बुधवार, 1 अक्टूबर 2025
दैनिक पंचांग
आज बुधवार है। नवमी तिथि 19:01 बजे तक, फिर दशमी 19:11 (कल) बजे तक रहेगी। पूर्व आषाढ़ा नक्षत्र 08:05 बजे तक, उसके बाद उत्तर आषाढ़ा 09:12 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग अतिगण्ड 00:32 (कल) बजे तक, फिर सुकर्मा योग 23:27 (कल) बजे तक। बालव करण 06:39 बजे तक, उसके बाद कौलव 19:01 बजे तक, फिर तैतिल 07:12 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (12:10 से 13:39) के दौरान टालें। चन्द्रमा धनु राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल नवमी
पिछले दिन 18:06 उसी दिन 19:01
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शुक्ल दशमी
उसी दिन 19:01 अगले दिन 19:11
नवमी — दुर्गा को समर्पित। साधना के लिए श्रेष्ठ; बड़े नए कार्य परंपरा में टाले जाते हैं।
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बुधवार
बुधवार — बुध द्वारा शासित। संवाद और बुद्धि का दिन; अध्ययन, लेखन और व्यापार के लिए शुभ।
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आश्विन · कार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
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पूर्व आषाढ़ा
पिछले दिन 06:17 उसी दिन 08:05
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उत्तर आषाढ़ा
उसी दिन 08:05 अगले दिन 09:12
उग्र नक्षत्र — बड़े नए आरंभ के लिए परंपरा में टाला जाता है; पूर्णता और परिवर्तन के कार्यों के लिए उपयुक्त।
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अतिगण्ड
उसी दिन 01:01 अगले दिन 00:32
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
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बालव
पिछले दिन 18:06 उसी दिन 06:39
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कौलव
उसी दिन 06:39 उसी दिन 19:01
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तैतिल
उसी दिन 19:01 अगले दिन 07:12
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल नवमी · बुध
1 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8 · 1 घं 29 मि| 06:14 07:43 | ||
| 07:43 09:12 | ||
| 09:12 10:41 | ||
| 10:41 12:10 | ||
| 12:10 13:39 | ||
| 13:39 15:08 | ||
| 15:08 16:37 | ||
| 16:37 18:07 |
रात के समय
8 · 1 घं 31 मि| 18:07 19:38 | ||
| 19:38 21:08 | ||
| 21:08 22:39 | ||
| 22:39 00:10 | ||
| 00:10 01:41 | ||
| 01:41 03:12 | ||
| 03:12 04:43 | ||
| 04:43 06:14 |
दिन के समय
8 · 1 घं 29 मि| 06:14 07:43 | ||
| 07:43 09:12 | ||
| 09:12 10:41 | ||
| 10:41 12:10 | ||
| 12:10 13:39 | ||
| 13:39 15:08 | ||
| 15:08 16:37 | ||
| 16:37 18:07 |
रात के समय
8 · 1 घं 31 मि| 18:07 19:38 | ||
| 19:38 21:08 | ||
| 21:08 22:39 | ||
| 22:39 00:10 | ||
| 00:10 01:41 | ||
| 01:41 03:12 | ||
| 03:12 04:43 | ||
| 04:43 06:14 |
| 04:37 → 05:25 | ||
| 02:56 → 04:39 | ||
| 12:10 → 13:39 | ||
| 07:43 → 09:12 | ||
| 10:41 → 12:10 | ||
| 16:36 → 18:19 |
दिन के घंटे
12 · 59 मि| 06:14 07:13 | ||
| 07:13 08:12 | ||
| 08:12 09:12 | ||
| 09:12 10:11 | ||
| 10:11 11:11 | ||
| 11:11 12:10 | ||
| 12:10 13:10 | ||
| 13:10 14:09 | ||
| 14:09 15:08 | ||
| 15:08 16:08 | ||
| 16:08 17:07 | ||
| 17:07 18:07 |
रात के घंटे
12 · 1 घं 1 मि| 18:07 19:07 | ||
| 19:07 20:08 | ||
| 20:08 21:08 | ||
| 21:08 22:09 | ||
| 22:09 23:10 | ||
| 23:10 00:10 | ||
| 00:10 01:11 | ||
| 01:11 02:12 | ||
| 02:12 03:12 | ||
| 03:12 04:13 | ||
| 04:13 05:14 | ||
| 05:14 06:14 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 1 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
- 1 अक्टूबर 2025 की तिथि शुक्ल नवमी है।
- 1 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 1 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र पूर्व आषाढ़ा और योग अतिगण्ड है।
- 1 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:14 पर तथा सूर्यास्त 18:07 पर होगा।
- 1 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 12:10–13:39 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।