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व्यापार आरंभ मुहूर्त 2023

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2023

3 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
16
17
19
20
21
23
24
25
26
27
28
29
30
31
सर्वोत्तम दिनशुभ

बुधवार, 18 जनवरी 2023

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त15:0917:23
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त2 घं 14 मि
शुभ मुहूर्त07:1408:33
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 19 मि
नक्षत्र
अनुराधा
तिथि
कृष्ण एकादशी
योग
वृद्धि
करण
बालव

यह दिन क्यों शुभ

  • अनुराधा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • कृष्ण एकादशी — अनुकूल तिथि
  • अमृत सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता
  • सर्वार्थ सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता

वर्जित समय

  • राहु काल12:31–13:50
  • यमगण्ड08:33–09:53
  • गुलिक काल11:12–12:31
  • वर्ज्यम्22:33–00:03
पूरा पंचांग देखें

88 शुभ दिन

2023 में सर्वाधिक शुभ व्यापार आरंभ तिथियाँ।

जनवरी2023

3 शुभ दिन
  1. 15
  2. 18

    बुधवार, 18 जनवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3315:09 – 17:23
    अनुराधाकृष्ण एकादशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 22

फ़रवरी2023

4 शुभ दिन
  1. 3

    शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:08 – 08:3009:51 – 11:1312:35 – 13:5616:40 – 18:01
    पुनर्वसुशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  2. 10
  3. 24

    शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:51 – 08:1709:43 – 11:0812:34 – 14:0016:51 – 18:17
    अश्विनीशुक्ल पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  4. 27

    सोमवार, 27 फ़रवरी 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त16:13 – 18:19
    रोहिणीशुक्ल अष्टमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

मार्च2023

7 शुभ दिन
  1. 1

    बुधवार, 1 मार्च 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:46 – 08:13
    मृगशिराशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 10
  6. 13
  7. 22

    बुधवार, 22 मार्च 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:23 – 07:5409:25 – 10:5713:59 – 18:33
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल · 1गुड़ी पड़वापूरा पंचांग देखें

अप्रैल2023

5 शुभ दिन
  1. 15
  2. 20

    गुरुवार, 20 अप्रैल 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त10:43 – 13:5717:12 – 18:49
    अश्विनीशुक्ल प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 22

    शनिवार, 22 अप्रैल 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:26 – 09:0410:42 – 11:1212:50 – 13:5715:35 – 18:50
    कृत्तिकाशुक्ल · 3अक्षय तृतीयापूरा पंचांग देखें
  4. 23
  5. 26

मई2023

11 शुभ दिन
  1. 3

    बुधवार, 3 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:13 – 07:1915:37 – 18:57
    हस्तशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 7
  3. 10
  4. 11
  5. 12

    शुक्रवार, 12 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:32 – 07:1308:55 – 10:3612:17 – 13:5817:21 – 19:02
    श्रवणकृष्ण सप्तमीपूरा पंचांग देखें
  6. 17
  7. 21
  8. 22

    सोमवार, 22 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:27 – 07:0908:52 – 10:35
    मृगशिराशुक्ल तृतीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  9. 24
  10. 25

    गुरुवार, 25 मई 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त10:35 – 14:0117:27 – 17:54
    पुष्यशुक्ल षष्ठीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  11. 29

जून2023

8 शुभ दिन
  1. 1
  2. 2
  3. 8
  4. 21
  5. 26
  6. 28
  7. 29
  8. 30

जुलाई2023

4 शुभ दिन
  1. 1
  2. 5
  3. 14

    शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:59 – 10:4312:26 – 13:5617:37 – 19:21
    रोहिणीकृष्ण द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  4. 15

अगस्त2023

5 शुभ दिन
  1. 19

    शनिवार, 19 अगस्त 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त08:48 – 09:0812:24 – 14:0215:40 – 17:18
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें
  2. 21

    सोमवार, 21 अगस्त 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:53 – 07:3109:08 – 10:4615:39 – 18:55
    चित्राशुक्ल पंचमीपूरा पंचांग देखें
  3. 23
  4. 24
  5. 28

    सोमवार, 28 अगस्त 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:56 – 07:3309:09 – 10:4515:35 – 18:47
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल द्वादशीपूरा पंचांग देखें

सितंबर2023

13 शुभ दिन
  1. 4
  2. 6

    बुधवार, 6 सितंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त15:28 – 18:37
    रोहिणीकृष्ण सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 7
  4. 10
  5. 11

    सोमवार, 11 सितंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:03 – 07:3709:10 – 10:4415:24 – 18:31
    पुष्यकृष्ण द्वादशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  6. 15

    शुक्रवार, 15 सितंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:09 – 07:3809:11 – 10:4312:16 – 12:5516:54 – 18:26
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल प्रतिपदापूरा पंचांग देखें
  7. 16
  8. 17

    रविवार, 17 सितंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:39 – 12:1513:47 – 15:20
    हस्तशुक्ल द्वितीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  9. 18
  10. 20
  11. 21

    गुरुवार, 21 सितंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त10:42 – 13:45
    अनुराधाशुक्ल षष्ठीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  12. 24
  13. 25

अक्टूबर2023

9 शुभ दिन
  1. 1

    रविवार, 1 अक्टूबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:43 – 12:1013:39 – 15:09
    अश्विनीकृष्ण द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 4

    बुधवार, 4 अक्टूबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:15 – 06:44
    रोहिणीकृष्ण षष्ठीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 7
  4. 8

    रविवार, 8 अक्टूबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त10:41 – 12:0813:36 – 15:04
    पुष्यकृष्ण दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगरवि पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  5. 12

    गुरुवार, 12 अक्टूबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त11:37 – 13:3416:28 – 17:55
    उत्तर फाल्गुनीकृष्ण त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  6. 15
  7. 16

    सोमवार, 16 अक्टूबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:22 – 07:4809:14 – 10:4014:58 – 17:51
    स्वातिशुक्ल द्वितीयापूरा पंचांग देखें
  8. 22

    रविवार, 22 अक्टूबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त08:59 – 12:0513:30 – 14:55
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल अष्टमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  9. 24

    मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:27 – 09:1610:40 – 12:0513:29 – 14:5416:18 – 17:43
    धनिष्ठाशुक्ल · 10दशहरापूरा पंचांग देखें

नवंबर2023

13 शुभ दिन
  1. 3

    शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:34 – 07:5609:19 – 10:4112:04 – 13:2716:12 – 17:34
    पुनर्वसुकृष्ण षष्ठीपूरा पंचांग देखें
  2. 4
  3. 5

    रविवार, 5 नवंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:57 – 10:30
    पुष्यकृष्ण अष्टमीसर्वार्थ सिद्धि योगरवि पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  4. 9
  5. 10

    शुक्रवार, 10 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:39 – 07:0809:22 – 10:4312:04 – 13:2616:08 – 17:30
    हस्तकृष्ण द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  6. 11
  7. 12

    रविवार, 12 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:40 – 07:3909:19 – 12:0513:26 – 14:4717:29 – 19:53
    स्वातिकृष्ण · 15दीवालीपूरा पंचांग देखें
  8. 14

    मंगलवार, 14 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:42 – 07:2409:00 – 09:2310:44 – 12:0513:26 – 14:4616:07 – 17:28
    अनुराधाशुक्ल · 1गोवर्धन पूजापूरा पंचांग देखें
  9. 18

    शनिवार, 18 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:05 – 08:5410:45 – 13:2614:46 – 17:26
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल · 5लाभ पंचमपूरा पंचांग देखें
  10. 19
  11. 25
  12. 27
  13. 29

    बुधवार, 29 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:54 – 08:13
    मृगशिराकृष्ण द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

दिसंबर2023

6 शुभ दिन
  1. 1
  2. 2
  3. 7
  4. 8

    शुक्रवार, 8 दिसंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:01 – 08:1909:36 – 10:5412:12 – 13:3016:06 – 17:24
    हस्तकृष्ण एकादशीपूरा पंचांग देखें
  5. 9
  6. 15

    शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:40 – 10:5812:16 – 13:3316:08 – 17:26
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें

व्यापार आरंभ मुहूर्त के बारे में

व्यापार मुहूर्त दुकान, कार्यालय या नए व्यवसाय के उद्घाटन का समय तय करता है, ताकि व्यापार लाभ के नक्षत्रों के नीचे आरंभ हो। वारों में बुध का बुधवार व गुरु का गुरुवार अग्रणी हैं, नक्षत्रों में धन-तारा पुष्य (गुरुवार को पुष्य = गुरु पुष्य, उद्घाटन का सर्वोच्च दिन), और दिन के भीतर परंपरा शुभ चौघड़िया माँगती है — सर्वोपरि लाभ, 'मुनाफ़े' का खंड। नए आरंभ हेतु पंचक वर्जित है, और उद्घाटन खरमास व अधिक मास में रुकते हैं।

व्यापार आरंभ मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • तेरह नक्षत्र मान्य हैं — अश्विनी से श्रवण तक के लघु, मृदु, चर व ध्रुव गण, तथा धनिष्ठा का पंचक-मुक्त पूर्वार्ध — जिनमें धन-तारा पुष्य सबसे प्रबल; गुरु पुष्य (गुरुवार को पुष्य) उद्घाटन का सर्वोच्च दिन है।
  • रिक्ता को छोड़ हर तिथि मान्य है: शास्त्रीय शुभ तिथियाँ (द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी) 'सर्वाधिक शुभ' स्तर पर, जबकि प्रतिपदा, षष्ठी, अष्टमी व द्वादशी 'शुभ' स्तर पर।
  • बुधवार (बुध — व्यापार के स्वामी) व गुरुवार (बृहस्पति — धन के स्वामी) अग्रणी हैं, साथ में सोम व शुक्र; रवि व शनि दुर्बल-किंतु-मान्य 'शुभ' स्तर पर। केवल मंगलवार वर्जित है।
  • पंचक — धनिष्ठा के मध्य (चंद्रमा के कुंभ-प्रवेश) से रेवती तक — हर समय में से काट दिया जाता है, नए कार्यों की प्रचलित पंचांग-परंपरा अनुसार (शास्त्रीय पंचक-नियम यात्रा व गृह-कार्य गिनाते हैं; उद्घाटन पर रोक पंचांगों की सतर्क परिपाटी है)। शतभिषा, उत्तरा भाद्रपद व रेवती पूर्णतः इसी में आते हैं, अतः कभी मान्य नहीं होते। उद्घाटन खरमास व अधिक मास में भी रुकते हैं। (चातुर्मास परंपरा में सलाह-स्तर की सावधानी है, प्रतिबंध नहीं — उसकी तिथियाँ सूचीबद्ध हैं।)
  • प्रत्येक दिन का समय शुभ चौघड़ियों तक सीमित है — जिनमें लाभ, बुध का 'मुनाफ़े' वाला खंड, व्यापार का विशिष्ट समय है। चौघड़िया लोकप्रिय पंचांग-विधि है; शास्त्र व्यापार का समय लग्न में बुध के बल से तय करते हैं।
  • छह पर्व-दिन पर्व के अपने प्रमाण से सूचीबद्ध होते हैं, सामान्य नियम चाहे जो कहें: दीपावली का लक्ष्मी–चोपड़ा पूजन — जिसे धर्मसिंधु स्वयं कार्तिक अमावस्या को, प्रदोष काल में विहित करती है — साथ में बलि प्रतिपदा व लाभ पंचम, व्यापारी नववर्ष के दिन, तथा साढ़े तीन मुहूर्त के दिन गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया व विजयादशमी।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुकान या व्यवसाय खोलने का सबसे अच्छा दिन कौन सा है?
बुधवार व गुरुवार अग्रणी हैं — बुध व्यापार के और बृहस्पति धन के स्वामी हैं — साथ में सोम व शुक्र। उद्घाटन का सर्वोच्च दिन गुरु पुष्य है: गुरुवार को पुष्य नक्षत्र।
लाभ चौघड़िया क्या है और क्यों महत्त्वपूर्ण है?
चौघड़िया दिन को लगभग 90-90 मिनट के आठ खंडों में बाँटता है; लाभ — 'मुनाफ़ा', बुध का खंड — व्यापार का विशिष्ट समय है। यहाँ दिया गया प्रत्येक समय पहले से ही शुभ खंडों (अमृत, शुभ, लाभ, चल) तक सीमित है, अतः उद्घाटन की घड़ी कार्ड से सीधे पढ़ी जा सकती है।
पंचक में तिथियाँ क्यों नहीं हैं?
नया व्यवसाय आरंभ करना पंचक-वर्जित कार्यों में है — परंपरा इसे हानि से जोड़ती है। पंचक चंद्रमा के कुंभ व मीन में रहते चलता है — धनिष्ठा के मध्य से रेवती तक — और वे खंड यहाँ हर समय में से काट दिए जाते हैं (पंचक-रहित पद्धति)।
क्या चातुर्मास उद्घाटन रोकता है?
यह प्रतिबंध नहीं, सलाह-स्तर की सावधानी है: उद्घाटन-परंपरा खरमास व अधिक मास में दृढ़ता से रुकती है — दोनों यहाँ हटाए गए हैं — जबकि चातुर्मास की तिथियाँ सूचीबद्ध रहती हैं; जो परिवार इसे कठोरता से मानते हैं, वे उसके बाहर की तिथि चुन सकते हैं।
दीपावली अमावस्या को पड़ती है — अमावस्या वर्जित है तो वह सूचीबद्ध क्यों?
क्योंकि लक्ष्मी–चोपड़ा पूजन कोई चुनी हुई तिथि नहीं है: धर्मसिंधु लक्ष्मी पूजन को कार्तिक अमावस्या को ही, प्रदोष काल में विहित करती है। अमावस्या का निषेध सामान्य दिनों के चुनाव-नियमों का है; पर्व-निश्चित विधि को उसकी अपनी तिथि ही सिद्ध करती है। उस दिन पर दीपावली का चिह्न रहता है और उसके मुहूर्त में प्रदोष काल सम्मिलित है — यही बलि प्रतिपदा व लाभ पंचम, व्यापारी नववर्ष के दिनों, पर भी लागू होता है।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।