रविवार, 28 नवंबर 2027
दैनिक पंचांग
आज रविवार है। अमावस्या तिथि 08:54 बजे तक, फिर प्रतिपदा 09:13 (कल) बजे तक रहेगी। अनुराधा नक्षत्र 18:39 बजे तक, उसके बाद ज्येष्ठा 19:46 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग सुकर्मा 03:03 (कल) बजे तक, फिर धृति योग 02:28 (कल) बजे तक। नाग करण 08:54 बजे तक, उसके बाद किंस्तुघ्न 20:59 बजे तक, फिर बव 09:13 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (16:05 से 17:24) के दौरान टालें। चन्द्रमा वृश्चिक राशि में है और सूर्य वृश्चिक राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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अमावस्या
पिछले दिन 09:07 उसी दिन 08:54
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शुक्ल प्रतिपदा
उसी दिन 08:54 अगले दिन 09:13
पूर्णिमा अथवा अमावस्या — पूर्ण या नव चंद्र की तिथि। भक्ति, समापन और संकल्प के लिए विशेष ऊर्जावान दिन।
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रविवार
रविवार — सूर्य द्वारा शासित। तेज और नेतृत्व का दिन; नेतृत्व कार्य और स्वास्थ्य के लिए शुभ।
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मार्गशीर्ष · पौष
नक्षत्र · योग · करण
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अनुराधा
पिछले दिन 18:04 उसी दिन 18:39
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ज्येष्ठा
उसी दिन 18:39 अगले दिन 19:46
मृदु नक्षत्र — संगीत, मैत्री और चिकित्सा जैसी कोमल गतिविधियों के लिए शुभ।
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सुकर्मा
उसी दिन 04:04 अगले दिन 03:03
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
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नाग
पिछले दिन 20:57 उसी दिन 08:54
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किंस्तुघ्न
उसी दिन 08:54 उसी दिन 20:59
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बव
उसी दिन 20:59 अगले दिन 09:13
स्थिर करण — मास के अंत में ही आते हैं और परिवर्तन का संकेत देते हैं। अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
अमावस्या · रवि
28 नव॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 19 मि| 06:53 08:12 | ||
| 08:12 09:31 | ||
| 09:31 10:50 | ||
| 10:50 12:08 | ||
| 12:08 13:27 | ||
| 13:27 14:46 | ||
| 14:46 16:05 | ||
| 16:05 17:24 |
रात के समय
8 · 1 घं 41 मि| 17:24 19:05 | ||
| 19:05 20:46 | ||
| 20:46 22:27 | ||
| 22:27 00:09 | ||
| 00:09 01:50 | ||
| 01:50 03:31 | ||
| 03:31 05:13 | ||
| 05:13 06:54 |
दिन के समय
8 · 1 घं 19 मि| 06:53 08:12 | ||
| 08:12 09:31 | ||
| 09:31 10:50 | ||
| 10:50 12:08 | ||
| 12:08 13:27 | ||
| 13:27 14:46 | ||
| 14:46 16:05 | ||
| 16:05 17:24 |
रात के समय
8 · 1 घं 41 मि| 17:24 19:05 | ||
| 19:05 20:46 | ||
| 20:46 22:27 | ||
| 22:27 00:09 | ||
| 00:09 01:50 | ||
| 01:50 03:31 | ||
| 03:31 05:13 | ||
| 05:13 06:54 |
| 05:05 → 05:59 | ||
| 11:47 → 12:29 | ||
| 08:00 → 09:38 | ||
| 16:05 → 17:24 | ||
| 12:08 → 13:27 | ||
| 14:46 → 16:05 | ||
| 22:10 → 23:48 |
दिन के घंटे
12 · 53 मि| 06:53 07:46 | ||
| 07:46 08:38 | ||
| 08:38 09:31 | ||
| 09:31 10:23 | ||
| 10:23 11:16 | ||
| 11:16 12:08 | ||
| 12:08 13:01 | ||
| 13:01 13:53 | ||
| 13:53 14:46 | ||
| 14:46 15:38 | ||
| 15:38 16:31 | ||
| 16:31 17:24 |
रात के घंटे
12 · 1 घं 8 मि| 17:24 18:31 | ||
| 18:31 19:39 | ||
| 19:39 20:46 | ||
| 20:46 21:54 | ||
| 21:54 23:01 | ||
| 23:01 00:09 | ||
| 00:09 01:16 | ||
| 01:16 02:24 | ||
| 02:24 03:31 | ||
| 03:31 04:39 | ||
| 04:39 05:46 | ||
| 05:46 06:54 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 28 नवंबर 2027 की तिथि क्या है?
- 28 नवंबर 2027 की तिथि अमावस्या है।
- 28 नवंबर 2027 का नक्षत्र क्या है?
- 28 नवंबर 2027 का नक्षत्र अनुराधा और योग सुकर्मा है।
- 28 नवंबर 2027 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:53 पर तथा सूर्यास्त 17:24 पर होगा।
- 28 नवंबर 2027 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 16:05–17:24 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।