मुंडन मुहूर्त 2024
जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ
जनवरी 2024
2 शुभ दिन
सोमवार, 15 जनवरी 2024
सर्वाधिक शुभमुहूर्त समय
- नक्षत्र
- शतभिषा
- तिथि
- शुक्ल पंचमी
- योग
- वरीयान्
- करण
- बव
यह दिन क्यों शुभ
- शतभिषा — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
- शुक्ल पंचमी — अनुकूल तिथि
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न का 'विजय' काल
वर्जित समय
- राहु काल08:33–09:52
- यमगण्ड11:11–12:30
- गुलिक काल13:49–15:08
- वर्ज्यम्16:53–18:20
6 शुभ दिन
2024 में सर्वाधिक शुभ मुंडन तिथियाँ।
जनवरी2024
- 15★सर्वाधिक शुभशुभ मुहूर्त07:15 – 08:06
- 17सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 17 जनवरी 2024
शुभ मुहूर्त07:14 – 08:3309:52 – 11:12
फ़रवरी2024
- 14सर्वाधिक शुभ
बुधवार, 14 फ़रवरी 2024
शुभ मुहूर्त07:00 – 08:2409:48 – 11:11 - 19सर्वाधिक शुभ
सोमवार, 19 फ़रवरी 2024
शुभ मुहूर्त06:56 – 08:2109:45 – 10:32 - 22★सर्वाधिक शुभ
गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024
शुभ मुहूर्त08:19 – 09:4411:09 – 12:34
अप्रैल2024
- 15★सर्वाधिक शुभ
सोमवार, 15 अप्रैल 2024
शुभ मुहूर्त05:55 – 07:3109:08 – 10:44
मुंडन मुहूर्त के बारे में
मुंडन (चूड़ाकरण) पहला केश-संस्कार है, जो शिशु की विषम आयु — प्रायः पहले या तीसरे वर्ष — में बताया गया है। इसका नक्षत्र-समूह विशिष्ट है: लघु व मृदु नक्षत्र तथा ज्येष्ठा, जो तीक्ष्ण गण का धर्मसिंधु-सम्मत एकमात्र अपवाद है, जबकि अन्य संस्कारों के स्थिर नक्षत्र नहीं लिए जाते। शास्त्र इसका समय बड़े संस्कारों जैसा रखते हैं — केवल उत्तरायण, पूर्वाह्न में, गुरु-शुक्र के उदित रहते — अतः वर्ष के उत्तरार्ध, खरमास, चातुर्मास व अधिक मास में इसके कैलेंडर में वास्तविक अंतराल दिखते हैं।
मुंडन मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं
- मुंडन का अपना शास्त्रीय समूह है — लघु व मृदु नक्षत्र तथा ज्येष्ठा, जो तीक्ष्ण गण का धर्मसिंधु-परंपरा-सम्मत एकमात्र अपवाद है: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, ज्येष्ठा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा व रेवती।
- अन्य संस्कारों के स्थिर नक्षत्र (रोहिणी, उत्तरा-त्रय) व अनुराधा जान-बूझकर नहीं लिए जाते; पंचक मुंडन में बाधक नहीं, अतः धनिष्ठा, शतभिषा व रेवती सम्मिलित रहते हैं।
- यह शुक्ल पक्ष में — 'शुक्ल पक्ष आयु देता है' — श्रेष्ठ तिथियों (द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी) पर, सौम्य वारों में होता है।
- प्रथम मुंडन केवल उत्तरायण में होता है — सूर्य मकर से मिथुन तक — और गुरु या शुक्र के अस्त रहते कभी नहीं: शास्त्र चूड़ाकरण की अनुमति 'गुरु-शुक्र के अस्त-मुक्त रहने पर' देते हैं। कैलेंडर खरमास, चातुर्मास व अधिक मास में भी रुकता है।
- 'मुंडन सदा पूर्वाह्न में ही हो' — अतः हर मुहूर्त सूर्योदय से स्थानीय सौर मध्याह्न तक का है। शास्त्र इसे शिशु की विषम आयु — प्रायः पहले या तीसरे वर्ष — में बताते हैं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
- पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
- अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
- राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
- खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
- चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
- अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- मुंडन की सही आयु क्या है?
- शास्त्र पहला चूड़ाकरण शिशु की विषम आयु में बताते हैं — प्रायः पहले या तीसरे वर्ष में।
- मुंडन में ज्येष्ठा नक्षत्र क्यों लिया गया है?
- ज्येष्ठा तीक्ष्ण नक्षत्र है, जो सौम्य संस्कारों में सामान्यतः वर्जित है — किंतु धर्मसिंधु परंपरा इसे विशेष रूप से मुंडन हेतु स्वीकार करती है; यह मुंडन के लघु-मृदु समूह का एकमात्र अपवाद है।
- मुंडन के कैलेंडर में लंबे ऋतु-अंतराल क्यों दिखते हैं?
- शास्त्र प्रथम मुंडन को उत्तरायण तक सीमित करते हैं — सूर्य का उत्तर मार्ग, लगभग मध्य जनवरी से मध्य जुलाई — अतः वर्ष का उत्तरार्ध पूरी तरह रिक्त रहता है। उस अवधि में भी कैलेंडर खरमास, चातुर्मास, अधिक मास और गुरु या शुक्र के अस्त काल में रुकता है, और हर मुहूर्त सुबह का है — बी.वी. रमन के शब्दों में: 'मुंडन सदा पूर्वाह्न में ही हो'।
- क्या मुंडन कृष्ण पक्ष में हो सकता है?
- ये तिथियाँ कठोर नियम रखती हैं: केवल शुक्ल पक्ष सूचीबद्ध है, क्योंकि बढ़ता चंद्रमा शिशु के वृद्धि-संस्कारों के अनुकूल है।
- ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
- प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
- क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
- तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
- कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
- कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
- अभिजित मुहूर्त क्या है?
- अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
- भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
- ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
- क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
- हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।

