शनिवार, 4 अक्टूबर 2025
दैनिक पंचांग
आज शनिवार है, शुक्ल पक्ष चल रहा है। द्वादशी तिथि शाम तक है, फिर त्रयोदशी शुरू होगी। द्वादशी पर एकादशी का व्रत खोला जाता है। यह शांत और विश्राम की तिथि है। चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में सुबह तक है, फिर शतभिषा में। नया काम अभिजित मुहूर्त में शुरू करें, 11:46 से 12:33 बजे तक, और राहु काल में न करें, 09:12 से 10:41 बजे तक। चन्द्रमा कुम्भ राशि में है और सूर्य कन्या राशि में।
पुरुषोत्तम मास
अधिक आश्विन
पवित्र चंद्र अधिक मास — उपवास, दान और भक्ति-साधना का काल।
तिथि · वार · चान्द्र मास
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शुक्ल द्वादशी
पिछले दिन 18:33 उसी दिन 17:09 तक
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फिर
शुक्ल त्रयोदशी
उसी दिन 17:09 अगले दिन 15:04
द्वादशी — एकादशी व्रत की समाप्ति। शांत और पुनःस्थापन की तिथि।
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शनिवार
शनिवार — शनि द्वारा शासित। अनुशासित और गंभीर दिन; अधूरे कार्य पूर्ण करने के लिए उपयुक्त, नए आरंभ के लिए कम।
- अमान्तआश्विनपूर्णिमान्तआश्विन
नक्षत्र · योग · करण
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धनिष्ठा
पिछले दिन 09:33 उसी दिन 09:08 तक
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फिर
शतभिषा
उसी दिन 09:08 अगले दिन 08:00
चर नक्षत्र — यात्रा, बदलाव और स्थान-परिवर्तन के लिए शुभ।
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शूल
पिछले दिन 21:44 उसी दिन 19:25 तक
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फिर
गण्ड
उसी दिन 19:25 अगले दिन 16:33
अशुभ योग — आज सूर्य-चंद्र की ऊर्जाएँ विरोधी हैं। बड़े नए उपक्रम परंपरा में टाले जाते हैं।
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बालव
उसी दिन 05:57 उसी दिन 17:09 तक
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फिर
कौलव
उसी दिन 17:09 अगले दिन 04:11
चर करण — सामान्य दिनचर्या वाला आधा-तिथि भाग। अधिकांश नियमित कार्यों के लिए उपयुक्त।
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एक नज़र में दिन
यहाँ आज पंचांग के समय खंड परिभाषित नहीं हैं
चोघड़िया, गौरी एवं राहु काल — सभी स्थानीय दिन-प्रकाश को आठ बराबर भागों में विभाजित करते हैं। बहुत उच्च अक्षांश (~66° से ऊपर) पर सूर्य दिन-भर डूबे या उगे रह सकता है, अतः इस तिथि के लिए स्थानीय सूर्योदय/सूर्यास्त की जोड़ी उपलब्ध नहीं है। ऊपर दी गई तिथि, नक्षत्र एवं योग की गणना यथावत मान्य है।
उत्तर भारतीय समय-प्रणाली: दिन की आठ और रात की आठ अवधियाँ, प्रत्येक शुभ, सामान्य या अशुभ चिह्नित। दैनिक कार्य का स्लॉट चुनने (या टालने) का त्वरित उपाय।
दक्षिण भारतीय परंपरा जिसमें दिन और रात को आठ-आठ गौरी अवधियों में बाँटा जाता है — दैनिक कार्यों के लिए शुभ समय चुनने में सहायक।
दिन के छह सबसे महत्त्वपूर्ण मुहूर्तों का संक्षिप्त संग्रह — तीन शुभ (ब्रह्म, अभिजित, अमृत) और तीन अशुभ (राहु, यमगण्ड, गुलिक)। कुछ दिनों पर एक अवधि की गणना संभव न होने पर कम भी दिख सकते हैं।
दिन और रात प्रत्येक बारह होरा (ग्रह-घंटों) में बँटते हैं, हर एक का स्वामी ग्रह होता है। स्वामी ग्रह उस घंटे का स्वभाव तय करता है — कार्य के अनुकूल स्वामी वाला घंटा चुनें।
शुक्ल द्वादशी · शनि
4 अक्टू॰
दैनिक पंचांग
दिन के समय
8·1 घं 28 मि| 06:1507:44 | ||
| 07:4409:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:09 | ||
| 12:0913:38 | ||
| 13:3815:06 | ||
| 15:0616:35 | ||
| 16:3518:03 |
रात के समय
8·1 घं 32 मि| 18:0319:35 | ||
| 19:3521:06 | ||
| 21:0622:38 | ||
| 22:3800:09 | ||
| 00:0901:41 | ||
| 01:4103:13 | ||
| 03:1304:44 | ||
| 04:4406:16 |
दिन के समय
8·1 घं 28 मि| 06:1507:44 | ||
| 07:4409:12 | ||
| 09:1210:41 | ||
| 10:4112:09 | ||
| 12:0913:38 | ||
| 13:3815:06 | ||
| 15:0616:35 | ||
| 16:3518:03 |
रात के समय
8·1 घं 32 मि| 18:0319:35 | ||
| 19:3521:06 | ||
| 21:0622:38 | ||
| 22:3800:09 | ||
| 00:0901:41 | ||
| 01:4103:13 | ||
| 03:1304:44 | ||
| 04:4406:16 |
| 04:38→05:26 | ||
| 11:46→12:33 | ||
| 22:55→00:30 | ||
| 09:12→10:41 | ||
| 13:38→15:06 | ||
| 06:15→07:44 | ||
| 13:29→15:04 |
दिन के घंटे
12·59 मि| 06:1507:14 | ||
| 07:1408:13 | ||
| 08:1309:12 | ||
| 09:1210:11 | ||
| 10:1111:10 | ||
| 11:1012:09 | ||
| 12:0913:08 | ||
| 13:0814:07 | ||
| 14:0715:06 | ||
| 15:0616:05 | ||
| 16:0517:04 | ||
| 17:0418:03 |
रात के घंटे
12·1 घं 1 मि| 18:0319:04 | ||
| 19:0420:05 | ||
| 20:0521:06 | ||
| 21:0622:07 | ||
| 22:0723:08 | ||
| 23:0800:09 | ||
| 00:0901:10 | ||
| 01:1002:12 | ||
| 02:1203:13 | ||
| 03:1304:14 | ||
| 04:1405:15 | ||
| 05:1506:16 |
लाहिरी अयनांश और दृक् गणित (वास्तविक स्थिति) पद्धति से गणना।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- 4 अक्टूबर 2025 की तिथि क्या है?
- 4 अक्टूबर 2025 की तिथि शुक्ल द्वादशी है।
- 4 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र क्या है?
- 4 अक्टूबर 2025 का नक्षत्र धनिष्ठा और योग शूल है।
- 4 अक्टूबर 2025 को सूर्योदय और सूर्यास्त कब है?
- नई दिल्ली में सूर्योदय 06:15 पर तथा सूर्यास्त 18:03 पर होगा।
- 4 अक्टूबर 2025 को राहु काल कब है?
- नई दिल्ली में राहु काल 09:12–10:41 के बीच रहेगा। इस दौरान महत्त्वपूर्ण नए कार्य आरंभ करने से बचा जाता है।



