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Kundli GPT

शनिवार, 5 अप्रैल 2025

दैनिक पंचांग

शुभ दिन

आज शनिवार है। अष्टमी तिथि 19:26 बजे तक, फिर नवमी 19:23 (कल) बजे तक रहेगी। पुनर्वसु नक्षत्र 05:31 (कल) बजे तक, उसके बाद पुष्य 06:24 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग अतिगण्ड 20:02 बजे तक, फिर सुकर्मा योग 18:54 (कल) बजे तक। विष्टि करण 07:44 बजे तक, उसके बाद बव 19:26 बजे तक, फिर बालव 07:19 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:15 से 10:49) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य मीन राशि में।

तिथि · वार · चान्द्र मास

    • शुक्ल अष्टमी

      पिछले दिन 20:13 उसी दिन 19:26

    • शुक्ल नवमी

      उसी दिन 19:26 अगले दिन 19:23

    अष्टमी — तीव्र ऊर्जा वाली तिथि। नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरा में टाली जाती है।

  • शनिवार

    शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।

  • चैत्र · वैशाख

नक्षत्र · योग · करण

    • पुनर्वसु · पाद 1

      उसी दिन 05:20 अगले दिन 05:31

    चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।

    • अतिगण्ड

      पिछले दिन 21:44 उसी दिन 20:02

    • सुकर्मा

      उसी दिन 20:02 अगले दिन 18:54

    अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।

    • विष्टि

      पिछले दिन 20:13 उसी दिन 07:44

    • बव

      उसी दिन 07:44 उसी दिन 19:26

    • बालव

      उसी दिन 19:26 अगले दिन 07:19

    विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।

एक नज़र में दिन

उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।

दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।

दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।

दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।

शुक्ल अष्टमी · शनि

00 06 12 18 काल · 06:06 – 07:41 शुभ · 07:41 – 09:15 रोग · 09:15 – 10:49 उद्वेग · 10:49 – 12:24 चल · 12:24 – 13:58 लाभ · 13:58 – 15:32 अमृत · 15:32 – 17:07 काल · 17:07 – 18:41 काल · 18:41 – 20:06 लाभ · 20:06 – 21:32 उद्वेग · 21:32 – 22:57 शुभ · 22:57 – 00:23 अमृत · 00:23 – 01:49 चल · 01:49 – 03:14 रोग · 03:14 – 04:40 काल · 04:40 – 06:05 काल · 06:06 – 07:41 चल · 07:41 – 09:15 उद्योग · 09:15 – 10:49 अमृत · 10:49 – 12:24 लाभ · 12:24 – 13:58 रोग · 13:58 – 15:32 शुभ · 15:32 – 17:07 शून्य · 17:07 – 18:41 अमृत · 18:41 – 20:06 रोग · 20:06 – 21:32 शून्य · 21:32 – 22:57 उद्योग · 22:57 – 00:23 शुभ · 00:23 – 01:49 लाभ · 01:49 – 03:14 चल · 03:14 – 04:40 काल · 04:40 – 06:05 ब्रह्म मुहूर्त · 04:35 – 05:21 अभिजित मुहूर्त · 11:58 – 12:49 अमृत काल · 03:06 – 04:43 राहु काल · 09:15 – 10:49 यमगण्ड काल · 13:58 – 15:32 गुलिक काल · 06:06 – 07:41 वर्ज्यम् · 17:25 – 19:02 शनि · 06:06 – 07:09 गुरु · 07:09 – 08:12 मंगल · 08:12 – 09:15 सूर्य · 09:15 – 10:18 शुक्र · 10:18 – 11:21 बुध · 11:21 – 12:24 चंद्र · 12:24 – 13:26 शनि · 13:26 – 14:29 गुरु · 14:29 – 15:32 मंगल · 15:32 – 16:35 सूर्य · 16:35 – 17:38 शुक्र · 17:38 – 18:41 बुध · 18:41 – 19:38 चंद्र · 19:38 – 20:35 शनि · 20:35 – 21:32 गुरु · 21:32 – 22:29 मंगल · 22:29 – 23:26 सूर्य · 23:26 – 00:23 शुक्र · 00:23 – 01:20 बुध · 01:20 – 02:17 चंद्र · 02:17 – 03:14 शनि · 03:14 – 04:11 गुरु · 04:11 – 05:08 मंगल · 05:08 – 06:05

5 अप्रैल

दैनिक पंचांग

दिन के समय

8 · 1 घं 34 मि
06:06
07:41
09:15
10:49
12:24
13:58
15:32
17:07

रात के समय

8 · 1 घं 26 मि
18:41
20:06
21:32
22:57
00:23
01:49
03:14
04:40

दिन के समय

8 · 1 घं 34 मि
06:06
07:41
09:15
10:49
12:24
13:58
15:32
17:07

रात के समय

8 · 1 घं 26 मि
18:41
20:06
21:32
22:57
00:23
01:49
03:14
04:40
04:35 05:21
11:58 12:49
03:06 04:43
09:15 10:49
13:58 15:32
06:06 07:41
17:25 19:02

दिन के घंटे

12 · 1 घं 3 मि
06:06
07:09
08:12
09:15
10:18
11:21
12:24
13:26
14:29
15:32
16:35
17:38

रात के घंटे

12 · 57 मि
18:41
19:38
20:35
21:32
22:29
23:26
00:23
01:20
02:17
03:14
04:11
05:08

लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

5 अप्रैल 2025 की तिथि क्या है?
5 अप्रैल 2025 की तिथि शुक्ल अष्टमी है।
5 अप्रैल 2025 का नक्षत्र क्या है?
5 अप्रैल 2025 का नक्षत्र पुनर्वसु और योग अतिगण्ड है।
5 अप्रैल 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
दिल्ली में सूर्योदय 06:06 पर तथा सूर्यास्त 18:41 पर होगा।
5 अप्रैल 2025 को राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल 09:15–10:49 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।