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भूमि पूजन मुहूर्त 2024

जीवन के शुभ आरंभ के लिए मंगलमय तिथियाँ

जनवरी 2024

2 शुभ दिन

सो
मं
बु
गु
शु
1
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3
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7
8
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11
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25
27
28
29
30
सर्वोत्तम दिनशुभ

बुधवार, 31 जनवरी 2024

सर्वाधिक शुभ

मुहूर्त समय

श्रेष्ठ मुहूर्त13:5517:59
दिन का सबसे लंबा शुभ मुहूर्त4 घं 3 मि
शुभ मुहूर्त07:1007:33
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त23 मि
शुभ मुहूर्त09:5211:13
इस दिन का एक और शुभ मुहूर्त1 घं 21 मि
नक्षत्र
हस्त
तिथि
कृष्ण पंचमी
योग
सुकर्मा
करण
तैतिल

यह दिन क्यों शुभ

  • हस्त — इस संस्कार हेतु शुभ नक्षत्र
  • कृष्ण पंचमी — अनुकूल तिथि
  • सर्वार्थ सिद्धि योग योग सक्रिय — एक अतिरिक्त शुभता

वर्जित समय

  • राहु काल12:34–13:55
  • यमगण्ड08:31–09:52
  • गुलिक काल11:13–12:34
  • वर्ज्यम्07:33–09:21
दिन का चौघड़िया देखें

38 शुभ दिन

2024 में सर्वाधिक शुभ भूमि पूजन तिथियाँ।

जनवरी2024

2 शुभ दिन
  1. 26
  2. 31

    बुधवार, 31 जनवरी 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त07:10 – 07:3309:52 – 11:1313:55 – 17:59
    हस्तकृष्ण पंचमीसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

फ़रवरी2024

8 शुभ दिन
  1. 1
  2. 5
  3. 8
  4. 19

    सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:56 – 08:2109:45 – 10:32
    मृगशिराशुक्ल दशमीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  5. 21
  6. 22

    गुरुवार, 22 फ़रवरी 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:19 – 09:4411:09 – 13:22
    पुष्यशुक्ल त्रयोदशीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें
  7. 26
  8. 29

मार्च2024

3 शुभ दिन
  1. 1
  2. 6
  3. 8

अप्रैल2024

2 शुभ दिन
  1. 24
  2. 26

    शुक्रवार, 26 अप्रैल 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:44 – 06:3609:01 – 10:4012:19 – 15:3617:14 – 18:53
    अनुराधाकृष्ण द्वितीयासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें

मई2024

5 शुभ दिन
  1. 9
  2. 10
  3. 24

    शुक्रवार, 24 मई 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:25 – 07:0908:52 – 10:3512:18 – 15:4417:27 – 19:10
    अनुराधाकृष्ण प्रतिपदासर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  4. 27
  5. 29

जून2024

6 शुभ दिन
  1. 6
  2. 10
  3. 17
  4. 19
  5. 20
  6. 24

जुलाई2024

3 शुभ दिन
  1. 8
  2. 11
  3. 12

    शुक्रवार, 12 जुलाई 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त05:31 – 07:1508:59 – 10:4312:26 – 15:5417:37 – 19:21
    उत्तर फाल्गुनीशुक्ल षष्ठीदिन का चौघड़िया देखें

नवंबर2024

6 शुभ दिन
  1. 18

    सोमवार, 18 नवंबर 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त06:46 – 07:56
    मृगशिराकृष्ण तृतीयाअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगदिन का चौघड़िया देखें
  2. 20
  3. 21

    गुरुवार, 21 नवंबर 2024

    सर्वाधिक शुभ
    शुभ मुहूर्त08:08 – 09:2710:47 – 13:2614:46 – 15:35
    पुष्यकृष्ण षष्ठीअमृत सिद्धि योगसर्वार्थ सिद्धि योगगुरु पुष्य योगदिन का चौघड़िया देखें
  4. 25
  5. 28
  6. 29

दिसंबर2024

3 शुभ दिन
  1. 2
  2. 5
  3. 6

भूमि पूजन मुहूर्त के बारे में

भूमि पूजन निर्माण आरंभ से पहले भूमि की पूजा — और शिलान्यास, पहला पत्थर रखना — है, ताकि नया भवन पवित्र, स्थिर भूमि पर खड़ा हो। परंपरा स्थिर व सौम्य नक्षत्र और दिन का निर्दोष समय माँगती है, और पंचक पर कठोर है: धनिष्ठा–रेवती पट्टी विशेष रूप से निर्माण को वर्जित करती है, अतः वे दिन पूर्णतः हटाए गए हैं। बने घर में प्रवेश अलग गृह प्रवेश संस्कार है, जिसकी अपनी तिथियाँ हैं।

भूमि पूजन मुहूर्त की तिथियाँ कैसे चुनी जाती हैं

  • भूमि पूजन शास्त्रीय नींव-नक्षत्रों पर होता है — रोहिणी, मृगशिरा, चित्रा, हस्त, ज्येष्ठा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा व श्रवण, जो ग्रंथों का नींव हेतु 'श्रेष्ठ' समूह है (तीक्ष्ण गण की ज्येष्ठा भी इनमें नामित है) — साथ में मध्यम स्तर के पुष्य, स्वाति व अनुराधा।
  • इसका तिथि-नियम रमन की 'मुहूर्त' का नींव-सूत्र है — 'नवमी छोड़कर सभी विषम तिथियाँ शुभ; सम में द्वितीया, षष्ठी व दशमी' — अतः प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी मान्य हैं; गृह प्रवेश के विपरीत यह किसी एक पक्ष से बंधा नहीं है, और सौम्य वारों (सोम, बुध, गुरु, शुक्र) में होता है।
  • पंचक दोष विशेष रूप से निर्माण को वर्जित करता है, अतः धनिष्ठा–रेवती पट्टी हटाई गई है; समय दिन का है, जिसमें अभिजित मुहूर्त श्रेष्ठ स्थान के रूप में दर्शाया गया है।
  • भूमि पूजन खरमास, चातुर्मास व अधिक मास में स्थगित रहता है।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • तिथियाँ नई दिल्ली (IST) हेतु गणना की गई हैं। अन्य शहरों में समय थोड़ा बदलता है।
  • पंचांग के पाँचों अंग एक साथ तौले जाते हैं — दिन तभी प्रबल होता है जब शुभ नक्षत्र के साथ शुभ तिथि और सौम्य वार भी हो।
  • अभिजित मुहूर्त — मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का ~48 मिनट का समय — सर्वत्र शुभ माना जाता है, और गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाया गया है।
  • राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल दैनिक अशुभ अवधियाँ हैं; सूचीबद्ध तिथि पर भी वास्तविक कार्य इनसे बाहर आरंभ करें।
  • खरमास / मलमास — जब सूर्य धनु (मध्य दिसंबर→मध्य जनवरी) या मीन (मध्य मार्च→मध्य अप्रैल) में रहता है — विवाह व बड़े शुभ कार्य रुक जाते हैं।
  • चातुर्मास — देवशयनी से प्रबोधिनी एकादशी तक — विवाह, गृह प्रवेश व कई संस्कार स्थगित रहते हैं।
  • अधिक मास (मलमास) में शुभ कार्य परंपरागत रूप से स्थगित रहते हैं, अतः कुछ महीनों में बहुत कम या कोई तिथि नहीं दिखती।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमि पूजन और गृह प्रवेश में क्या अंतर है?
भूमि पूजन निर्माण आरंभ से पहले भूमि की पूजा व शिलान्यास है; गृह प्रवेश बने हुए घर में पहला औपचारिक प्रवेश। दोनों की तिथियों के अपने-अपने पृष्ठ हैं।
क्या भूमि पूजन कृष्ण पक्ष में हो सकता है?
हाँ — गृह प्रवेश के विपरीत भूमि पूजन शुक्ल पक्ष से बंधा नहीं है, अतः नक्षत्र, तिथि व वार अनुकूल होने पर दोनों पक्षों के शुभ दिन सूचीबद्ध हैं।
पंचक में भूमि पूजन की तिथियाँ क्यों नहीं हैं?
पंचक — चंद्रमा का धनिष्ठा से रेवती तक का संचार — विशेष रूप से निर्माण कार्य को वर्जित करता है, अतः पूरी पट्टी इन तिथियों से हटाई गई है।
शिलान्यास दिन में किस समय करें?
सूचीबद्ध तिथि के दिन के निर्दोष समय में, जिसमें अभिजित मुहूर्त — सौर मध्याह्न के आसपास का लगभग 48 मिनट — श्रेष्ठ स्थान के रूप में दर्शाया गया है। आरंभ राहु काल, यमगण्ड व गुलिक काल से बाहर करें।
ये मुहूर्त तिथियाँ कैसे निकाली जाती हैं?
प्रत्येक दिन को उसके दृक-पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग व करण — के आधार पर, मुहूर्त चिंतामणि, कालप्रकाशिका व बी.वी. रमन की 'मुहूर्त' की शास्त्रीय परंपरा अनुसार अंक दिए जाते हैं। फिर दोषयुक्त दिन (अमावस्या, रिक्ता तिथि, भद्रा या पंचक) हटा दिए जाते हैं, और नई दिल्ली हेतु केवल शुभ तिथियाँ शेष रहती हैं।
क्या ये समय मेरे शहर के लिए मान्य हैं?
तिथियाँ नई दिल्ली (IST) पर आधारित हैं। शुभ दिन प्रायः पूरे भारत में समान रहता है, पर सूर्योदय-आधारित समय — तथा राहु काल व अभिजित जैसी अवधियाँ — स्थान अनुसार थोड़ा बदलते हैं, अतः समय तय करने से पूर्व अपने शहर का पूरा पंचांग देखें।
कुछ महीनों में कोई तिथि क्यों नहीं होती?
कठोर नियम अशुभ तिथियों व नक्षत्रों को हटा देते हैं, और ऋतु-विराम — खरमास (मलमास), चातुर्मास व अधिक मास — बड़े शुभ कार्यों को पूर्णतः रोक देते हैं। इन अवधियों में पड़ने वाले महीने में कम या कोई तिथि न दिखना स्वाभाविक है।
अभिजित मुहूर्त क्या है?
अभिजित स्थानीय मध्याह्न (सौर दोपहर) के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसके स्वामी भगवान विष्णु हैं और जो लगभग हर कार्य हेतु शुभ माना जाता है। मुहूर्त ग्रंथ इसे 'विजय' काल मानते हैं, और हम इसे गृह प्रवेश व भूमि पूजन के मुहूर्त में श्रेष्ठ समय के रूप में दर्शाते हैं।
भद्रा, पंचक व रिक्ता तिथि क्या हैं?
ये वे शास्त्रीय दोष हैं जिन्हें हम हटाते हैं। भद्रा (विष्टि करण) व पंचक (अंतिम पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा से रेवती — में चंद्रमा) अशुभ अवधियाँ हैं; रिक्ता तिथियाँ — प्रत्येक पक्ष की चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी — नए आरंभ हेतु वर्जित 'रिक्त' तिथियाँ हैं।
क्या फिर भी ज्योतिषी से परामर्श करना चाहिए?
हाँ। ये तिथियाँ शास्त्रीय नियमों पर आधारित एक सशक्त सूची हैं, पर ये एक सामान्य कुंडली हेतु निकाली गई हैं। विवाह या किसी बड़े आयोजन हेतु अपनी जन्मकुंडली से मुहूर्त का मिलान कर ज्योतिषी से पुष्टि करना उचित है।