मंगलवार, 16 मार्च 2027
दैनिक पंचांग
आज मंगलवार है। अष्टमी तिथि 08:54 बजे तक, फिर नवमी 06:43 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र 08:12 बजे तक, उसके बाद आर्द्रा 06:45 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग आयुष्मान् 11:49 बजे तक, फिर सौभाग्य योग 08:51 (कल) बजे तक। बव करण 08:54 बजे तक, उसके बाद बालव 19:50 बजे तक, फिर कौलव 06:43 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (15:30 से 16:59) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य मीन राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक फाल्गुन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल अष्टमी
पिछले दिन10:51उसी दिन08:54
शुक्ल नवमी
उसी दिन08:54अगले दिन06:43
अष्टमी — तीव्र ऊर्जा वाली तिथि। नए कार्य आरंभ करने के लिए परंपरा में टाली जाती है।
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
- अमान्तफाल्गुनपूर्णिमान्तफाल्गुन
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा
पिछले दिन09:25उसी दिन08:12
आर्द्रा
उसी दिन08:12अगले दिन06:45
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
आयुष्मान्
पिछले दिन14:35उसी दिन11:49
सौभाग्य
उसी दिन11:49अगले दिन08:51
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
बव
पिछले दिन21:55उसी दिन08:54
बालव
उसी दिन08:54उसी दिन19:50
कौलव
उसी दिन19:50अगले दिन06:43
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल अष्टमी · मंगल
16 मार्च
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 30 मि| 06:3008:00 | ||
| 08:0009:30 | ||
| 09:3011:00 | ||
| 11:0012:30 | ||
| 12:3014:00 | ||
| 14:0015:30 | ||
| 15:3016:59 | ||
| 16:5918:29 |
रात के समय
8·1 घं 30 मि| 18:2919:59 | ||
| 19:5921:29 | ||
| 21:2922:59 | ||
| 22:5900:29 | ||
| 00:2901:59 | ||
| 01:5903:29 | ||
| 03:2904:59 | ||
| 04:5906:29 |
दिन के समय
8·1 घं 30 मि| 06:3008:00 | ||
| 08:0009:30 | ||
| 09:3011:00 | ||
| 11:0012:30 | ||
| 12:3014:00 | ||
| 14:0015:30 | ||
| 15:3016:59 | ||
| 16:5918:29 |
रात के समय
8·1 घं 30 मि| 18:2919:59 | ||
| 19:5921:29 | ||
| 21:2922:59 | ||
| 22:5900:29 | ||
| 00:2901:59 | ||
| 01:5903:29 | ||
| 03:2904:59 | ||
| 04:5906:29 |
| 04:54→05:42 | ||
| 12:06→12:54 | ||
| 23:51→01:22 | ||
| 15:30→16:59 | ||
| 09:30→11:00 | ||
| 12:30→14:00 | ||
| 14:44→16:15 |
दिन के घंटे
12·1 घं| 06:3007:30 | ||
| 07:3008:30 | ||
| 08:3009:30 | ||
| 09:3010:30 | ||
| 10:3011:30 | ||
| 11:3012:30 | ||
| 12:3013:30 | ||
| 13:3014:30 | ||
| 14:3015:30 | ||
| 15:3016:29 | ||
| 16:2917:29 | ||
| 17:2918:29 |
रात के घंटे
12·1 घं| 18:2919:29 | ||
| 19:2920:29 | ||
| 20:2921:29 | ||
| 21:2922:29 | ||
| 22:2923:29 | ||
| 23:2900:29 | ||
| 00:2901:29 | ||
| 01:2902:29 | ||
| 02:2903:29 | ||
| 03:2904:29 | ||
| 04:2905:29 | ||
| 05:2906:29 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 16 मार्च 2027 की तिथि क्या है?
- 16 मार्च 2027 की तिथि शुक्ल अष्टमी है।
- 16 मार्च 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 16 मार्च 2027 का नक्षत्र मृगशिरा और योग आयुष्मान् है।
- 16 मार्च 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:30 पर तथा सूर्यास्त 18:29 पर होगा।
- 16 मार्च 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 15:30–16:59 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

