गुरुवार, 1 मई 2025
दैनिक पंचांग
आज गुरुवार है। चतुर्थी तिथि 11:24 बजे तक, फिर पंचमी 09:15 (कल) बजे तक रहेगी। मृगशिरा नक्षत्र 14:20 बजे तक, उसके बाद आर्द्रा 13:03 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग अतिगण्ड 08:33 बजे तक, फिर सुकर्मा योग 05:37 (कल) बजे तक। विष्टि करण 11:24 बजे तक, उसके बाद बव 22:14 बजे तक, फिर बालव 09:15 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (13:57 से 15:37) के दौरान टालें। चन्द्रमा मिथुन राशि में है और सूर्य मेष राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक वैशाख
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
शुक्ल चतुर्थी
पिछले दिन14:12उसी दिन11:24
शुक्ल पंचमी
उसी दिन11:24अगले दिन09:15
चतुर्थी — गणेश को समर्पित। पूजा-पाठ और विघ्न निवारण के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्यों के लिए कम उपयुक्त।
गुरुवार
गुरुवार — गुरु (बृहस्पति) द्वारा शासित। सप्ताह का सबसे शुभ दिन; अध्ययन, संस्कार और नए आरंभ के लिए श्रेष्ठ।
- अमान्तवैशाखपूर्णिमान्तवैशाख
नक्षत्र · योग · करण
मृगशिरा
पिछले दिन16:17उसी दिन14:20
आर्द्रा
उसी दिन14:20अगले दिन13:03
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
अतिगण्ड
पिछले दिन12:00उसी दिन08:33
सुकर्मा
उसी दिन08:33अगले दिन05:37
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
विष्टि
उसी दिन00:43उसी दिन11:24
बव
उसी दिन11:24उसी दिन22:14
बालव
उसी दिन22:14अगले दिन09:15
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल चतुर्थी · गुरु
1 मई
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 39 मि| 05:4007:19 | ||
| 07:1908:59 | ||
| 08:5910:38 | ||
| 10:3812:18 | ||
| 12:1813:57 | ||
| 13:5715:37 | ||
| 15:3717:16 | ||
| 17:1618:56 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 18:5620:16 | ||
| 20:1621:37 | ||
| 21:3722:57 | ||
| 22:5700:18 | ||
| 00:1801:38 | ||
| 01:3802:58 | ||
| 02:5804:19 | ||
| 04:1905:39 |
दिन के समय
8·1 घं 39 मि| 05:4007:19 | ||
| 07:1908:59 | ||
| 08:5910:38 | ||
| 10:3812:18 | ||
| 12:1813:57 | ||
| 13:5715:37 | ||
| 15:3717:16 | ||
| 17:1618:56 |
रात के समय
8·1 घं 20 मि| 18:5620:16 | ||
| 20:1621:37 | ||
| 21:3722:57 | ||
| 22:5700:18 | ||
| 00:1801:38 | ||
| 01:3802:58 | ||
| 02:5804:19 | ||
| 04:1905:39 |
| 04:14→04:57 | ||
| 11:51→12:44 | ||
| 06:15→07:43 | ||
| 13:57→15:37 | ||
| 05:40→07:19 | ||
| 08:59→10:38 | ||
| 21:26→22:54 |
दिन के घंटे
12·1 घं 6 मि| 05:4006:46 | ||
| 06:4607:53 | ||
| 07:5308:59 | ||
| 08:5910:05 | ||
| 10:0511:12 | ||
| 11:1212:18 | ||
| 12:1813:24 | ||
| 13:2414:31 | ||
| 14:3115:37 | ||
| 15:3716:43 | ||
| 16:4317:50 | ||
| 17:5018:56 |
रात के घंटे
12·54 मि| 18:5619:50 | ||
| 19:5020:43 | ||
| 20:4321:37 | ||
| 21:3722:30 | ||
| 22:3023:24 | ||
| 23:2400:18 | ||
| 00:1801:11 | ||
| 01:1102:05 | ||
| 02:0502:58 | ||
| 02:5803:52 | ||
| 03:5204:46 | ||
| 04:4605:39 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 1 मई 2025 की तिथि क्या है?
- 1 मई 2025 की तिथि शुक्ल चतुर्थी है।
- 1 मई 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 1 मई 2025 का नक्षत्र मृगशिरा और योग अतिगण्ड है।
- 1 मई 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 05:40 पर तथा सूर्यास्त 18:56 पर होगा।
- 1 मई 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 13:57–15:37 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

