मंगलवार, 11 नवंबर 2025
दैनिक पंचांग
आज मंगलवार है। सप्तमी तिथि 23:09 बजे तक, फिर अष्टमी 22:58 (कल) बजे तक रहेगी। पुष्य नक्षत्र 18:17 बजे तक, उसके बाद आश्लेषा 18:34 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग शुभ 09:43 बजे तक, फिर शुक्ल योग 08:01 (कल) बजे तक। विष्टि करण 11:32 बजे तक, उसके बाद बव 23:09 बजे तक, फिर बालव 10:58 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (14:47 से 16:08) के दौरान टालें। चन्द्रमा कर्क राशि में है और सूर्य तुला राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक कार्तिक
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
कृष्ण सप्तमी
उसी दिन00:08उसी दिन23:09
कृष्ण अष्टमी
उसी दिन23:09अगले दिन22:58
सप्तमी — सामान्यतः सहज और संतुलित तिथि। नियमित कार्यों और यात्रा के लिए शुभ।
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
- अमान्तकार्तिकपूर्णिमान्तमार्गशीर्ष
नक्षत्र · योग · करण
पुष्य
पिछले दिन18:47उसी दिन18:17
आश्लेषा
उसी दिन18:17अगले दिन18:34
लघु नक्षत्र — संक्षिप्त कार्य, छोटी यात्राएँ और संवाद के लिए उपयुक्त।
शुभ
पिछले दिन12:04उसी दिन09:43
शुक्ल
उसी दिन09:43अगले दिन08:01
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
विष्टि
उसी दिन00:08उसी दिन11:32
बव
उसी दिन11:32उसी दिन23:09
बालव
उसी दिन23:09अगले दिन10:58
विष्टि (भद्रा) करण — महत्त्वपूर्ण नए कार्यों के लिए परंपरा में टाला जाता है; सामान्य कार्य चलते हैं।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण सप्तमी · मंगल
11 नव॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 21 मि| 06:4008:01 | ||
| 08:0109:22 | ||
| 09:2210:43 | ||
| 10:4312:05 | ||
| 12:0513:26 | ||
| 13:2614:47 | ||
| 14:4716:08 | ||
| 16:0817:29 |
रात के समय
8·1 घं 39 मि| 17:2919:08 | ||
| 19:0820:47 | ||
| 20:4722:26 | ||
| 22:2600:05 | ||
| 00:0501:44 | ||
| 01:4403:23 | ||
| 03:2305:02 | ||
| 05:0206:41 |
दिन के समय
8·1 घं 21 मि| 06:4008:01 | ||
| 08:0109:22 | ||
| 09:2210:43 | ||
| 10:4312:05 | ||
| 12:0513:26 | ||
| 13:2614:47 | ||
| 14:4716:08 | ||
| 16:0817:29 |
रात के समय
8·1 घं 39 मि| 17:2919:08 | ||
| 19:0820:47 | ||
| 20:4722:26 | ||
| 22:2600:05 | ||
| 00:0501:44 | ||
| 01:4403:23 | ||
| 03:2305:02 | ||
| 05:0206:41 |
| 04:55→05:47 | ||
| 11:43→12:26 | ||
| 12:01→13:35 | ||
| 14:47→16:08 | ||
| 09:22→10:43 | ||
| 12:05→13:26 | ||
| 02:37→04:11 |
दिन के घंटे
12·54 मि| 06:4007:34 | ||
| 07:3408:28 | ||
| 08:2809:22 | ||
| 09:2210:16 | ||
| 10:1611:10 | ||
| 11:1012:05 | ||
| 12:0512:59 | ||
| 12:5913:53 | ||
| 13:5314:47 | ||
| 14:4715:41 | ||
| 15:4116:35 | ||
| 16:3517:29 |
रात के घंटे
12·1 घं 6 मि| 17:2918:35 | ||
| 18:3519:41 | ||
| 19:4120:47 | ||
| 20:4721:53 | ||
| 21:5322:59 | ||
| 22:5900:05 | ||
| 00:0501:11 | ||
| 01:1102:17 | ||
| 02:1703:23 | ||
| 03:2304:29 | ||
| 04:2905:35 | ||
| 05:3506:41 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 11 नवंबर 2025 की तिथि क्या है?
- 11 नवंबर 2025 की तिथि कृष्ण सप्तमी है।
- 11 नवंबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 11 नवंबर 2025 का नक्षत्र पुष्य और योग शुभ है।
- 11 नवंबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:40 पर तथा सूर्यास्त 17:29 पर होगा।
- 11 नवंबर 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 14:47–16:08 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

