तम मास
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अधिक चैत्र
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
तिथिहिन्दू पंचांग का चान्द्र दिवस — सूर्य और चंद्र के बीच की दूरी से मापा जाता है। पर्व ग्रेगोरियन तिथि के बजाय किसी विशेष तिथि (एकादशी, पूर्णिमा…) पर पड़ते हैं।शब्दावली में और जानें
कृष्ण त्रयोदशी
उसी दिन00:12उसी दिन22:31तक
फिर
कृष्ण चतुर्दशी
उसी दिन22:31→अगले दिन20:11
त्रयोदशी — उत्साह की तिथि। उत्सव और सक्रिय कार्यों के लिए शुभ।
वारसप्ताह का दिन, जिसका शासक सात पारंपरिक ग्रहों में से एक होता है — रवि/सूर्य, सोम/चंद्र, और इसी क्रम में। प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का स्वभाव वहन करता है।शब्दावली में और जानें
बुधवार
बुधवार — बुध द्वारा शासित। संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
चान्द्र मासहिन्दू चान्द्र पंचांग का मास। दो परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — अमान्त अमावस्या से, पूर्णिमान्त पूर्णिमा से आरंभ होती है — इसलिए क्षेत्र अनुसार एक ही मास के दो नाम होते हैं।शब्दावली में और जानें
अमान्तचैत्र
पूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
नक्षत्रवर्तमान में जिस नक्षत्र में चंद्र स्थित है, वह नक्षत्र। आकाश को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है; प्रत्येक के अपने गुण होते हैं जो जन्म-कुंडली और शुभ मुहूर्त चुनने में उपयोग होते हैं।शब्दावली में और जानें
पूर्व भाद्रपदा
पिछले दिन16:05उसी दिन15:22तक
फिर
उत्तर भाद्रपदा
उसी दिन15:22→अगले दिन13:58
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
योगसूर्य-चंद्र का एक संयोग, जो दिन के स्वभाव को रंग देता है। 27 योगों में से लगभग आधे शुभ माने जाते हैं, शेष में संयम अपेक्षित है।शब्दावली में और जानें
ब्रह्म
पिछले दिन15:38उसी दिन13:24तक
फिर
ऐन्द्र
उसी दिन13:24→अगले दिन10:36
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
करणतिथि का आधा भाग — हर चान्द्र दिवस में क्रमशः दो करण होते हैं। तिथि से अधिक सूक्ष्म समय-गणना के लिए उपयोगी।शब्दावली में और जानें
गर
उसी दिन00:12उसी दिन11:27तक
फिर
वणिज
उसी दिन11:27→उसी दिन22:31
फिर
विष्टि
उसी दिन22:31→अगले दिन09:26
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
चौघड़ियाउत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।शब्दावली में और जानें
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
गौरी पंचांगम्दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।शब्दावली में और जानें
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
शुभ व अशुभदिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।शब्दावली में और जानें
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
होरादिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।शब्दावली में और जानें
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण त्रयोदशी · बुध
15 अप्रैल
दैनिक पंचांग
शुभमिला-जुलाबचें
☀️
दिन के समय
8·1 घं 36 मि
लाभलाभ — व्यापार, क्रय-विक्रय और धन-सम्बन्धी कार्यों के लिए शुभ।शब्दावली में और जानें
05:5607:32
अमृतअमृत — सर्वोत्तम चौघड़िया। किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए श्रेष्ठ।शब्दावली में और जानें