शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025
दैनिक पंचांग
आज शुक्रवार है। एकादशी तिथि 18:33 बजे तक, फिर द्वादशी 17:09 (कल) बजे तक रहेगी। श्रवण नक्षत्र 09:33 बजे तक, उसके बाद धनिष्ठा 09:08 (कल) बजे तक रहेगा। आज का योग धृति 21:44 बजे तक, फिर शूल योग 19:25 (कल) बजे तक। वणिज करण 06:58 बजे तक, उसके बाद विष्टि 18:33 बजे तक, फिर बव 05:57 (कल) बजे तक। महत्त्वपूर्ण नए कार्य राहु काल (10:41 से 12:09) के दौरान टालें। चन्द्रमा मकर राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आश्विन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
पापांकुशा एकादशी
पिछले दिन19:11उसी दिन18:33
शुक्ल द्वादशी
उसी दिन18:33अगले दिन17:09
एकादशी — अनेक लोगों के लिए उपवास का दिन। आध्यात्मिक रूप से महत्त्वपूर्ण और आत्म-चिंतन की तिथि।
शुक्रवार
शुक्रवार — शुक्र द्वारा शासित। सौम्य और सुखद दिन; कला, सम्बन्ध और सौंदर्य-सम्बन्धित कार्यों के लिए शुभ।
- अमान्तआश्विनपूर्णिमान्तआश्विन
नक्षत्र · योग · करण
श्रवण
पिछले दिन09:12उसी दिन09:33
धनिष्ठा
उसी दिन09:33अगले दिन09:08
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
धृति
पिछले दिन23:27उसी दिन21:44
शूल
उसी दिन21:44अगले दिन19:25
शुभ योग — आज सूर्य और चंद्र का संयोग अनुकूल है। अधिकांश नए आरंभ के लिए सहायक माना जाता है।
वणिज
पिछले दिन19:11उसी दिन06:58
विष्टि
उसी दिन06:58उसी दिन18:33
बव
उसी दिन18:33अगले दिन05:57
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल एकादशी · शुक्र
3 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 29 मि| 06:1507:43 | ||
| 07:4309:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:09 | ||
| 12:0913:38 | ||
| 13:3815:07 | ||
| 15:0716:36 | ||
| 16:3618:04 |
रात के समय
8·1 घं 31 मि| 18:0419:36 | ||
| 19:3621:07 | ||
| 21:0722:38 | ||
| 22:3800:10 | ||
| 00:1001:41 | ||
| 01:4103:12 | ||
| 03:1204:44 | ||
| 04:4406:15 |
दिन के समय
8·1 घं 29 मि| 06:1507:43 | ||
| 07:4309:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:09 | ||
| 12:0913:38 | ||
| 13:3815:07 | ||
| 15:0716:36 | ||
| 16:3618:04 |
रात के समय
8·1 घं 31 मि| 18:0419:36 | ||
| 19:3621:07 | ||
| 21:0722:38 | ||
| 22:3800:10 | ||
| 00:1001:41 | ||
| 01:4103:12 | ||
| 03:1204:44 | ||
| 04:4406:15 |
| 04:37→05:26 | ||
| 11:46→12:33 | ||
| 23:00→00:38 | ||
| 10:41→12:09 | ||
| 15:07→16:36 | ||
| 07:43→09:12 | ||
| 13:16→14:53 |
दिन के घंटे
12·59 मि| 06:1507:14 | ||
| 07:1408:13 | ||
| 08:1309:12 | ||
| 09:1210:11 | ||
| 10:1111:10 | ||
| 11:1012:09 | ||
| 12:0913:09 | ||
| 13:0914:08 | ||
| 14:0815:07 | ||
| 15:0716:06 | ||
| 16:0617:05 | ||
| 17:0518:04 |
रात के घंटे
12·1 घं 1 मि| 18:0419:05 | ||
| 19:0520:06 | ||
| 20:0621:07 | ||
| 21:0722:08 | ||
| 22:0823:09 | ||
| 23:0900:10 | ||
| 00:1001:11 | ||
| 01:1102:12 | ||
| 02:1203:12 | ||
| 03:1204:13 | ||
| 04:1305:14 | ||
| 05:1406:15 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 3 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
- 3 अक्टूबर 2025 की तिथि शुक्ल एकादशी है।
- 3 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 3 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र श्रवण और योग धृति है।
- 3 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- दिल्ली में सूर्योदय 06:15 पर तथा सूर्यास्त 18:04 पर होगा।
- 3 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
- दिल्ली में राहु काल 10:41–12:09 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।

