रविवार, 5 जनवरी 2025
दैनिक पंचांग
आज रविवार है। षष्ठी तिथि 20:15 बजे तक, फिर सप्तमी 18:24 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व भाद्रपदा नक्षत्र 20:17 बजे तक, उसके बाद उत्तर भाद्रपदा 19:06 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग व्यतीपात 07:31 बजे तक, फिर वरीयान् योग 04:49 (कल) बजे तक। कौलव करण 09:09 बजे तक, उसके बाद तैतिल 20:15 बजे तक, फिर गर 07:20 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (16:20 से 17:38) के दौरान टालें। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य धनु राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक पौष
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल षष्ठी
पिछले दिन22:01उसी दिन20:15
शुक्ल सप्तमी
उसी दिन20:15अगले दिन18:24
षष्ठी — साहस और बल की तिथि। कठिन कार्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
- अमान्तपौषपूर्णिमान्तपौष
नक्षत्र · योग · करण
पूर्व भाद्रपदा
पिछले दिन21:23उसी दिन20:17
उत्तर भाद्रपदा
उसी दिन20:17अगले दिन19:06
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
व्यतीपात
पिछले दिन10:07उसी दिन07:31
वरीयान्
उसी दिन07:31अगले दिन04:49
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
कौलव
पिछले दिन22:01उसी दिन09:09
तैतिल
उसी दिन09:09उसी दिन20:15
गर
उसी दिन20:15अगले दिन07:20
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल षष्ठी · रवि
5 जन॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 18 मि| 07:1408:32 | ||
| 08:3209:50 | ||
| 09:5011:08 | ||
| 11:0812:26 | ||
| 12:2613:44 | ||
| 13:4415:02 | ||
| 15:0216:20 | ||
| 16:2017:38 |
रात के समय
8·1 घं 42 मि| 17:3819:20 | ||
| 19:2021:02 | ||
| 21:0222:44 | ||
| 22:4400:26 | ||
| 00:2602:08 | ||
| 02:0803:50 | ||
| 03:5005:32 | ||
| 05:3207:14 |
दिन के समय
8·1 घं 18 मि| 07:1408:32 | ||
| 08:3209:50 | ||
| 09:5011:08 | ||
| 11:0812:26 | ||
| 12:2613:44 | ||
| 13:4415:02 | ||
| 15:0216:20 | ||
| 16:2017:38 |
रात के समय
8·1 घं 42 मि| 17:3819:20 | ||
| 19:2021:02 | ||
| 21:0222:44 | ||
| 22:4400:26 | ||
| 00:2602:08 | ||
| 02:0803:50 | ||
| 03:5005:32 | ||
| 05:3207:14 |
| 05:25→06:20 | ||
| 12:05→12:47 | ||
| 12:39→14:11 | ||
| 16:20→17:38 | ||
| 12:26→13:44 | ||
| 15:02→16:20 | ||
| 03:29→05:01 |
दिन के घंटे
12·52 मि| 07:1408:06 | ||
| 08:0608:58 | ||
| 08:5809:50 | ||
| 09:5010:42 | ||
| 10:4211:34 | ||
| 11:3412:26 | ||
| 12:2613:18 | ||
| 13:1814:10 | ||
| 14:1015:02 | ||
| 15:0215:54 | ||
| 15:5416:46 | ||
| 16:4617:38 |
रात के घंटे
12·1 घं 8 मि| 17:3818:46 | ||
| 18:4619:54 | ||
| 19:5421:02 | ||
| 21:0222:10 | ||
| 22:1023:18 | ||
| 23:1800:26 | ||
| 00:2601:34 | ||
| 01:3402:42 | ||
| 02:4203:50 | ||
| 03:5004:58 | ||
| 04:5806:06 | ||
| 06:0607:14 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 5 जनवरी 2025 की तिथि क्या है?
- 5 जनवरी 2025 की तिथि शुक्ल षष्ठी है।
- 5 जनवरी 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 5 जनवरी 2025 का नक्षत्र पूर्व भाद्रपदा और योग व्यतीपात है।
- 5 जनवरी 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 07:14 पर तथा सूर्यास्त 17:38 पर होगा।
- 5 जनवरी 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 16:20–17:38 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

