शनिवार, 31 जुलाई 2027
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है। त्रयोदशी तिथि 22:58 बजे तक, फिर चतुर्दशी 19:20 (कल) बजे तक रहेगी। आर्द्रा नक्षत्र 22:52 बजे तक, उसके बाद पुनर्वसु 20:04 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग व्याघात 06:40 बजे तक, फिर हर्षण योग 02:47 (कल) बजे तक। गर करण 12:41 बजे तक, उसके बाद वणिज 22:58 बजे तक, फिर विष्टि 09:10 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (09:04 से 10:46) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य कर्क राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आषाढ़
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण त्रयोदशी
उसी दिन02:18उसी दिन22:58
कृष्ण चतुर्दशी
उसी दिन22:58अगले दिन19:20
त्रयोदशी — उत्साह की तिथि। उत्सव और सक्रिय कार्यों के लिए शुभ।
शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
- अमान्तआषाढ़पूर्णिमान्तश्रावण
नक्षत्र · योग · करण
आर्द्रा
उसी दिन01:23उसी दिन22:52
पुनर्वसु
उसी दिन22:52अगले दिन20:04
तीक्ष्ण नक्षत्र — निर्णायक कार्य, चिकित्सकीय हस्तक्षेप और एकाग्र शक्ति वाले कार्य के लिए उपयुक्त।
व्याघात
पिछले दिन10:12उसी दिन06:40
हर्षण
उसी दिन06:40अगले दिन02:47
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
गर
उसी दिन02:18उसी दिन12:41
वणिज
उसी दिन12:41उसी दिन22:58
विष्टि
उसी दिन22:58अगले दिन09:10
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण त्रयोदशी · शनि
31 जुल॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 41 मि| 05:4107:23 | ||
| 07:2309:04 | ||
| 09:0410:46 | ||
| 10:4612:27 | ||
| 12:2714:08 | ||
| 14:0815:50 | ||
| 15:5017:31 | ||
| 17:3119:13 |
रात के समय
8·1 घं 19 मि| 19:1320:31 | ||
| 20:3121:50 | ||
| 21:5023:09 | ||
| 23:0900:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:05 | ||
| 03:0504:23 | ||
| 04:2305:42 |
दिन के समय
8·1 घं 41 मि| 05:4107:23 | ||
| 07:2309:04 | ||
| 09:0410:46 | ||
| 10:4612:27 | ||
| 12:2714:08 | ||
| 14:0815:50 | ||
| 15:5017:31 | ||
| 17:3119:13 |
रात के समय
8·1 घं 19 मि| 19:1320:31 | ||
| 20:3121:50 | ||
| 21:5023:09 | ||
| 23:0900:27 | ||
| 00:2701:46 | ||
| 01:4603:05 | ||
| 03:0504:23 | ||
| 04:2305:42 |
| 04:18→04:59 | ||
| 12:00→12:54 | ||
| 13:55→15:21 | ||
| 09:04→10:46 | ||
| 14:08→15:50 | ||
| 05:41→07:23 | ||
| 08:54→10:20 |
दिन के घंटे
12·1 घं 8 मि| 05:4106:49 | ||
| 06:4907:57 | ||
| 07:5709:04 | ||
| 09:0410:12 | ||
| 10:1211:19 | ||
| 11:1912:27 | ||
| 12:2713:35 | ||
| 13:3514:42 | ||
| 14:4215:50 | ||
| 15:5016:57 | ||
| 16:5718:05 | ||
| 18:0519:13 |
रात के घंटे
12·52 मि| 19:1320:05 | ||
| 20:0520:57 | ||
| 20:5721:50 | ||
| 21:5022:42 | ||
| 22:4223:35 | ||
| 23:3500:27 | ||
| 00:2701:20 | ||
| 01:2002:12 | ||
| 02:1203:05 | ||
| 03:0503:57 | ||
| 03:5704:49 | ||
| 04:4905:42 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 31 जुलाई 2027 की तिथि क्या है?
- 31 जुलाई 2027 की तिथि कृष्ण त्रयोदशी है।
- 31 जुलाई 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 31 जुलाई 2027 का नक्षत्र आर्द्रा और योग व्याघात है।
- 31 जुलाई 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:41 पर तथा सूर्यास्त 19:13 पर होगा।
- 31 जुलाई 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 09:04–10:46 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

