आज मंगलवार है, कृष्ण पक्ष चल रहा है। आज धनतेरस है। द्वादशी तिथि सुबह तक है, फिर त्रयोदशी शुरू होगी। द्वादशी पर एकादशी का व्रत खोला जाता है। यह शांत और विश्राम की तिथि है। चन्द्रमा उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र में शाम तक है, फिर हस्त में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 11:42 से 12:26 बजे तक, और राहु काल में न करें, 14:51 से 16:14 बजे तक। चन्द्रमा कन्या राशि में है और सूर्य तुला राशि में।
यम दीप और धन्वंतरि पूजन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में; ख़रीदारी दिन भर की जाती है।
पाँच दिवसीय दीपावली की पहली संध्या — काली चौदस से एक शाम पहले, प्रदोष काल में जब त्रयोदशी तिथि हो। सोना-चाँदी या नया बर्तन ख़रीदा जाता है, यम के लिए दीप रखा जाता है और आरोग्य देवता धन्वंतरि की पूजा होती है।
इस दिन के अन्य पर्व
🪔
यम दीपदान
अन्य नाम: यम दीप दान
धनतेरस की संध्या को घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर यमराज के लिए एक दीप रखा जाता है, ताकि वर्ष भर परिवार अकाल मृत्यु से सुरक्षित रहे।
🏺
धन्वंतरि जयंती
अन्य नाम: धन्वंतरि त्रयोदशी
समुद्र मंथन में इसी त्रयोदशी को देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए। वैद्य और गृहस्थ आरोग्य के लिए उनकी पूजा करते हैं; भारत इसे राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाता है।
✦
पुरुषोत्तम मास
·
अधिक आश्विन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
तिथिहिन्दू पंचांग का चान्द्र दिवस — सूर्य और चंद्र के बीच की दूरी से मापा जाता है। पर्व ग्रेगोरियन तिथि के बजाय किसी विशेष तिथि (एकादशी, पूर्णिमा…) पर पड़ते हैं।शब्दावली में और जानें
कृष्ण द्वादशी
पिछले दिन07:51उसी दिन10:32तक
फिर
कृष्ण त्रयोदशी
उसी दिन10:32→अगले दिन13:15
द्वादशी — एकादशी व्रत की समाप्ति। शांत और पुनःस्थापन की तिथि।
वारसप्ताह का दिन, जिसका शासक सात पारंपरिक ग्रहों में से एक होता है — रवि/सूर्य, सोम/चंद्र, और इसी क्रम में। प्रत्येक वार अपने स्वामी ग्रह का स्वभाव वहन करता है।शब्दावली में और जानें
मंगलवार
मंगलवार — मंगल द्वारा शासित। ऊर्जावान और साहसी दिन; कर्म और शारीरिक कार्य के लिए शुभ, संवेदनशील मामलों के लिए कम।
चान्द्र मासहिन्दू चान्द्र पंचांग का मास। दो परंपराएँ साथ-साथ चलती हैं — अमान्त अमावस्या से, पूर्णिमान्त पूर्णिमा से आरंभ होती है — इसलिए क्षेत्र अनुसार एक ही मास के दो नाम होते हैं।शब्दावली में और जानें
अमान्तआश्विन
पूर्णिमान्तकार्तिक
नक्षत्र · योग · करण
नक्षत्रवर्तमान में जिस नक्षत्र में चंद्र स्थित है, वह नक्षत्र। आकाश को 27 नक्षत्रों में बाँटा गया है; प्रत्येक के अपने गुण होते हैं जो जन्म-कुंडली और शुभ मुहूर्त चुनने में उपयोग होते हैं।शब्दावली में और जानें
उत्तर फाल्गुनी
पिछले दिन15:23उसी दिन18:33तक
फिर
हस्त
उसी दिन18:33→अगले दिन21:43
स्थिर नक्षत्र — दीर्घकालिक संकल्प, नींव और स्थायी क्रय के लिए श्रेष्ठ।
योगसूर्य-चंद्र का एक संयोग, जो दिन के स्वभाव को रंग देता है। 27 योगों में से लगभग आधे शुभ माने जाते हैं, शेष में संयम अपेक्षित है।शब्दावली में और जानें
ऐन्द्र
पिछले दिन06:46उसी दिन07:46तक
फिर
वैधृति
उसी दिन07:46→अगले दिन08:50
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
करणतिथि का आधा भाग — हर चान्द्र दिवस में क्रमशः दो करण होते हैं। तिथि से अधिक सूक्ष्म समय-गणना के लिए उपयोगी।शब्दावली में और जानें
तैतिल
पिछले दिन21:10उसी दिन10:32तक
फिर
गर
उसी दिन10:32→उसी दिन23:54
फिर
वणिज
उसी दिन23:54→अगले दिन13:15
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
चौघड़ियाउत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।शब्दावली में और जानें
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
गौरी पंचांगम्दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।शब्दावली में और जानें
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
शुभ व अशुभदिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।शब्दावली में और जानें
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
होरादिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।शब्दावली में और जानें
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
कृष्ण द्वादशी · मंगल
29 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
शुभमिला-जुलाबचें
☀️
दिन के समय
8·1 घं 23 मि
रोगरोग — महत्त्वपूर्ण कार्य टालें, विशेषकर स्वास्थ्य-सम्बन्धित।शब्दावली में और जानें