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सगाई मुहूर्त 2023

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2023

6 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
19
20
21
23
24
28
29
31
सर्वोत्तम दिनशुभ

शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त09:5211:13
दिन का शुभ मुहूर्त1 घं 21 मि
नक्षत्र
रेवती
तिथि
शुक्ल सप्तमी
योग
सिद्ध
करण
गर

यह दिन क्यों शुभ

  • रेवती — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • शुक्ल सप्तमी — अनुकूल तिथि
  • अमृत सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता
  • सर्वार्थ सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल

वर्जित समय

  • राहु काल11:13–12:33
  • यमगण्ड15:14–16:35
  • गुलिक काल08:32–09:52
  • वर्ज्यम्06:47–08:22
पूरा पंचांग देखें

49 शुभ दिन

2023 में सर्वाधिक शुभ सगाई तिथियाँ।

जनवरी2023

6 शुभ दिन
  1. 18

    बुधवार, 18 जनवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3309:53 – 11:1213:50 – 17:23
    अनुराधाकृष्ण एकादशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 22
  3. 25
  4. 26

    गुरुवार, 26 जनवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:32 – 09:5211:13 – 13:5415:14 – 07:12
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल पंचमीपूरा पंचांग देखें
  5. 27

    शुक्रवार, 27 जनवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:52 – 11:13
    रेवतीशुक्ल सप्तमीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  6. 30

फ़रवरी2023

6 शुभ दिन
  1. 3

    शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त13:03 – 15:1816:40 – 18:58
    पुनर्वसुशुक्ल त्रयोदशीपूरा पंचांग देखें
  2. 10
  3. 12
  4. 17

    शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त20:29 – 23:46
    उत्तर आषाढ़ाकृष्ण द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  5. 18
  6. 22

    बुधवार, 22 फ़रवरी 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:53 – 08:1809:44 – 11:0914:00 – 15:3117:00 – 03:24
    उत्तर भाद्रपदाशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें

मार्च2023

6 शुभ दिन
  1. 1

    बुधवार, 1 मार्च 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:46 – 08:13
    मृगशिराशुक्ल दशमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 2
  3. 3
  4. 4
  5. 9
  6. 13

अप्रैल2023

1 शुभ दिन
  1. 27

    गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:23 – 08:49
    पुष्यशुक्ल सप्तमीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

मई2023

12 शुभ दिन
  1. 3

    बुधवार, 3 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:13 – 07:1908:58 – 10:38
    हस्तशुक्ल त्रयोदशीसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  2. 6
  3. 10
  4. 11

    गुरुवार, 11 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:14 – 08:5510:36 – 11:2722:17 – 05:33
    उत्तर आषाढ़ाकृष्ण षष्ठीपूरा पंचांग देखें
  5. 12
  6. 15
  7. 20
  8. 21
  9. 22

    सोमवार, 22 मई 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:27 – 07:0908:52 – 10:35
    मृगशिराशुक्ल तृतीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  10. 24
  11. 25

    गुरुवार, 25 मई 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त07:08 – 08:5210:35 – 14:0115:44 – 17:54
    पुष्यशुक्ल षष्ठीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगपूरा पंचांग देखें
  12. 29

जून2023

6 शुभ दिन
  1. 1

    गुरुवार, 1 जून 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:07 – 08:5110:35 – 14:0215:46 – 19:01
    स्वातिशुक्ल द्वादशीपूरा पंचांग देखें
  2. 7
  3. 8
  4. 12

    सोमवार, 12 जून 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त12:21 – 14:0515:50 – 21:59
    उत्तर भाद्रपदाकृष्ण दशमीपूरा पंचांग देखें
  5. 19
  6. 28

नवंबर2023

4 शुभ दिन
  1. 23
  2. 24

    शुक्रवार, 24 नवंबर 2023

    शुभ
    शुभ मुहूर्त06:50 – 08:09
    रेवतीशुक्ल द्वादशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें
  3. 27
  4. 29

    बुधवार, 29 नवंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:54 – 08:1309:31 – 10:5013:27 – 13:59
    मृगशिराकृष्ण द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगपूरा पंचांग देखें

दिसंबर2023

8 शुभ दिन
  1. 1
  2. 2
  3. 6
  4. 7

    गुरुवार, 7 दिसंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:18 – 09:3610:54 – 13:3014:48 – 15:4405:06 – 07:00
    हस्तकृष्ण दशमीपूरा पंचांग देखें
  5. 8
  6. 9
  7. 15

    शुक्रवार, 15 दिसंबर 2023

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त09:40 – 10:5812:16 – 14:5116:08 – 22:30
    उत्तर आषाढ़ाशुक्ल तृतीयापूरा पंचांग देखें
  8. 16

सगाई मुहूर्त के बारे में

सगाई मुहूर्त वाग्दान का समय तय करता है — दोनों परिवारों के बीच दिया गया वचन, जो अंगूठी पहनाकर पक्का होता है — ताकि यह संबंध शुभ आकाश के नीचे आरंभ हो। परंपरा इसे विवाह के ही नियम, किंचित शिथिल करके, मानती है: वही नक्षत्र-परिवार जिसमें पुनर्वसु, पुष्य व श्रवण अतिरिक्त रूप से स्वीकार्य हैं, वही शुभ तिथियाँ जिनमें द्वादशी भी मान्य है — किंतु कठोर विराम विवाह जैसे ही रहते हैं, सबसे बढ़कर यह कि विवाह के दोनों कारक गुरु और शुक्र अस्त न हों। प्रत्येक तिथि के साथ वास्तविक मुहूर्त समय — संध्या मुहूर्त सहित — दिया गया है।

सगाई मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • तिथियाँ विवाह नक्षत्र-परिवार पर पड़ती हैं, सगाई हेतु किंचित शिथिल — वही शिथिलता जो कालप्रकाशिका विवाह-पूर्व विधियों को देती है: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद व रेवती — तथा पुनर्वसु, पुष्य व श्रवण अतिरिक्त स्वीकार्य; पुष्य विवाह में वर्जित है किंतु उससे पहले मान्य। पंचक सगाई में बाधक नहीं।
  • शुभ तिथियाँ विवाह की ही तरह स्तर तय करती हैं — द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी 'सर्वाधिक शुभ' — जबकि प्रतिपदा, षष्ठी व द्वादशी 'शुभ' स्तर पर। द्वादशी केवल विवाह हेतु वर्जित है; अष्टमी, जो विवाह में मान्य है, सगाई में नहीं ली जाती।
  • सोम, बुध, गुरु व शुक्र वार श्रेष्ठ; रवि व शनि 'मध्यम' होकर 'शुभ' स्तर पर; केवल मंगलवार वर्जित — विवाह वाला ही वार-नियम।
  • नौ अशुभ योग, भद्रा (विष्टि करण) व गण्डान्त पद विवाह की ही तरह हटा दिए जाते हैं।
  • प्रकाशित सगाई-पंचांग विवाह जैसे ही रुकते हैं: खरमास, चातुर्मास, अधिक मास — तथा गुरु या शुक्र के अस्त रहने पर, जो सगाई का सर्वाधिक उल्लिखित नियम है।
  • प्रत्येक तिथि के साथ वास्तविक मुहूर्त समय — संध्या मुहूर्त सहित — पूरे दिन-रात के विस्तार में खोजा गया है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जब विवाह रुके हों तब क्या सगाई हो सकती है?
प्रकाशित सगाई-पंचांग विवाह वालों की ही तरह रुकते हैं — खरमास, चातुर्मास, अधिक मास व गुरु/शुक्र अस्त में — अतः उन अवधियों में यहाँ तिथियाँ नहीं दिखतीं। कुछ परिवार पारिवारिक परंपरा से ऐसे समय रोका कर लेते हैं, किंतु पंचांग-सूचियाँ स्वयं इसकी अनुमति नहीं देतीं।
पुष्य सगाई में मान्य और विवाह में वर्जित क्यों?
पुष्य लगभग हर कार्य के लिए शुभ है, केवल विवाह में अनोखे रूप से वर्जित। सगाई पर वह रोक नहीं है — सगाई-स्रोत पुष्य (और श्रवण) को अतिरिक्त शुभ बताते हैं — इसलिए वे तिथियाँ यहाँ दिखती हैं, विवाह पृष्ठ पर नहीं।
क्या सगाई के लिए द्वादशी ठीक है?
हाँ — शास्त्रीय विवाह-तिथि नियम द्वादशी को केवल विवाह संस्कार हेतु वर्जित करता है। सगाई-सूचियाँ उसे स्वीकारती हैं, अतः द्वादशी की तिथियाँ यहाँ 'शुभ' स्तर पर दिखती हैं।
क्या ये तिथियाँ कुंडली मिलान का विकल्प हैं?
नहीं। विवाह की ही तरह यह पंचांग-स्तर की सूची है; गुण मिलान तथा दोनों कुंडलियों में गुरु व शुक्र का बल व्यक्तिगत विषय है — तिथि पक्की करने से पहले ज्योतिषी से पुष्टि कराएँ।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।