- मुंडन की सही आयु क्या है?
- शास्त्र पहला चूड़ाकरण शिशु की विषम आयु में बताते हैं — प्रायः पहले या तीसरे वर्ष में।
- मुंडन में ज्येष्ठा नक्षत्र क्यों लिया गया है?
- ज्येष्ठा तीक्ष्ण नक्षत्र है, जो सौम्य संस्कारों में सामान्यतः वर्जित है — किंतु धर्मसिंधु परंपरा इसे विशेष रूप से मुंडन हेतु स्वीकार करती है; यह मुंडन के लघु-मृदु समूह का एकमात्र अपवाद है।
- मुंडन के कैलेंडर में लंबे ऋतु-अंतराल क्यों दिखते हैं?
- शास्त्र प्रथम मुंडन को उत्तरायण तक सीमित करते हैं — सूर्य का उत्तर मार्ग, लगभग मध्य जनवरी से मध्य जुलाई — अतः वर्ष का उत्तरार्ध पूरी तरह रिक्त रहता है। उस अवधि में भी कैलेंडर खरमास, चातुर्मास, अधिक मास और गुरु या शुक्र के अस्त काल में रुकता है, और हर मुहूर्त सुबह का है — बी.वी. रमन के शब्दों में: 'मुंडन सदा पूर्वाह्न में ही हो'।
- क्या मुंडन कृष्ण पक्ष में हो सकता है?
- ये तिथियाँ कठोर नियम रखती हैं: केवल शुक्ल पक्ष सूचीबद्ध है, क्योंकि बढ़ता चंद्रमा शिशु के वृद्धि-संस्कारों के अनुकूल है।
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।